सात बार विम्बलडन एकल खिताब जीत चुके रोजर फेडरर पर यूक्रेन के 116वीं वरीयता प्राप्त 27-वर्षीय खिलाड़ी सर्गेई स्टाखोव्स्की ने दूसरे दौर में 6-7 (5-7), 7-6 (7-5), 7-5, 7-6 (7-5) से जीत हासिल की।
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लंदन:
इस साल के तीसरे ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट विम्बलडन में उलटफेर का दौर बुधवार को भी जारी रहा, और राफेल नडाल, लेटन हेविट, मारिया शारापोवा, अन्ना इवानोविच और सारा ईरानी के बाद इस बार इसके शिकार हुए डिफेन्डिंग चैम्पियन और तीसरी वरीयता प्राप्त विश्वरिकॉर्डधारक रोजर फेडरर। सात बार विम्बलडन में पुरुष एकल खिताब जीत चुके रोजर फेडरर को यह झेलना पड़ा यूक्रेन के 116वीं वरीयता प्राप्त 27-वर्षीय खिलाड़ी सर्गेई स्टाखोव्स्की के हाथों, जिसने फेडरर पर दूसरे दौर में तीन घंटे तक खिंचे मैराथन मुकाबले के दौरान 6-7 (5-7), 7-6 (7-5), 7-5, 7-6 (7-5) से जीत हासिल की।
रोजर फेडरर इससे पहले लगातार 36 बार ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे हैं, और वर्ष 2004 के फ्रेंच ओपन के बाद पहली बार अंतिम आठ में स्थान बनाने से पहले किसी ग्रैंड स्लैम से बाहर हुए हैं।
सर्गेई स्टाखोव्स्की से हार जाने के बाद स्विस चैम्पियन ने कहा, "मैं बेहद निराश हूं... विम्बलडन में हारना हमेशा से ऐसा ही महसूस करवाता है, और यह भावना कभी नहीं बदलेगी, इसलिए मुझे इस फीलिंग से बाहर आना ही होगा... फिर भी इतना ज़रूर कहूंगा कि कभी किसी फाइनल मुकाबले ने भी मुझे इतना दुखी नहीं किया..."
हालांकि रोजर फेडरर ने यह दावा भी किया, "दूसरे दौर में इस अप्रत्याशित हार के बावजूद मैं विचलित नहीं हूं... लगातार 36 बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के बाद यूं हारना सामान्य है... काश, मैं और आगे तक जा पाता, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मेरे प्रशंसकों को इस हार का शोक मनाने की जरूरत है... मैं इसे भूलकर आगे बढ़ गया हूं... और जहां तक संन्यास का सवाल है, मैं अभी संन्यास लेने नहीं जा रहा... अभी मेरे भीतर टेनिस के कुछ साल बचे हैं और मैं वापसी करूंगा..."
दूसरी ओर, उन्होंने सर्गेई स्टाखोव्स्की को जीत के लिए बधाई भी दी और कहा, "इस जीत के लिए उसे (सर्गेई स्टाखोव्स्की को) पूरा श्रेय देता हूं, क्योंकि उसने दबाव का सामना शानदार तरीके से किया... ज़्यादा महत्वपूर्ण प्वाइंट्स के दौरान वह मुझसे कहीं बेहतर खेला..."
लेकिन रोजर फेडरर को लगता है कि टेनिस बदल रहा है। उन्होंने कहा, "टेनिस भारी बदलाव के दौर से गुज़र रहा है और निचली रैंकिंग वाले खिलाड़ी मुझे, राफेल नडाल, नोवाक जोकोविच, एंडी मरे जैसे खिलाड़ियों को हरा रहे हैं..."
उधर, सर्गेई स्टाखोव्स्की को इस जीत पर यकीन करना भी कठिन हो रहा था। 17 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके और लगभग किंवदंती बन चुके रोजर फेडरर के खिलाफ जीत हासिल करने का आश्चर्य सर्गेई के चेहरे पर साफ देखा जा सकता था, जब उसने कहा, "यह वास्तव में हुआ है, मैं यकीन नहीं कर सकता..."
21 कोशिशों के बाद पहली बार टॉप-10 खिलाड़ियों में से किसी को हराने वाले सर्गेई स्टाखोव्स्की ने यह भी कहा, "मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेला, और मैं इतना खुश हूं कि बता भी नहीं सकता..." उल्लेखनीय है कि सर्गेई स्टाखोव्स्की बिना किसी कोच की सहायता के ही खेलते हैं।
अपनी खुशी को ज़ाहिर करते हुए भी सर्गेई स्टाखोव्स्की की बातों से उसका अविश्वास आखिर तक झलकता रहा। उसका कहना था, "जब आप विम्बलडन में रोजर फेडरर से खेलते हैं, तो यह दो लोगों के साथ एक साथ खेलने जैसा होता है... पहले आप उसकी छवि के साथ मुकाबला करते हैं, और साथ ही उस कोर्ट में भी खेलना पड़ता है, जिसमें वह ऐतिहासिक प्रदर्शन करता रहा है... सो, यह दो के मुकाबले एक का मैच था, और मैं इसका वर्णन भी नहीं कर सकता... यह जादू था... मैं कभी इससे बेहतर नहीं खेल सकता..."
रोजर फेडरर इससे पहले लगातार 36 बार ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंटों के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे हैं, और वर्ष 2004 के फ्रेंच ओपन के बाद पहली बार अंतिम आठ में स्थान बनाने से पहले किसी ग्रैंड स्लैम से बाहर हुए हैं।
सर्गेई स्टाखोव्स्की से हार जाने के बाद स्विस चैम्पियन ने कहा, "मैं बेहद निराश हूं... विम्बलडन में हारना हमेशा से ऐसा ही महसूस करवाता है, और यह भावना कभी नहीं बदलेगी, इसलिए मुझे इस फीलिंग से बाहर आना ही होगा... फिर भी इतना ज़रूर कहूंगा कि कभी किसी फाइनल मुकाबले ने भी मुझे इतना दुखी नहीं किया..."
हालांकि रोजर फेडरर ने यह दावा भी किया, "दूसरे दौर में इस अप्रत्याशित हार के बावजूद मैं विचलित नहीं हूं... लगातार 36 बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के बाद यूं हारना सामान्य है... काश, मैं और आगे तक जा पाता, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मेरे प्रशंसकों को इस हार का शोक मनाने की जरूरत है... मैं इसे भूलकर आगे बढ़ गया हूं... और जहां तक संन्यास का सवाल है, मैं अभी संन्यास लेने नहीं जा रहा... अभी मेरे भीतर टेनिस के कुछ साल बचे हैं और मैं वापसी करूंगा..."
दूसरी ओर, उन्होंने सर्गेई स्टाखोव्स्की को जीत के लिए बधाई भी दी और कहा, "इस जीत के लिए उसे (सर्गेई स्टाखोव्स्की को) पूरा श्रेय देता हूं, क्योंकि उसने दबाव का सामना शानदार तरीके से किया... ज़्यादा महत्वपूर्ण प्वाइंट्स के दौरान वह मुझसे कहीं बेहतर खेला..."
लेकिन रोजर फेडरर को लगता है कि टेनिस बदल रहा है। उन्होंने कहा, "टेनिस भारी बदलाव के दौर से गुज़र रहा है और निचली रैंकिंग वाले खिलाड़ी मुझे, राफेल नडाल, नोवाक जोकोविच, एंडी मरे जैसे खिलाड़ियों को हरा रहे हैं..."
उधर, सर्गेई स्टाखोव्स्की को इस जीत पर यकीन करना भी कठिन हो रहा था। 17 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके और लगभग किंवदंती बन चुके रोजर फेडरर के खिलाफ जीत हासिल करने का आश्चर्य सर्गेई के चेहरे पर साफ देखा जा सकता था, जब उसने कहा, "यह वास्तव में हुआ है, मैं यकीन नहीं कर सकता..."
21 कोशिशों के बाद पहली बार टॉप-10 खिलाड़ियों में से किसी को हराने वाले सर्गेई स्टाखोव्स्की ने यह भी कहा, "मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेला, और मैं इतना खुश हूं कि बता भी नहीं सकता..." उल्लेखनीय है कि सर्गेई स्टाखोव्स्की बिना किसी कोच की सहायता के ही खेलते हैं।
अपनी खुशी को ज़ाहिर करते हुए भी सर्गेई स्टाखोव्स्की की बातों से उसका अविश्वास आखिर तक झलकता रहा। उसका कहना था, "जब आप विम्बलडन में रोजर फेडरर से खेलते हैं, तो यह दो लोगों के साथ एक साथ खेलने जैसा होता है... पहले आप उसकी छवि के साथ मुकाबला करते हैं, और साथ ही उस कोर्ट में भी खेलना पड़ता है, जिसमें वह ऐतिहासिक प्रदर्शन करता रहा है... सो, यह दो के मुकाबले एक का मैच था, और मैं इसका वर्णन भी नहीं कर सकता... यह जादू था... मैं कभी इससे बेहतर नहीं खेल सकता..."
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