बीजिंग ओलिंपिक में हिस्सा लेने से चूकी भारतीय पुरुष हॉकी टीम मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में शुरू हो रहे लंदन ओलिंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में शनिवार को सिंगापुर के साथ अपना पहला मैच खेलेगी।
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नई दिल्ली:
बीजिंग ओलिंपिक में हिस्सा लेने से चूकी भारतीय पुरुष हॉकी टीम मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में शुरू हो रहे लंदन ओलिंपिक क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में शनिवार को सिंगापुर के साथ अपना पहला मैच खेलेगी। यह मैच भारत के लिए आसान होगा क्योंकि सिंगापुर की टीम उस स्तर की नही है, जिस स्तर की हॉकी भारतीय टीम खेलती रही है।
ऐसे में टीम इस मैच के जरिए एक बड़ी जीत के साथ जोरदार आगाज करना चाहेगी। यह मैच भारत को अपनी तैयारियों का जायजा लेने का मौका देगा। भारतीय टीम लगभग डेढ़ महीने से इस आयोजन की तैयारी में जुटी है। भारत को अपना पहला मैच बड़े अंतर से जीतना होगा क्योंकि इस मैच में किए गए गोल आने वाले समय में उसके काम आ सकते हैं।
विश्व वरीयता क्रम में भारत को 10वां स्थान प्राप्त है जबकि सिंगापुर की टीम 41वें स्थान पर है। भारत आठ बार ओलिंपिक स्वर्ण जीत चुका है जबकि सिंगापुर ने अब तक एक बार भी ओलिंपिक में हिस्सा नहीं लिया है। और तो और सिंगापुर की टीम में शामिल किसी भी खिलाड़ी ने अब तक एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। इसके बावजूद भारत को सावधान शुरुआत करनी होगी क्योंकि यह टीम बिल्कुल युवा है और इसमें जीत हासिल करने को लेकर जबरदस्त जोश है।
ओलिंपिक हॉकी में भारत का गौरवमयी इतिहास रहा है। वर्ष 1928 में एम्सटर्डम में आयोजित ओलिंपिक खेलों के बाद से भारतीय टीम ने एथेंस ओलिंपिक तक हर बार हॉकी स्पर्धा में हिस्सा लिया है। 2008 में वह पहली बार बीजिंग ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी थी। इसकी कसक टीम खिलाड़ियों के मन में आज भी दिखती है।
भारत ने अपना आखिरी ओलिंपिक स्वर्ण 1980 के मास्को ओलिंपिक में जीता था लेकिन उसके बाद से मानो उसे किसी की बुरी नजर लग गई। तमाम उतार-चढ़ाव और राजनीतिक उठापटक के कारण भारतीय हॉकी संक्रमण काल से गुजरी। इसी का कारण है कि 2010 में नेशनल स्टेडियम में ही आयोजित एफआईएच विश्व कप में वह निराशाजनक तौर पर आठवें स्थान पर रही। इस टूर्नामेंट में टीम को दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिला लेकिन इसके बावजूद भारतीय टीम स्तरीय प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके बाद हालांकि उसने राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया।
अब भारतीय टीम को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी आस्ट्रेलियाई कोच माइकल नॉब्स के हाथों में है, जो इस टीम को नई विधा सिखाने का प्रयास कर रहे हैं। क्वालीफायर्स के लिए चुनी गई टीम में संदीप सिंह, इग्नेश टिर्की, तुषार खांडेकर, सरदार सिंह, शिवेंद्र सिंह और कप्तान तथा गोलकीपर भरत छेत्री जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के अलावा रुपेंद्रपाल सिंह, युवराज वाल्मिकी, दानिश मुज्तबा और बीरेंद्र लाकरा जैसे युव खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण है।
सिंगापुर ओलिंपिक क्वालीफाईंग प्रक्रिया में आरक्षित टीम रही है। सिंगापुर और इटली को मिस्र तथा अमेरिका के क्वालीफायर्स से हटने के बाद दिल्ली में खेलने के लिए आमंत्रित किया गया है। ऐसे में सिंगापुर के पास एशियाई पावरहाउस भारत और तेज हॉकी में माहिर कनाडा के खिलाफ खेलते हुए अपनी टीम के नवसृजन का मौका है।
यूक्रेन के साथ भिड़ेगी महिला टीम :
ध्यानचंद स्टेडियम में शनिवार से पुरुष क्वालीफायर्स के साथ-साथ महिला क्वालीफायर्स टूर्नामेंट भी खेला जाएगा। पुरुष वर्ग की ही तरह महिला वर्ग में भी कुछ छह टीमें लंदन ओलिंपिक के लिए टिकट कटाने का प्रयास करती दिखेंगी। इनमें मेजबान भारत और दक्षिण अफ्रीका का दावा सबसे मजबूत दिख रहा है। भारतीय टीम अपना पहला मैच यूक्रेन के साथ खेलेगी।
वरीयता क्रम में भारत दक्षिण अफ्रीका (12) से एक स्थान नीचे 13वें क्रम पर है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में इस टीम का प्रदर्शन अच्छा नही रहा है। 2010 एशियाई खेलों में यह टीम चौथे और राष्ट्रमंडल खेलों में पांचवें स्थान पर रही थी। अर्जेंटीना में आयोजित चार देशों के टूर्नामेंट में इस टीम को दो मौकों पर दक्षिण अफ्रीका से शिकस्त खानी पड़ी है। ऐसे में इस टीम से औसत प्रदर्शन की आस है लेकिन घरेलू दर्शकों के सामने इसका प्रदर्शन निखर भी सकता है।
जहां तक यूक्रेन की बात है तो यह टीम खुद को इस स्पर्धा के लिए ठीक से तैयार नहीं कर सकी हैं। इसके पीछे इस साल पूर्वी यूरोप का निष्ठुर मौसम और आर्थिक संकट है। विश्व वरीयता क्रम में यूक्रेन 26वें क्रम पर है। यूक्रेन ने 2011 यूरोपीयन चैम्पियनशिप (टीयर-2) में पांचवें स्थान पर रही थी।
भारतीय टीम की कमान 92 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकीं अंसुता लाकरा के हाथों में है। अंसुता की देखरेख में टीम ने हाल ही में अजरबेजान को चार मैचों की टेस्ट श्रृंखला में 4-0 से हराया था। टीम की सबसे अनुभवी सदस्य के तौर पर सुभद्रा प्रधान, जसजीत कौर हांडा और रितु रानी की भूमिका अहम होगी।
इसके अलावा रानी, रोजेलिन डुंगडुंग, जसप्रीत कौर और दीपिका जैसी युवा तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी अपने हुनर का जादू दिखाते हुए अपनी टीम को बड़े अंतर की जीत दिलानी होगी।
ऐसे में टीम इस मैच के जरिए एक बड़ी जीत के साथ जोरदार आगाज करना चाहेगी। यह मैच भारत को अपनी तैयारियों का जायजा लेने का मौका देगा। भारतीय टीम लगभग डेढ़ महीने से इस आयोजन की तैयारी में जुटी है। भारत को अपना पहला मैच बड़े अंतर से जीतना होगा क्योंकि इस मैच में किए गए गोल आने वाले समय में उसके काम आ सकते हैं।
विश्व वरीयता क्रम में भारत को 10वां स्थान प्राप्त है जबकि सिंगापुर की टीम 41वें स्थान पर है। भारत आठ बार ओलिंपिक स्वर्ण जीत चुका है जबकि सिंगापुर ने अब तक एक बार भी ओलिंपिक में हिस्सा नहीं लिया है। और तो और सिंगापुर की टीम में शामिल किसी भी खिलाड़ी ने अब तक एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। इसके बावजूद भारत को सावधान शुरुआत करनी होगी क्योंकि यह टीम बिल्कुल युवा है और इसमें जीत हासिल करने को लेकर जबरदस्त जोश है।
ओलिंपिक हॉकी में भारत का गौरवमयी इतिहास रहा है। वर्ष 1928 में एम्सटर्डम में आयोजित ओलिंपिक खेलों के बाद से भारतीय टीम ने एथेंस ओलिंपिक तक हर बार हॉकी स्पर्धा में हिस्सा लिया है। 2008 में वह पहली बार बीजिंग ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी थी। इसकी कसक टीम खिलाड़ियों के मन में आज भी दिखती है।
भारत ने अपना आखिरी ओलिंपिक स्वर्ण 1980 के मास्को ओलिंपिक में जीता था लेकिन उसके बाद से मानो उसे किसी की बुरी नजर लग गई। तमाम उतार-चढ़ाव और राजनीतिक उठापटक के कारण भारतीय हॉकी संक्रमण काल से गुजरी। इसी का कारण है कि 2010 में नेशनल स्टेडियम में ही आयोजित एफआईएच विश्व कप में वह निराशाजनक तौर पर आठवें स्थान पर रही। इस टूर्नामेंट में टीम को दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिला लेकिन इसके बावजूद भारतीय टीम स्तरीय प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके बाद हालांकि उसने राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया।
अब भारतीय टीम को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी आस्ट्रेलियाई कोच माइकल नॉब्स के हाथों में है, जो इस टीम को नई विधा सिखाने का प्रयास कर रहे हैं। क्वालीफायर्स के लिए चुनी गई टीम में संदीप सिंह, इग्नेश टिर्की, तुषार खांडेकर, सरदार सिंह, शिवेंद्र सिंह और कप्तान तथा गोलकीपर भरत छेत्री जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के अलावा रुपेंद्रपाल सिंह, युवराज वाल्मिकी, दानिश मुज्तबा और बीरेंद्र लाकरा जैसे युव खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण है।
सिंगापुर ओलिंपिक क्वालीफाईंग प्रक्रिया में आरक्षित टीम रही है। सिंगापुर और इटली को मिस्र तथा अमेरिका के क्वालीफायर्स से हटने के बाद दिल्ली में खेलने के लिए आमंत्रित किया गया है। ऐसे में सिंगापुर के पास एशियाई पावरहाउस भारत और तेज हॉकी में माहिर कनाडा के खिलाफ खेलते हुए अपनी टीम के नवसृजन का मौका है।
यूक्रेन के साथ भिड़ेगी महिला टीम :
ध्यानचंद स्टेडियम में शनिवार से पुरुष क्वालीफायर्स के साथ-साथ महिला क्वालीफायर्स टूर्नामेंट भी खेला जाएगा। पुरुष वर्ग की ही तरह महिला वर्ग में भी कुछ छह टीमें लंदन ओलिंपिक के लिए टिकट कटाने का प्रयास करती दिखेंगी। इनमें मेजबान भारत और दक्षिण अफ्रीका का दावा सबसे मजबूत दिख रहा है। भारतीय टीम अपना पहला मैच यूक्रेन के साथ खेलेगी।
वरीयता क्रम में भारत दक्षिण अफ्रीका (12) से एक स्थान नीचे 13वें क्रम पर है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में इस टीम का प्रदर्शन अच्छा नही रहा है। 2010 एशियाई खेलों में यह टीम चौथे और राष्ट्रमंडल खेलों में पांचवें स्थान पर रही थी। अर्जेंटीना में आयोजित चार देशों के टूर्नामेंट में इस टीम को दो मौकों पर दक्षिण अफ्रीका से शिकस्त खानी पड़ी है। ऐसे में इस टीम से औसत प्रदर्शन की आस है लेकिन घरेलू दर्शकों के सामने इसका प्रदर्शन निखर भी सकता है।
जहां तक यूक्रेन की बात है तो यह टीम खुद को इस स्पर्धा के लिए ठीक से तैयार नहीं कर सकी हैं। इसके पीछे इस साल पूर्वी यूरोप का निष्ठुर मौसम और आर्थिक संकट है। विश्व वरीयता क्रम में यूक्रेन 26वें क्रम पर है। यूक्रेन ने 2011 यूरोपीयन चैम्पियनशिप (टीयर-2) में पांचवें स्थान पर रही थी।
भारतीय टीम की कमान 92 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकीं अंसुता लाकरा के हाथों में है। अंसुता की देखरेख में टीम ने हाल ही में अजरबेजान को चार मैचों की टेस्ट श्रृंखला में 4-0 से हराया था। टीम की सबसे अनुभवी सदस्य के तौर पर सुभद्रा प्रधान, जसजीत कौर हांडा और रितु रानी की भूमिका अहम होगी।
इसके अलावा रानी, रोजेलिन डुंगडुंग, जसप्रीत कौर और दीपिका जैसी युवा तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी अपने हुनर का जादू दिखाते हुए अपनी टीम को बड़े अंतर की जीत दिलानी होगी।