गुरुग्राम के फर्रुखनगर की रहने वाली चेतना सैनी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े सपनों के लिए बड़े शहरों की नहीं, बड़े हौसलों की जरूरत होती है. कभी स्कूल में शुरू हुई बॉक्सिंग की छोटी-सी शुरुआत अब अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी तक पहुंच चुकी है. हाल ही में मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित मुकाबले में चेतना ने इसरा को हराकर भारत का परचम लहराया और अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ा अध्याय जोड़ दिया.
विदेशी धरती पर मिली इस जीत के बाद जब चेतना अपने गांव लौटीं तो उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए. फूल-मालाओं से लदी चेतना का स्वागत किसी चैंपियन की तरह किया गया.
चेतना का बॉक्सिंग सफर भी काफी दिलचस्प रहा है. फर्रुखनगर स्थित एसडीएस स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने पहली बार बॉक्सिंग के दस्ताने पहने थे. उस समय उनकी उम्र महज 14 वर्ष थी. स्कूल में बॉक्सिंग की शुरुआत हुई तो उनकी रुचि भी इस खेल की ओर बढ़ी. शुरुआत में यह सिर्फ एक नया खेल सीखने की कोशिश थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने इसे अपने करियर का लक्ष्य बना लिया.
बॉक्सिंग शुरू करने के केवल दो महीने बाद ही चेतना को सब-जूनियर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला. उन्होंने इस अवसर को दोनों हाथों से भुनाया और गोल्ड मेडल जीत लिया. इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
लगातार मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर चेतना ने सुपर बेंटमवेट वर्ग में देश की नंबर-1 रैंकिंग तक का सफर तय किया. उनके खेल जीवन में महान भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम की उपलब्धियों का भी बड़ा प्रभाव रहा. मैरी कॉम की सफलता और संघर्ष की कहानियों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने की प्रेरणा दी.
काहिरा में मिली ताजा जीत इसी लंबे संघर्ष, अनुशासन और मेहनत का परिणाम है. चेतना सैनी की कहानी उन बेटियों के लिए प्रेरणा है जो छोटे कस्बों और गांवों से निकलकर बड़े सपने देखती हैं. उन्होंने साबित कर दिया है कि मंजिल कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता का रास्ता जरूर बनता है.
यहां देखें चेतना सैनी के स्वागत का वीडियो
18 साल की उम्र में शादी, लगा अब कभी रिंग में वापसी नहीं होगी
चेतना सैनी ने जोश टॉक्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि 12वीं के तुरंत बाद 18 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई थी. इससे पहले वह आठवीं से 11वीं कक्षा तक बॉक्सिंग कर चुकी थीं, लेकिन बॉक्सिंग सेंटर बंद होने के कारण खेल छूट गया. शादी, पढ़ाई और बाद में बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच उन्हें लगने लगा था कि अब शायद वह कभी रिंग में वापसी नहीं कर पाएंगी.
नींद में भी निकलते थे पंच, सपना पीछा नहीं छोड़ रहा था
चेतना ने बताया कि बॉक्सिंग से दूर होने के बावजूद उनका सपना जिंदा था. वह कहती हैं कि कई बार सोते समय भी उनके हाथों से पंच निकलने लगते थे. परिवार के लोग भी इस बात को नोटिस करते थे. उनके मुताबिक यह इस बात का संकेत था कि बॉक्सिंग का सपना अभी उनके भीतर जिंदा है और उन्हें बार-बार रिंग में लौटने के लिए पुकार रहा है.
दो बच्चों की मां बनने के बाद फिर पहने ग्लव्स
करीब पांच-छह साल के ब्रेक के बाद चेतना ने दोबारा बॉक्सिंग शुरू करने का फैसला किया. शुरुआत आसान नहीं थी. फिटनेस पहले जैसी नहीं रही थी और उन्हें खुद भी लगता था कि शायद अब यह संभव नहीं होगा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर दी. मेहनत रंग लाई और कुछ ही समय बाद वह प्रतियोगिताओं में फिर से पदक जीतने लगीं.
पति अस्पताल में थे, फिर भी टूर्नामेंट खेलने भेजा
चेतना ने एक भावुक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि हरियाणा स्टेट चैंपियनशिप से पहले उनके पति का गंभीर एक्सीडेंट हो गया था. वह टूर्नामेंट छोड़ना चाहती थीं, लेकिन अस्पताल में भर्ती पति ने ही उन्हें खेलने जाने के लिए प्रेरित किया. चेतना ने बताया कि मुश्किल हालात के बावजूद वह टूर्नामेंट खेलने गईं और पदक जीतकर लौटीं.
हार से टूटीं, ग्लव्स छोड़ने का मन बनाया
ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में एक हार ने चेतना को बुरी तरह निराश कर दिया था. उन्हें महसूस हुआ कि उनकी मेहनत का सही परिणाम नहीं मिल रहा है. एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने बॉक्सिंग छोड़ने का मन बना लिया. लेकिन बाद में प्रोफेशनल बॉक्सिंग में मौका मिलने के बाद उन्होंने नए सिरे से शुरुआत की.
कान का पर्दा फट गया, फिर भी लड़ती रहीं
मुंबई में एक मुकाबले के दौरान चेतना को गंभीर चोट लगी और उनके कान का पर्दा फट गया. मुकाबले के दौरान उन्हें एक कान से सुनाई देना लगभग बंद हो गया था, लेकिन उन्होंने बीच में मुकाबला नहीं छोड़ा। मैच खत्म होने के बाद ही उन्होंने अपनी चोट के बारे में बताया और फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया. चेतना का मानना है कि शादी और बच्चे किसी महिला के सपनों का अंत नहीं होते. वह कहती हैं कि कुछ समय के लिए रास्ता मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर जुनून जिंदा है तो वापसी हमेशा संभव है.
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