नरसिंह यादव (फाइल फोटो)
रियो ओलिंपिक से पहले भारत डोपिंग के मामलों से जूझ रहा है। हाल के वर्षां में भारत का डोपिंग रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। साल 2014 में एंटी डोपिंग एजेन्सी WADA की एक रिपोर्ट के अनुसार रूस और इटली के बाद भारत में सबसे ज़्यादा डोपिंग के मामले सामने आए। मतलब इस सूची में भारत तीसरे नंबर पर है, जो देश में खेल के विकास और ओलिंपिक में उम्मीदों के हिसाब से बिल्कुल भी उचित नहीं है। यह हाल तब है जब 2009 में देश में जोपिंग को रोकने के लिए नाडा (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) की स्थापना की जा चुकी है और वह अपना काम बखूबी कर रही है।
2014-15 में डोपिंग के मामले
रुस 148
इटली 123
भारत 96
भारत में सबसे ज़्यादा डोपिंग के मामले एथलेटिक्स, पावरलिफ़्टिंग और उसके बाद वेटलिफ़्टिंग में पकड़े गए हैं।
सबसे ज़्यादा डोपिंग वाले खेल
एथलेटिक्स 29
पावरलिफ़्टिंग 23
वेटलिफ़्टिंग 22
साल 2000 में डिस्कस थ्रोअर सीमा अंतिल को वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में मिला गोल्ड मेडल छीन लिया गया। उन पर डोपिंग का आरोप लगा।
साल 2005 में दो डिस्कस थ्रोअर अनिल कुमार और नीलम जे सिंह नोरैंड्रोस्टेरॉन के सेवन करने के दोषी पाए गए। दोनों पर दो-दो साल की पाबंदी लगा दी गई।
साल 2010 में शॉट पटर सौरव विज पर भी दो साल का बैन लगा। हालांकि देश की एंटी डोपिंग एजेन्सी NADA ने उन्हें कुछ ही हफ़्ते में क्लीन चीट दे दी और उन्हे कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने दिया गया।
साल 2011 में NADA ने 6 महिला एथलीट पर एक-एक साल की पाबंदी लगाई। इसमें शामिल थे लांग जंपर हरिकृष्णन मुरलीधरन, 4x400 रिले टीम की मनदीप कौर, सनी जोस और अश्विन अकुंजी
2015 में डोपिंग का सबसे बड़ा मामला सामने आया जब 21 वेटलिफ़्टर पॉजिटिव पाए गए।
2014-15 में डोपिंग के मामले
रुस 148
इटली 123
भारत 96
भारत में सबसे ज़्यादा डोपिंग के मामले एथलेटिक्स, पावरलिफ़्टिंग और उसके बाद वेटलिफ़्टिंग में पकड़े गए हैं।
सबसे ज़्यादा डोपिंग वाले खेल
एथलेटिक्स 29
पावरलिफ़्टिंग 23
वेटलिफ़्टिंग 22
साल 2000 में डिस्कस थ्रोअर सीमा अंतिल को वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में मिला गोल्ड मेडल छीन लिया गया। उन पर डोपिंग का आरोप लगा।
साल 2005 में दो डिस्कस थ्रोअर अनिल कुमार और नीलम जे सिंह नोरैंड्रोस्टेरॉन के सेवन करने के दोषी पाए गए। दोनों पर दो-दो साल की पाबंदी लगा दी गई।
साल 2010 में शॉट पटर सौरव विज पर भी दो साल का बैन लगा। हालांकि देश की एंटी डोपिंग एजेन्सी NADA ने उन्हें कुछ ही हफ़्ते में क्लीन चीट दे दी और उन्हे कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने दिया गया।
साल 2011 में NADA ने 6 महिला एथलीट पर एक-एक साल की पाबंदी लगाई। इसमें शामिल थे लांग जंपर हरिकृष्णन मुरलीधरन, 4x400 रिले टीम की मनदीप कौर, सनी जोस और अश्विन अकुंजी
2015 में डोपिंग का सबसे बड़ा मामला सामने आया जब 21 वेटलिफ़्टर पॉजिटिव पाए गए।
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