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This Article is From Jun 09, 2013

विश्व कप के बाद राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल हैं मुख्य लक्ष्य : विजय कुमार

विश्व कप के बाद राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल हैं मुख्य लक्ष्य : विजय कुमार
27 वर्षीय विजय को कंधे की चोट से भी थोड़ी समस्या हो रही थी, यह पूछने पर कि उनकी चोट कैसी तो उन्होंने महू से कहा, ‘‘सबकुछ पहले से बेहतर है। एमआरआई करवाया था, जिसमें सब ठीक है। एथलीट के जीवन में चोटें तो चलती रहती हैं।’’
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नई दिल्ली: लंदन ओलिंपिक में रजत पदक जीतने वाले निशानेबाज विजय कुमार इस महासमर के बाद कुछ धमाल नहीं कर सके लेकिन अब वह आईएसएसएफ विश्वकप के बाद अगले साल होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों की तैयारियों में जी जान से जुट जाएंगे।

27 वर्षीय विजय को कंधे की चोट से भी थोड़ी समस्या हो रही थी, यह पूछने पर कि उनकी चोट कैसी तो उन्होंने महू से कहा, ‘‘सबकुछ पहले से बेहतर है। एमआरआई करवाया था, जिसमें सब ठीक है। एथलीट के जीवन में चोटें तो चलती रहती हैं।’’

यह 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल निशानेबाज कंधे की चोट से उबरने के बाद तीन से 12 जुलाई तक स्पेन के ग्रेनाडा में होने वाले आईएसएसएफ विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करने को बेताब है। साल के अंत में नवंबर में आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल होगा।

सेना के इस लेफ्टिनेंट ने कहा, ‘‘अभी जुलाई में आईएसएसएफ विश्व कप है, जिसमें मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयत्न करूंगा, ताकि रैंकिंग में सुधार हो सके। इसके बाद कुछ घरेलू टूर्नामेंट हैं, जिसके बाद ट्रॉयल्स और फिर राष्ट्रीय प्रतियोगिता होगी। जिससे 2014 राष्ट्रमंडल (ग्लास्गो में 23 जुलाई से तीन अगस्त) और एशियाई खेलों (दक्षिण कोरिया में 19 सितंबर से चार अक्तूबर) की तैयारियों का सिलसिला शुरू होगा।’’

लंदन ओलिंपिक के बाद विजय आईएसएसएफ विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर थे और उनकी निगाहें शीर्ष स्थान हासिल कर पर लगी थी। लेकिन वह तीन विश्व कप चांगवान, फोर्ट बेनिंग और म्यूनिख में भाग लेने के बाद रैंकिग में खिसककर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने इन विश्व कप में क्रमश: 564, 568 और 558 का स्कोर बनाया।

विजय ने कहा, ‘‘एक खिलाड़ी के जीवन में ओलिंपिक खेल शीर्ष पर होते हैं, जिसके बाद राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल का महत्वपूर्ण स्थान होता है। ओलिंपिक में पदक जीतने के बाद खिलाड़ी कुछ समय के लिये राहत महसूस करता है, जिससे उसकी फार्म पर थोड़ा असर पड़ता है क्योंकि इस दौरान वह अपने परिवार से मिलता है, थोड़ा आराम करता है, रिलैक्स होता है।’’


दिल्ली 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाले हिमाचल प्रदेश के इस पिस्टल निशानेबाज ने कहा, ‘‘ओलिंपिक के लिए एथलीट को सही समय पर फार्म में होना होता है, जिससे ओलिंपिक के बाद का पहला साल थोड़ा रिलैक्स रहता है। वह थोड़ा उबरने की प्रक्रिया में होता है, फिर वह राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल की तैयारियों में जुट जाता है। इसके बाद ओलिंपिक के लिए कड़ी मशक्कत शुरू हो जाती है।’’

कंधे की चोट ने उन्हें लंदन ओलिंपिक से पहले से परेशान करना शुरू किया था, लेकिन तब वह इससे उबरने में सफल रहे। चोट फिर उभरने के कारण वह आईएसएसएफ विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये जिससे उनकी रैंकिंग पर भी असर पड़ा।

रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंचने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘प्रयास तो जारी है। रैंकिंग में उतार चढ़ाव तो चलता रहता है। 2009 में भी मैं दूसरे स्थान पर था, फिर नीचे 10 से 15 के बीच आ गया। लेकिन खिलाड़ी के लिये शीर्ष 10 में बने रहना बेहतर होता है।’’

आईएसएसएफ के नये नियमों के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से नए नियम दर्शकों के लिए काफी अच्छे हैं क्योंकि इसमें क्वालीफाइंग राउंड का स्कोर नहीं जुड़ता। दर्शकों को अब स्कोर आसानी से समझ आ जाता है, हम निशानेबाजों के लिये इसमें कोई परेशानी नहीं है।’’ विजय को उनकी उपलब्धियों के लिये राजीव गांधी खेल रत्न, पदम श्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

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