विज्ञापन
This Article is From Oct 08, 2017

पति ने मृत्यु के तीन साल बाद ली एनएससी की राशि, सीआईसी ने दिया जांच का आदेश

आयोग में सुनवाई के दौरान महिला ने डाक विभाग के अधिकारियों से पूछा , ‘सर, कैसे कोई व्यक्ति अपनी मौत के तीन साल बाद डाकघर गया और उसने ब्याज के साथ एनएससी के 50000 रुपए हासिल कर लिये.’

पति ने मृत्यु के तीन साल बाद ली एनएससी की राशि, सीआईसी ने दिया जांच का आदेश
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली: आंध्रप्रदेश के कुरनूल में डाक विभाग की मिलीभगत से एक गरीब वृद्ध विधवा के 50000 रुपए गबन करने का मामला सामने आया है. ‘मेरे पति ने अपनी मृत्यु के तीन साल के बाद कैसे अपना राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) रिटर्न का नकद हासिल कर लिया? ’ एक महिला के इस सवाल ने डाक विभाग के अधिकारियों को पशोपेश में डाल दिया और पारदर्शिता निगरानी इकाई केंद्रीय सूचना आयोग ने जांच का आदेश दिया. एक गरीब एवं अशिक्षित विधवा टी सुब्बाम्मा ने दस साल पुराने इस मामले की तह तक जाने के लिए सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल किया. उसे उसके रिश्तेदार ने आंध्रप्रदेश के कुरनूल में डाक विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर कथित रुप से एनएससी राशि की चपत लगा दी.

सुब्बम्मा के पति आदिशेशैया ने 10-10 हजार रुपये के पांच एनएससी खरीदे थे. आदिशेशैया 2004 में चल बसे. पति के निधन के बाद सुब्बमा ने डाकघर के कई चक्कर काटे लेकिन उसे कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. बाद में उसे बताया गया कि उसके पति ने 2007 में पैसे निकाल लिये थे. अपने बेटे की मदद से उसने पिछले साल आरटीआई आवेदन दिया और एनएससी के निर्गत प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेजों, मामले की जांच आदि समेत दस बातों के बारे में सूचनाएं मांगी. डाक विभाग ने बस सीमित जानकारी दी और आरटीआई कानून की धारा 8(1)(j) का हवाला देते हुए अहम रिकार्ड देने से इनकार कर दिया.

यह भी पढ़ें : प्रधानमंत्री से भी ज्‍यादा वेतन पाता था, इस देश का डाक विभाग प्रमुख

यह धारा निजी सूचनाओं का खुलासा रोकती है. आयोग में सुनवाई के दौरान महिला ने डाक विभाग के अधिकारियों से पूछा , ‘सर, कैसे कोई व्यक्ति अपनी मौत के तीन साल बाद डाकघर गया और उसने ब्याज के साथ एनएससी के 50000 रुपए हासिल कर लिये.’ सूचना आयुक्त श्रीधर आचर्युलु ने कहा कि यह सवाल उस धोखाधड़ी को बेनकाब करता है जो डाकविभाग में हुई और आरटीआई आवेदन पर गुमराहपूर्ण जानकारी का भी खुलासा करती है.

VIDEO : क्या कबाड़ी की दुकान पर पहुंच रही है आपकी चिट्ठी?​
उन्होंने कहा, ‘अधीक्षक भ्रमित हो गये और वह वृद्ध विधवा को जवाब नहीं दे पाये. वह कागजों को पलटते रहे और मदद के लिए अपनी महिला सहायकों एवं संबंधित लिपिकों की ओर ताकते रहे. ’ आचार्युलू ने कहा कि छूट उपबंध का हवाला देकर सूचनाओं से वंचित करना गैरकानूनी है और सुब्बम्मा को 50000रुपए से अधिक की राशि का चपत लगाने के लिए डाक विभाग के अधिकारी की कथित संलिप्तता में मामले की लीपापोती जान पड़ती है.

(इनपुट भाषा से)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com