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48 घंटे VS 96 घंटे...ईरान की तरह केरल के पहाड़ों में भी चला रेस्क्यू ऑपरेशन, बचाई गई महिला के हौसले को सलाम

Kerala Trekkers Missing: कर्नाटक के कोडागु के ताडियांडामोल पहाड़ी पर ट्रेकिंग के दौरान लापता हुई केरल की शरण्या (36 वर्ष) चार दिन बाद सुरक्षित मिल गई है. वो रविवार को ताडियांडामोल में सुरक्षित मिली. शरण्या को तलहटी में रहने वाले एक आदिवासी समुदाय के युवाओं ने खोजा.

48 घंटे VS 96 घंटे...ईरान की तरह केरल के पहाड़ों में भी चला रेस्क्यू ऑपरेशन, बचाई गई महिला के हौसले को सलाम
चार दिन बाद सुरक्षित मिली केरल की शरण्या. (Photo Credit- NDTV)

Kerala Trekkers Missing: एक तरफ ईरान की जमीन पर अमेरिका के F-15E फाइटर जेट के गिरने और फिर अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए 48 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया... तो वहीं दूसरी ओर भारत के केरल के पहाड़ों में 96 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन चला. यह रेस्क्यू ऑपरेशन कर्नाटक के कोडागु के ताडियांडामोल पहाड़ी पर ट्रेकिंग के दौरान लापता हुई केरल की शरण्या (36 वर्ष) को ढूंढने के लिए चलाया गया. यह सर्च ऑपरेशन ANF, पुलिस, वन अधिकारियों और स्थानीय निवासियों के संयुक्त प्रयासों से चलाया गया. हालांकि चार दिन बाद केरल की शरण्या सुरक्षित मिल गई है. वो रविवार को ताडियांडामोल में सुरक्षित मिली. 

शरण्या को तलहटी में रहने वाले एक आदिवासी समुदाय के युवाओं ने खोजा. फिलहाल उनकी सेहत स्थिर बताई जा रही है. चार दिनों तक जंगलों में भटकने वाली इस महिला के हौसले को सभी लोग सलाम कर रहे हैं... दरअसल, खूंखार जानवरों वाले इस जंगल में शरण्या गुरुवार को ग्रुप से बिछड़ गई थी, जिसके बाद वो रास्ता भटक गई. चार दिनों तक वह जंगल में चलती रही. वहीं तीन दिनों तक जंगल की अंधेरी रात खुले आसमान के नीचे बिताया. उसके पास सिर्फ पानी था... मोबाइल फोन की बैटरी भी खत्म हो गई थी. वो इन मुश्किल हालातों में हिम्मत नहीं हारी.

चार दिनों तक जंगल में भटकती रही शरण्या

रेस्क्यू के बाद शरण्या ने NDTV से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने अपने अनुभव के बारे में बताया. शरण्या ने बताया, 'वह रास्ता भटक गई थी, मगर उसे कभी डर नहीं लगा. पता नहीं क्यों, मुझे न तो डर लगा और न ही भूख... चार दिन तक सिर्फ पानी पिया. दरअसल, मैंने अपने साथ खाना नहीं रखा था,  क्योंकि यह एक आसान ट्रैक था. मेरे पास सिर्फ पानी थी. मैं जहां रुकी थी, उसके पास ही एक छोटी सी नदी थी और मैंने उसी का पानी पीकर अपना गुजारा किया.

उन्होंने आगे बताया, 'तीन रातें और चार दिन जंगल में बिताए, बिल्कुल नहीं डरी. मुझे ट्रेकिंग बहुत पसंद है, आगे भी ट्रेकिंग करती रहूंगी.' हालांकि शरण्या परिवार को देखकर भावुक हो गई. 

लंबे ट्रैक पर निकली थी

टेक-प्रोफेशनल जी एस शरण्या केरल के कन्नूर की रहने वाली हैं. वो कर्नाटक के कोडागु में एक होमस्टे में ठहरी हुई थी. बताया जा रहा है कि वो गुरुवार को ताडियांडामोल के जंगल में 15 अन्य लोगों और एक नेचर गाइड के साथ लंबे ट्रैक पर निकली थी, लेकिन वो ग्रुप से बिछड़कर रास्ता भटक गई. जब शरण्या ट्रेकर बेस पॉइंट पर वापस नहीं लौटी, तो कोडागु जिले में मल्टी-एजेंसी सर्च ऑपरेशन चलाया गया. खोजबीन के दौरान CCTV फुटेज में उसे ट्रेकिंग मार्ग में प्रवेश करते हुए देखा गया था, लेकिन वह वहां से बाहर नहीं निकली. 

यह ऑपरेशन ताडियांडामोल पहाड़ी क्षेत्र में नक्सल-विरोधी बल (एएनएफ), पुलिस, वन अधिकारियों और स्थानीय निवासियों के संयुक्त प्रयासों से चलाया गया. सर्च ऑपरेशन में मोबाइल फोन ट्रैकिंग, कॉल डेटा रिकॉर्ड विश्लेषण, थर्मल इमेजिंग ड्रोन और स्निफर डॉग की मदद ली गई. 

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