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10 लाख तक कैशलेस इलाज, मान सरकार में शहरों से कस्बों तक बदली पंजाब की तस्वीर

पंजाब में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब लाखों मरीजों को बिना कोई भुगतान किए इलाज मिल रहा है. हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस कवर देकर स्वास्थ्य सेवाओं को भुगतान क्षमता से मुक्त किया गया है.

10 लाख तक कैशलेस इलाज, मान सरकार में शहरों से कस्बों तक बदली पंजाब की तस्वीर
पंजाब सीएम भगवंत मान
  • मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत पंजाब में तीन महीनों में 40 लाख से अधिक हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं
  • योजना के अंतर्गत हर परिवार को सालाना दस लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज कवरेज प्रदान किया जा रहा है
  • योजना का प्रभाव टियर-1 से लेकर 3 जिलों तक समान रूप से पहुंचा है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव दिख रहा

शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, पंजाब में एक ऐसी तस्वीर उभर रही है, जहां पर सालों तक आम लोगों की कल्पना से परे थी. जिन अस्पतालों के बिल लाखों रुपये में पहुंच जाते थे, वहां अब मरीज बिना एक भी पैसा दिए इलाज कराकर अपने घर लौट रहे हैं. इलाज में देरी, कर्ज का डर और दवाइयां अधूरी छोड़ने की मजबूरी, ये सब अब धीरे‑धीरे अतीत का हिस्सा बनते जा रहे हैं. इसकी वजह है मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में लागू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना, जिसने पंजाब के स्वास्थ्य तंत्र की दिशा ही बदल दी है.

पिछले कई वर्षों से महंगे इलाज के कारण बड़ी संख्या में मरीज गंभीर बीमारियों के बावजूद अस्पताल जाने से बचते थे. शहर हो या गांव, आर्थिक तंगी इलाज के फैसले पर हावी रहती थी. इसका नतीजा यह होता था कि बीमारी बढ़ती जाती, परिवार कर्ज में डूब जाता और स्वास्थ्य परिणाम और खराब हो जाते. लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है और यह बदलाव राज्य के हर कोने में साफ दिखाई दे रहा है.

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना से 40 लाख से अधिक पंजीकरण

इस परिवर्तन के केंद्र में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना है, जो भगवंत मान सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य पहलों में से एक है. केवल तीन महीनों के भीतर इस योजना के तहत 40 लाख से अधिक हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं. इसके तहत हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज कवर मिल रहा है. 21 अप्रैल को ही 28,766 नए पंजीकरण दर्ज किए गए, जो यह दर्शाता है कि जनता का भरोसा इस योजना में लगातार बढ़ रहा है और स्वास्थ्य सेवाएं अब अधिक समावेशी व जवाबदेह बन रही हैं.

टायर‑1 से टियर‑3 जिलों तक समान पहुंच

इस योजना का प्रभाव केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा. पंजीकरण के आंकड़े बताते हैं कि लुधियाना 4.20 लाख कार्डों के साथ सबसे आगे है, इसके बाद पटियाला (3.82 लाख) और जालंधर (2.85 लाख) हैं. लेकिन असली बदलाव की तस्वीर होशियारपुर, अमृतसर, मानसा, फाजिल्का और बरनाला जैसे टायर‑2 और टायर‑3 जिलों में नजर आती है. यहां बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि पंजाब सरकार का स्वास्थ्य मॉडल उन इलाकों तक पहुंच रहा है, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी.

जमीन पर दिख रहा असली बदलाव

योजना का असर सबसे स्पष्ट रूप से अस्पतालों में देखने को मिल रहा है. उप‑मंडलीय अस्पताल खन्ना के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनिंदर सिंह भसीन बताते हैं कि स्वास्थ्य सेवा को अब किसी विशेष वर्ग का अधिकार नहीं माना जा रहा. उनके अनुसार, हाल के महीनों में अस्पताल में 200 से अधिक गॉलब्लैडर सर्जरी की गईं, जिनकी सामान्य लागत 40,000 से 80,000 रुपये होती है, लेकिन इन सभी मरीजों को योजना के तहत पूर्णतः मुफ्त इलाज मिला. वे बताते हैं कि घुटने और कूल्हे की रिप्लेसमेंट सर्जरी, जिनका खर्च 1 लाख रुपये से अधिक होता है, अब नियमित रूप से और पूरी तरह कैशलेस की जा रही हैं. अस्पताल में रोजाना लगभग 10 सर्जरी हो रही हैं और मरीजों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ रहा.

आपातकालीन इलाज में भी जान बचाने वाला असर

आपातकालीन मामलों में भी योजना जीवनरक्षक साबित हो रही है. डॉ. भसीन के अनुसार, एसटी‑एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (STEMI) जैसे हार्ट‑अटैक मामलों में समय सबसे अहम होता है. टेनेक्टेप्लाज़ जैसी थ्रोम्बोलिटिक दवा का इस्तेमाल कर अब तक करीब 100 मरीजों की जान बचाई जा चुकी है. बरनाला के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. करन चोपड़ा भी बताते हैं कि जहां पहले मरीज महीनों तक सर्जरी टालते थे, अब वे तुरंत इलाज के लिए आगे आ रहे हैं। हर सर्जरी में मरीजों को 1 से 1.5 लाख रुपये तक की सीधी बचत हो रही है.

स्वास्थ्य मंत्री का साफ संदेश

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि स्वास्थ्य सेवाएं अब किसी की भुगतान क्षमता पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का वार्षिक कवर दिया जा रहा है, ताकि कोई भी परिवार आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित न रहे.

डर से भरोसे की ओर स्वास्थ्य व्यवस्था

पंजाब सरकार केवल अस्पतालों की संख्या या बजट नहीं बढ़ा रही, बल्कि नागरिकों और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच भरोसे का रिश्ता भी नया आकार ले रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक सबसे बड़ा बदलाव मानसिक स्तर पर आया है. डर कम हुआ है और लोग बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज लेने लगे हैं. यह बदलाव केवल नीति नहीं, बल्कि लोगों के जीवन और सम्मान से जुड़ा सुधार है. जहां इलाज अब किसी विशेष अधिकार की तरह नहीं, बल्कि हर नागरिक के अधिकार के रूप में सुनिश्चित किया जा रहा है.

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