हूटर बजते ही डगआउट में बैठी भारत की सबसे अनुभवी खिलाड़ी सविता पूनिया और उनकी साथी गोलकीपर बिछू देवी अपने आंसू नहीं रोक सकी और ठीक पीछे बैठी इशिका चौधरी को यकीन ही नहीं हुआ कि अपने पहले ही विश्व कप में वह पदक के इतने करीब पहुंचकर चूक गई. आस्ट्रेलिया से दूसरे चरण का मैच गोलरहित ड्रॉ रहने के बाद भारतीय टीम समान अंक के बावजूद गोल की गणना के आधार पर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई.
मैच के बाद खिलाड़ियों के चेहरे बयां कर रहे थे कि उन पर क्या बीत रही है. मैदान से निकलकर अपनी टीम बस का इंतजार कर रही खिलाड़ियों की आंखें लाल थी. मुख्य कोच शोर्ड मारिन मीडिया से बात कर रहे थे लेकिन अपनी उदासी नहीं छिपा सके. टीम के वैज्ञानिक सलाहकार और एथलीट परफार्मेस प्रमुख वेन लोम्बार्ड और सीनियर खिलाड़ी पहली बार विश्व कप खेल रही खिलाड़ियों का हौसला बंधा रहे थे.
भारतीय टीम में 11 खिलाडियों का यह पहला विश्व कप है और उन्हें यकीन की नहीं हो रहा था कि वे सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हैं. सीढियों पर बैठकर फोन पर अपनी मां से बात कर रही एक खिलाड़ी ने कहा,"यह सबसे अच्छा मौका था. हम इतने करीब पहुंच गए थे और अब पता नहीं कब ये मौका मिलेगा."
Heartbreaking scenes 🥺💔
— Sports Apna 🇮🇳 (@sportsapna1) August 24, 2026
Savita Punia and Bichu Devi gave everything for India, but the dream of reaching the Hockey World Cup semi-finals is over.pic.twitter.com/WSItQZvTL1
तीसरा विश्व कप खेल रही सविता चुपचाप खड़ी थी और इतना ही बोल सकी कि यह सर्वश्रेष्ठ मौका था. अनुभवी मिडफील्डर नेहा गोयल के आंसू नहीं थम रहे थे. उनसे कहा गया कि आगे एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है तो उन्होंने सिर्फ हां में सिर हिलाया और कुछ बोल नहीं सकी.
भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप में कभी पदक नहीं जीती है और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में फ्रांस में खेले गए पहले ही विश्व कप में था जब टीम चौथे स्थान पर रही थी. अब भारत को पांचवें छठे स्थान का मुकाबला 27 अगस्त को खेलना है और वह भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा. उन्हें ढांढस देने के लिये यह बताने पर भी एक खिलाड़ी का जवाब था,"पदक तो पदक ही होता है ना."
टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने कहा,"हम खुश नहीं है क्योंकि पदक के इतने करीब आने के बाद चूकना नहीं था. हमने इसके लिये इतनी मेहनत की थी. अच्छा भी खेले लेकिन फिनिश नहीं कर पाये."
उन्होंने कहा,"हम हार में भी साथ हैं और जीत में भी. हमें इससे सीख मिली है कि कोई मौका नहीं गंवाना है. अब पांचवें स्थान के लिये खेलना है और दोबारा वापसी करेंगे. हमने अभी तक जुझारूपन नहीं छोड़ा है और इस आखिरी मैच में भी नहीं छोड़ेंगे."
सलीमा ने कहा कि यह दिन उनकी टीम का नहीं था जबकि इससे पहले हर मैच में खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है. उन्होंने कहा,"इतने बड़े मंच पर आप खेल रहे हैं तो यहां आकर खाली हाथ जाना अच्छा नहीं लग रहा. लेकिन हम टीम का मनोबल बढायेंगे और पांचवां स्थान लेकर ही जायेंगे."
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