भारतीय जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार को डोप टेस्ट में फेल होने के बाद ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों से हटा दिया गया है. अरुण 73 किग्रा वर्ग में चुनौती पेश करते हैं और उन्होंने पिछले महीने किंगदाओ ग्रां प्री में हिस्सा लिया था. राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने उन्हें अस्थाई तौर पर निलंबित किया है. भारत ने जूडो के लिए 14 सदस्यीय मजबूत टीम चुनी थी जिसमें सात पुरुष और इतनी ही महिला खिलाड़ी शामिल थीं. अब भारतीय दल में 124 खिलाड़ी रह गए हैं.
भारतीय जूडो महासंघ से जुड़े एक सूत्र ने पीटीआई को बताया,"निलंबन की अधिसूचना आ गई है. हमें उन्हें हटाना पड़ा." जूडो दल अभी ग्लास्गो के लिए रवाना नहीं हुआ है क्योंकि उनकी प्रतियोगिता 31 जुलाई से शुरू होगी.
21 साल के अरुण ने पिछले साल ताइपे एशियन ओपन में गोल्ड मेडल जीता था. भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के पिछले एडिशन में तीन मेडल जीते थे. 2022 में बर्मिंघम गई छह सदस्यों की टीम ने तीन मेडल जीते थे -- दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़.
उस टीम में शामिल सिल्वर मेडल जीतने वाली तुलिका मान, 78kg कैटेगरी में अपने मेडल का रंग बेहतर करने की कोशिश करेंगी. ग्लासगो गेम्स की तैयारी के लिए जूडो खिलाड़ियों ने 17 जुलाई तक जापान की त्सुकुबा यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग की थी.
वेटलिफ्टिंग में घटा कोटा
क्वालीफिकेशन अवधि के दौरान कई डोपिंग रोधी नियम उल्लंघनों (एडीआरवी) के कारण भारत का कोटा कम किए जाने के बाद भारोत्तोलक दिलबाग सिंह को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए दल से बाहर कर दिया गया. राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारत का भारोत्तोलन कोटा 16 से घटाकर 11 कर दिया गया है.
भारतीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफ) ने ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू की अगुवाई में 12 सदस्यीय टीम की घोषणा की थी. महासंघ का कहना है कि उसे कोटा घटाए जाने की जानकारी बुधवार को ही मिली.
एक विश्वसनीय सूत्र ने पीटीआई से बातचीत में कहा,"महासंघ को 12 से घटाकर 11 भारोत्तोलकों का कोटा किए जाने की जानकारी कल ही मिली." उन्होंने बताया,"चूंकि दिलबाग पीठ की चोट से जूझ रहे हैं और उन्होंने बर्मिंघम में आयोजित तैयारी शिविर के दौरान बिल्कुल भी ट्रेनिंग नहीं की इसलिए उन्हें टीम से बाहर करने का फैसला किया गया."
राष्ट्रमंडल खेलों से पहले एन अजीत (71 किग्रा), साईराज परदेशी (88 किग्रा) और हरचरण सिंह (110 किग्रा) पर डोपिंग के कारण प्रतिबंध लगाया गया था. महिला भारोत्तोलक वंशिता वर्मा (86 किग्रा) को भी क्वालीफिकेशन अवधि के दौरान डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर प्रतिबंधित किया गया था.
कोटा में यह कटौती भारतीय भारोत्तोलन के लिए एक और बड़ा झटका है क्योंकि डोपिंग से जुड़े मामलों के कारण इस खेल को पहले भी कई बार प्रतिबंधों और दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.
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