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पिता के संघर्ष को साक्षी ने किया साकार, ग्लासगो में पदक किया पक्का, इस टर्निंग प्वाइंट ने बदल दिया करियर

जैसी उम्मीद थी, साक्षी चौधरी ने क्वार्टरफाइनल में ठीक वैसा ही प्रदर्शन किया. इस हरियाणी छौरी ने मुकाबले को एकतरफा बनाते हुए सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक सुनिश्चित कर दिया

पिता के संघर्ष को साक्षी ने किया साकार, ग्लासगो में पदक किया पक्का,  इस टर्निंग प्वाइंट ने बदल दिया करियर

जैसी उम्मीद थी, हरियाणा की साक्षी ने कॉमनवेल्थ खेलों के सातवें दिन बुधवार को ठीक वही किया. अपने करियर में स्टार निकहत को मात देने वालीं साक्षी चौधरी ने आयरलैंड की कैटलिन फ्रेयर्स को एकतरफा मुकाबले में क्वार्टरफाइनल में 5-0 से हराकर भारत के लिए कांस्य पदक सुनिश्चित कर दिया. और जिस तरह हरियाणा की यह छोरी क्वार्टरफाइनल में दिखाई पड़ी, उससे साफ लगा कि वह भारत को रजत या स्वर्ण में से कोई एक पदक जरूरत दिलाकर लौटेंगी. बहरहाल, साक्षी ने कांस्य पदक सुनिश्चत किया, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि इस पदक तक पहुंचने के लिए इस हरियाणवी छोरी ने कितना ज्यादा संघर्ष और तपस्या की है

बहुत ही साधारण रहा बचपन 

साक्षी का जन्म हरियाणा के रोहतक जिले के भिवानी क्षेत्र के धनखड़ी गाव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ. और उनके परिवार में दूर-दूर तक खेलों से किसी का भी कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन साक्षी बचपन से खेलों में सक्रिय रहीं और लड़कों के खेल खेला करती थीं. शुरुआत में उन्हें क्रिकेट ने आकर्षित किया और वह क्रिकेटर बनना चाहती थीं. वे बचपन में बेहद जिद्दी स्वभाव की थीं, इसलिए उनके परिवार ने उनकी ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए उन्हें बॉक्सिंग अकादमी में डाल दिया

पिता का संघर्ष का बड़ा योगदान

साक्षी के पिता किसान हैं और खेती से ही घर चलाते हैं. साक्षी जब जूनियर लेवल पर खेल रही थीं, तब उनकी ट्रेनिंग के लिए रोहतक शहर में कमरा किराए पर लेना पड़ा था. ऐसे में उनके पिता गांव से रोजाना अपनी टूटी हुई मोटरसाइकिल पर दूध और घर का खाना लेकर साक्षी के पास शहर आते थे ताकि बेटी की डाइट से कोई समझौता न हो. साथ ही, पिता ने अपनी खेती की कमाई का बड़ा हिस्सा उनकी ट्रेनिंग में झोंक दिया. यहां तक कि कई बार घर की जरूरतों को दरकिनार कर साक्षी के खेल उपकरणों का इंतजाम किया

क्रिकेट के शौक से बॉक्सिंक में इंट्री

साक्षी शुरुआत में क्रिकेट खेलने का शौक रखती थीं, लेकिन उनके चाचा औ स्थानीय कोच की सलाह पर फिर साक्षी ने बॉक्सिंग को चुना करियर की शुरुआत में ही कंधे और कलाई की चोटों ने उनका रास्ता रोकने की कोशिश की.  कई बार चोट के कारण महीनों रिंग से दूर रहना पड़ा, जिससे कई बार लगा कि उनका करियर मानो खत्म हो गया. 

करियर का बड़ा  टर्निंग प्वाइंट 

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हुए नेशनल ट्रायल्स साक्षी के जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुए. उन्होंने सेमीफाइनल में दो बार की वर्ल्ड चैंपियन निकहत जरीन को हराकर और फिर फाइनल में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा को हराकर पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया और ग्लासगो का टिकट पक्का किया. 


 

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