मुंबई:
मुंबई के पश्चिमी उपनगर कांदिवली के दामूनगर में सोमवार दोपहर लगी भीषण आग में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य जख्मी हो गए। इस हादसे में सैकड़ों झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। आधिकारिक तौर पर आग लगने की वजहों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सिलेंडर विस्फोट के बाद बस्ती लपटों के हवाले हो गई।
संजय गांधी नेशनल पार्क से लगे दामूनगर की झुग्गियों में दोपहर लगभग 12:30 बजे लपटें धधकीं और एक के बाद एक कई सिलेंडर फटे। दमकल की दो दर्जन गाड़ियों और पानी के टैंकरों को लपटों पर काबू पाने में तीन घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया। हादसे के बाद डिप्टी फायर अफसर कैलाश अरावले ने कहा "यहां लोग रहते हैं, बिस्तर, घरेलू सामान, गद्दे, तार सबकुछ जलकर ख़ाक हो गए। हमने हालात पर काबू कर लिया है।"
आग दोपहर के वक्त लगी और उस वक्त ज्यादातर लोग काम पर गए थे। किसी के घर में चूल्हा जला था और उसी की लपटों ने सारी जमा पूंजी लील ली। हादसे में अपना सबकुछ गंवा चुके लोग, तिनका-तिनका चुन रहे हैं। नया आशियाना बनाना है, लेकिन प्रशासन से जबर्दस्त नाराज़गी है।
इलाके में रहने वाले किशोर ने कहा, "2008 में हमारी बस्ती तोड़ी गई थी, अब हमारे सारे कागज़ात भी जल गए। फॉरेस्ट विभाग वाले आएंगे तो हम उन्हें क्या दिखाएंगें? वहीं अफरोज़ अपने परिवार के लिए परेशान थे। उन्होंने कहा " हमारा सब कुछ जल गया, रात को हम रहेंगे कहां, खाएंगे क्या?"
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में बने गोदाम में रखे सिलेंडर में विस्फोट के बाद लपटें धधकीं। मुंबई की मेयर स्नेहल अंबेकर ने कहा, "लोगों का कहना है कि सिलेंडर विस्फोट के बाद आग फैली और उससे आसपास के घर भी चपेट में आ गए।" हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। घायलों को शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से चार लोगों को मरहम-पट्टी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
संजय गांधी नेशनल पार्क से लगे दामूनगर की झुग्गियों में दोपहर लगभग 12:30 बजे लपटें धधकीं और एक के बाद एक कई सिलेंडर फटे। दमकल की दो दर्जन गाड़ियों और पानी के टैंकरों को लपटों पर काबू पाने में तीन घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया। हादसे के बाद डिप्टी फायर अफसर कैलाश अरावले ने कहा "यहां लोग रहते हैं, बिस्तर, घरेलू सामान, गद्दे, तार सबकुछ जलकर ख़ाक हो गए। हमने हालात पर काबू कर लिया है।"
आग दोपहर के वक्त लगी और उस वक्त ज्यादातर लोग काम पर गए थे। किसी के घर में चूल्हा जला था और उसी की लपटों ने सारी जमा पूंजी लील ली। हादसे में अपना सबकुछ गंवा चुके लोग, तिनका-तिनका चुन रहे हैं। नया आशियाना बनाना है, लेकिन प्रशासन से जबर्दस्त नाराज़गी है।
इलाके में रहने वाले किशोर ने कहा, "2008 में हमारी बस्ती तोड़ी गई थी, अब हमारे सारे कागज़ात भी जल गए। फॉरेस्ट विभाग वाले आएंगे तो हम उन्हें क्या दिखाएंगें? वहीं अफरोज़ अपने परिवार के लिए परेशान थे। उन्होंने कहा " हमारा सब कुछ जल गया, रात को हम रहेंगे कहां, खाएंगे क्या?"
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में बने गोदाम में रखे सिलेंडर में विस्फोट के बाद लपटें धधकीं। मुंबई की मेयर स्नेहल अंबेकर ने कहा, "लोगों का कहना है कि सिलेंडर विस्फोट के बाद आग फैली और उससे आसपास के घर भी चपेट में आ गए।" हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। घायलों को शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से चार लोगों को मरहम-पट्टी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।