बॉम्बे हाईकोर्ट का फाइल फोटो...
- नाबालिग लड़का 14 नवंबर, 2015 को अपने परिवार की कार चला रहा था.
- एक्सीडेंट होने से पीछे की सीट पर बैठा उसका नाबालिग मित्र घायल हो गया था.
- यह राशि दो सप्ताह में शहर के दो अस्पतालों में जमा कराने के आदेश.
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मुंबई:
बॉम्बे हाईकोर्ट ने लाइसेंस नहीं होने के बावजूद कार चलाने वाले नाबालिग लड़के के पिता पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है.
लड़का 14 नवंबर, 2015 को अपने परिवार की कार चला रहा था, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस दौरान पीछे की सीट पर बैठा उसका नाबालिग मित्र घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कार चलाने वाले लड़के के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने के संबंध में वरसोवा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था.
हालांकि बाद में दोनों बच्चों के माता-पिता के बीच सुलह हो गई और उन्होंने उच्च न्यायालय में संयुक्त याचिका दायर कर प्राथमिकी खारिज करने की अपील की.
न्यायमूर्ति नरेश पाटिल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक हालिया आदेश में कहा, 'सामान्य परिस्थितियों में हम दोनों पक्षों को कोई जुर्माना लगाए बिना या मामूली जुर्माना देने पर प्राथमिकी खारिज करने की अनुमति दे देते, लेकिन इस मामले से संबंधित तथ्य परेशान करने वाले हैं.'
पीठ के कहा, 'वाहन के मालिक यानी याचिकाकर्ता के पिता ने अपने बेटे को चौपहिया वाहन चलाने की अनुमति दी, जिसके कारण प्रतिवादी का नाबालिग बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया. हम सरकारी अभियोजक की इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि इस मामले के जरिए समाज में संदेश देने की आवश्यकता है. इस स्थिति में किसी अन्य यात्री या तीसरे पक्ष को भी गंभीर नुकसान हो सकता था. सौभाग्य से ऐसा नहीं हुआ'. पीठ ने इस शर्त पर प्राथमिकी खारिज कर दी कि याचिकाकर्ता का पिता 50,000 रुपये का जुर्माना भरे और यह राशि दो सप्ताह में टाटा मेमोरियल अस्पताल और मुंबई के कैंसर अनुसंधान संस्थान में जमा कराई जाए.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
लड़का 14 नवंबर, 2015 को अपने परिवार की कार चला रहा था, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस दौरान पीछे की सीट पर बैठा उसका नाबालिग मित्र घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कार चलाने वाले लड़के के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने के संबंध में वरसोवा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था.
हालांकि बाद में दोनों बच्चों के माता-पिता के बीच सुलह हो गई और उन्होंने उच्च न्यायालय में संयुक्त याचिका दायर कर प्राथमिकी खारिज करने की अपील की.
न्यायमूर्ति नरेश पाटिल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक हालिया आदेश में कहा, 'सामान्य परिस्थितियों में हम दोनों पक्षों को कोई जुर्माना लगाए बिना या मामूली जुर्माना देने पर प्राथमिकी खारिज करने की अनुमति दे देते, लेकिन इस मामले से संबंधित तथ्य परेशान करने वाले हैं.'
पीठ के कहा, 'वाहन के मालिक यानी याचिकाकर्ता के पिता ने अपने बेटे को चौपहिया वाहन चलाने की अनुमति दी, जिसके कारण प्रतिवादी का नाबालिग बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया. हम सरकारी अभियोजक की इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि इस मामले के जरिए समाज में संदेश देने की आवश्यकता है. इस स्थिति में किसी अन्य यात्री या तीसरे पक्ष को भी गंभीर नुकसान हो सकता था. सौभाग्य से ऐसा नहीं हुआ'. पीठ ने इस शर्त पर प्राथमिकी खारिज कर दी कि याचिकाकर्ता का पिता 50,000 रुपये का जुर्माना भरे और यह राशि दो सप्ताह में टाटा मेमोरियल अस्पताल और मुंबई के कैंसर अनुसंधान संस्थान में जमा कराई जाए.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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