- मध्य प्रदेश में UCC के मसौदे पर राजनीतिक दलों, मुस्लिम संगठनों, वकीलों और बुद्धिजीवियों के साथ अहम बैठक होगी.
- सरकार को अब तक नौ लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनके आधार पर UCC का प्रारूप अंतिम रूप दिया जाएगा.
- समिति का कार्यकाल बढ़ाकर जुलाई २०२६ तक कर दिया गया है ताकि व्यापक सुझावों को शामिल कर सकें.
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सरकार की कवायद अब निर्णायक दौर में पहुंचती नजर आ रही है. इसी कड़ी में शनिवार को भोपाल के कोहेफिजा में एक अहम बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, मुस्लिम संगठनों, उलेमाओं, वकीलों और बुद्धिजीवियों के साथ UCC के प्रस्तावित मसौदे पर विस्तार से चर्चा होगी.
सरकार को अब तक 9 लाख से अधिक सुझाव मिल चुके हैं और इन्हीं सुझावों के आधार पर UCC का प्रारूप अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में यह बैठक न केवल सामाजिक और कानूनी पहलुओं को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि प्रदेश में UCC लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी मानी जा रही है.
भोपाल में आज होगी अहम बैठक
भोपाल के कोहेफिजा क्षेत्र में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक प्रस्तावित UCC के स्वरूप और उसके संवैधानिक, कानूनी तथा सामाजिक प्रभावों पर चर्चा होगी. बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के अलावा मुस्लिम संगठन, उलेमा, वकील और बुद्धिजीवी हिस्सा लेंगे. छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी मोहम्मद वजीर अंसारी भी इसमें मौजूद रहेंगे. AIMIM, कांग्रेस और भाजपा के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है.
समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया
मध्य प्रदेश सरकार ने UCC का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति का कार्यकाल बढ़ाकर 26 जुलाई 2026 तक कर दिया है. पहले समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन मसौदे को अंतिम रूप देने और व्यापक सुझावों को शामिल करने के लिए इस अवधि को बढ़ाया गया है. विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने इस संबंध में आवश्यक निर्णय लिया है.
जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में बनी समिति
अप्रैल 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था. समिति ने भोपाल समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों में बैठकें कर राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ संवाद किया. इसके अलावा आम नागरिकों और विभिन्न वर्गों की राय भी दर्ज की.
9 लाख से ज्यादा लोगों ने दिए सुझाव
राज्य सरकार ने लोगों से सुझाव लेने के लिए एक विशेष पोर्टल शुरू किया था. इस पहल को व्यापक जनसमर्थन मिला और सरकार के मुताबिक 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए. इनमें करीब 4 लाख सुझाव ऑनलाइन माध्यम से भेजे गए. समिति इन सुझावों का अध्ययन कर रही है ताकि कानून का स्वरूप अधिक व्यावहारिक और व्यापक बनाया जा सके.
ड्राफ्ट में क्या-क्या हो सकते हैं बदलाव?
प्रस्तावित UCC ड्राफ्ट में कई अहम प्रावधान शामिल किए जाने की चर्चा है. इनमें लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करना, एक से अधिक विवाह पर रोक लगाना और पैतृक संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार देना प्रमुख हैं. विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े नियमों को सभी धर्मों के लिए समान बनाने पर भी विचार किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि मसौदे के कई प्रावधान उन राज्यों के मॉडल से लिए गए हैं, जहां UCC लागू है.
आदिवासी समुदाय को मिल सकती है छूट
प्रदेश की लगभग 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी को ध्यान में रखते हुए सरकार अलग दृष्टिकोण अपनाने पर विचार कर रही है. संभावना जताई जा रही है कि आदिवासी समुदाय की पारंपरिक व्यवस्थाओं को प्रभावित न करने के लिए उन्हें UCC के कुछ प्रावधानों से छूट दी जा सकती है. हालांकि अंतिम फैसला समिति की रिपोर्ट और सरकार की स्वीकृति के बाद ही सामने आएगा.
कुछ प्रावधानों पर विपक्ष की आपत्ति
UCC को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज है. कांग्रेस ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रस्तावित नियमों और मतांतरित आदिवासियों से संबंधित कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है. इसी कारण समिति विभिन्न पक्षों से लगातार संवाद कर रही है, ताकि अधिक से अधिक सहमति के साथ मसौदा तैयार किया जा सके.
सरकार का लक्ष्य जल्द कानून लागू करना
राज्य सरकार UCC को जल्द लागू करने के पक्ष में दिखाई दे रही है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कई सार्वजनिक मंचों से यह संकेत दे चुके हैं कि सरकार जुलाई महीने में ही इस दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है. समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार विधेयक को विधानसभा में पेश कर उसे पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है. फिलहाल प्रदेश भर की नजरें समिति की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.
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