Police Jawan Kuber Dehati Unique Wedding: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर के जवान कुबेर देहारी ने मिसाल पेश की, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में है. कुबेर देहारी ने आधुनिकता की चकाचौंध छोड़कर बैलगाड़ी पर सवार होकर दुल्हन को लेने पहुंचे. डूमर तराई निवासी कुबेर ने न केवल अपनी पुरातन संस्कृति को जीवंत किया, बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ईंधन बचत' और 'सादगी' के आह्वान को अपनी शादी के माध्यम से धरातल पर उतारा है.

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में अनोखी शादी.
बैलगाड़ी पर निकली इस बारात ने आधुनिकता की दौड़ में भागते समाज को 'सादा जीवन, उच्च विचार' का आईना दिखाया है. नारायणपुर के डूमर तराई गांव की सड़कों पर जब यह बारात निकली, तो लोग ठहर गए. ये कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा संदेश था.

बैलगाड़ी से निकली जवान कुबेर देहारी की बारात
जिला पुलिस बल के जवान कुबेर देहारी ने आधुनिक लग्जरी गाड़ियों को दरकिनार कर बैलगाड़ी को अपनी सवारी चुना. कुबेर का यह कदम प्रधानमंत्री के उस आह्वान का समर्थन है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल के कम उपयोग और फिजूलखर्ची से बचने की अपील की है. कुबेर की शादी सिर्फ बारात तक सीमित नहीं रही. यहां का मंडप भी 'इको-फ्रेंडली' था. नारियल, सल्फी, छीद और जामुन के पत्तों से तैयार किया गया आकर्षक मंडप महंगे टेंट हाउस को मात दे रहा था.
छत्तीसगढ़: नारायणपुर के डूमर तराई गांव की सड़कों पर जब यह बारात निकली, तो लोग ठहर गए. ये कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा संदेश था.
— NDTV MP Chhattisgarh (@NDTVMPCG) May 13, 2026
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हल्बा जनजाति की परंपराओं को सहेजते हुए साज-सज्जा में सूप, टोकनी और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया गया, जो पर्यावरण और संस्कृति के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है.

आकर्षक मंडप, महंगे टेंट हाउस को छोड़ नारियल, सल्फी, छीद और जामुन के पत्तों से मंडप तैयार किया.
आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद कुबेर ने यह रास्ता समाज में 'समानता' लाने के लिए चुना. उनका मानना है कि जब संपन्न परिवार ऐसे सादगी भरे आयोजन करेंगे, तभी गरीब परिवारों पर दिखावे का बोझ कम होगा. उन्होंने संदेश दिया कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर न केवल प्रकृति का संतुलन बनाया जा सकता है, बल्कि आर्थिक बचत भी की जा सकती है.

कुबेर देहारी का संदेश साफ है. अगर सक्षम परिवार सादगी अपनाएंगे, तो समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर फिजूलखर्ची का दबाव नहीं बढ़ेगा. समानता और संस्कृति के संरक्षण का यह संगम नारायणपुर के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा बन गया है. कुबेर देहारी ने नारायणपुर के युवाओं से अपील की है कि आधुनिकता के दौर में अपनी जड़ों को न भूलें. कम दूरी के लिए महंगे वाहनों का त्याग और पारंपरिक रीति-रिवाजों का संरक्षण ही हमारी असली पहचान है.

कुबेर देहारी की यह शादी महज एक रस्म नहीं, बल्कि एक आंदोलन की तरह है, जो हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना, प्रकृति का सम्मान करना और फिजूलखर्ची से बचना सिखाती है. निश्चय ही यह पहल नारायणपुर से लेकर पूरे देश के युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है.
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