विज्ञापन

मध्य प्रदेश का 'सोयाबीन कटोरा' संकट में : पश्चिम एशिया युद्ध के चलते निर्यात 50% गिरा,भारी नुकसान में किसान

Soybean Price Drop:पश्चिम एशिया युद्ध के कारण समुद्री मार्ग बाधित होने से मध्य प्रदेश का सोयाबीन निर्यात 50% तक गिर गया है. वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कम उत्पादकता के बीच मंडियों में दाम गिरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. 'सोयाबीन के कटोरे' में गहराई इस आर्थिक मंदी पर देखिए हमारी विशेष रिपोर्ट

मध्य प्रदेश का 'सोयाबीन कटोरा' संकट में : पश्चिम एशिया युद्ध के चलते निर्यात 50% गिरा,भारी नुकसान में किसान
  • मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती के क्षेत्रफल में घटावट आई है जबकि उत्पादन में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है
  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने शिपिंग रूट्स प्रभावित कर भारत के सोयाबीन निर्यात को करीब आधा कर दिया है
  • मंडियों में सोयाबीन की मांग कम होने से व्यापार धीमा हुआ है और किसानों को उनकी लागत से भी कम दाम मिल रहे हैं

MP Soybean Crisis: मध्य प्रदेश जिसे देश के 'सोयाबीन का कटोरा' कहा जाता है और जहां भारत का लगभग आधा सोयाबीन उत्पादन होता है, वहां इस समय खेतों और गांवों में एक संकट गहराता साफ़ दिखाई दे रहा है. राज्य में साल 2024-25 में जहां 58.72 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती हुई थी, वहीं 2025-26 में यह घटकर 53.20 लाख हेक्टेयर रह गई है. हालांकि उत्पादन 55.54 लाख मीट्रिक टन दर्ज हुआ है, लेकिन इस बड़े पैमाने के बावजूद बाजार अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है.

सीमा पार संघर्ष और निर्यात में ऐतिहासिक गिरावट

इस संकट की जड़ें देश की सीमाओं से कहीं दूर पश्चिम एशिया में हैं. वहां जारी संघर्ष ने अहम समुद्री शिपिंग रूट्स को प्रभावित कर दिया है, जिसका सीधा असर भारत के सोयाबीन निर्यात पर पड़ा है. मार्च के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं.निर्यात करीब 50 प्रतिशत गिरकर फरवरी के 93,000 टन से घटकर सिर्फ 40,000-50,000 टन रह जाने का अनुमान है. निर्यातकों को डर है कि अप्रैल में स्थिति और भी खराब हो सकती है.

मंडियों में पसरा सन्नाटा और किसानों का दर्द

जमीन पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. मध्य प्रदेश की मंडियों में व्यापारियों के मुताबिक माल का उठाव धीमा हो गया है और मांग लगातार घट रही है. भोपाल की करोंद मंडी में इमलिया के किसान देवराज गुर्जर, जो अपने 6 एकड़ खेत से 12 लोगों का परिवार चलाते हैं, अपनी पर्ची दिखाते हुए भारी मन से कहते हैं, "मैंने अपना सोयाबीन 3,780 रुपये प्रति क्विंटल बेचा था, लेकिन अब बाजार की हालत ऐसी है कि इससे भी कम दाम मिलेंगे. हमारे बीच डर साफ महसूस हो रहा है, क्योंकि एक एकड़ की खेती तैयार करने में ही 10,000 रुपये तक लग जाते हैं."

Latest and Breaking News on NDTV

दाम गिरने की आहट से बढ़ी बेचैनी

मंडियों में मौजूद किसानों के बीच अनिश्चितता का माहौल है. सीहोर के जगदीश गुर्जर बताते हैं कि पहले उन्होंने 3,700 रुपये में सोयाबीन बेचा था, लेकिन अब डर है कि दाम गिरकर 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाएंगे. वहीं अजमत नगर के विक्रम गुर्जर का कहना है कि सोयाबीन के दाम गिरना अब लगभग तय नजर आ रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ एक अस्थायी संकट नहीं है, बल्कि यह कृषि क्षेत्र की गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर कर रहा है.
ये भी पढ़ें: खेत में खड़े-खड़े मिट्टी की स्थिति जान सकेंगे किसान, सरकार लेकर आई नई ऐप, जानें कैसे करेगी काम

प्रतिस्पर्धा में पिछड़ता भारतीय सोयाबीन

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के कार्यकारी निदेशक डी.एन.पाठक ने इस संकट पर गहराई से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारतीय सोयाबीन अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में काफी महंगा है, जिससे हम पहले ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा से बाहर हो चुके हैं. पश्चिम एशिया के संकट ने शिपिंग लाइनों और व्यापारिक मार्गों को प्रभावित कर भारत के सीमित निर्यात को भी रोक दिया है. इसमें भी बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश का है. इन्हीं वजहों से कीमतों में गिरावट का सीधा असर किसानों पर हो रहा है.

उत्पादकता और बढ़ती लागत की चुनौती

भारत की सोयाबीन उत्पादकता ब्राजील और अर्जेंटीना की तुलना में केवल एक-तिहाई है,जबकि हमारी कीमतें उनसे कहीं अधिक हैं. भारतीय सोयामील की कीमत जहां 500-505 डॉलर प्रति टन है, वहीं ब्राजील और अर्जेंटीना वही माल 420-430 डॉलर प्रति टन में दे रहे हैं. इसके चलते ईरान और अन्य मध्य-पूर्वी देशों जैसे बड़े खरीदारों ने भारत से मुंह मोड़ लिया है. साथ ही, युद्ध के कारण बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि और कंटेनरों की कमी ने निर्यात को लगभग अव्यवहारिक बना दिया है.

सरकार को दखल देना ही होगा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक प्रति टन उत्पादकता नहीं बढ़ेगी, भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता स्थिर ही रहेगी. सरकार को पिछले 30 वर्षों से स्थिर पड़ी उत्पादकता को 1,000 किलो प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर कम से कम 2 टन करने पर ध्यान देना होगा. मध्य प्रदेश में गिरती कीमतें और घटती आय के रूप में यह वैश्विक संकट अब किसान की चौखट तक पहुंच गया है. एक ऐसे राज्य के लिए जो देश का आधा सोयाबीन पैदा करता है, यह विडंबना ही है कि किसान की सबसे बड़ी ताकत उसका बाजार अब उसकी पहुंच से दूर होता जा रहा है.
ये भी पढ़ें: एमपी में सिस्टम ने मारा ! फसल बिकने से पहले ही फेल हुए 6.20 लाख किसान, 450 करोड़ का कर्ज बकाया

लेखक के बारे में
img
अनुराग द्वारी
Resident Editor, MP and Chhattisgarh
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
MP Soybean Crisis, West Asia War Impact On Export, Soybean Price Drop MP
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com