Jashpur Plane Crash Fake News: जशपुर जिले के नारायणपुर (Narayanpur) क्षेत्र में कथित प्लेन क्रैश (Plane Crash ) को लेकर सोशल मीडिया (Social Media) पर तेजी से फैल रही खबरें पूरी तरह निराधार साबित हुई हैं. दरअसल, इस खबर के बाद पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में जिला प्रशासन ने घटना की जांच शुरू की तो पता चला कि इलाके में किसी भी प्रकार के विमान हादसे के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वायरल हो रही खबरें महज अफवाह है. ऐसे में सवाल पैदा होता है कि आखिर इतनी बड़ी अफवाह कैसे पूरे राष्ट्रीय मीडिया मीडिया तक फैल गई?
इस बात की जांच में सामने आया है कि जशपुर जिले के कुछ व्हाट्सएप ग्रुपों में कुछ पुरानी एयरक्राफ्ट की तस्वीरों और जंगल में उठते धुएं की तस्वीरों को साझा किया गया. इसके साथ ही इन तस्वीरों के साथ यह दावा किया गया कि नारायणपुर के चारभाटी जंगल में प्लेन क्रैश हुआ है. देखते ही देखते यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही राष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच गई. इस वीडियो में जो इलाका दिखाया गया था वह घने जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में सूचना की पुष्टि में देरी होने के कारण अफवाह तेजी से फैलती गई. हालांकि, जिले के एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने पहले ही इस तरह की किसी घटना से इनकार कर दिया था.

जशपुर में फैली “प्लेन क्रैश” की अफवाह, तो सच्चाई सामने लगाने के लिए प्रशासन को खूब बहाना पड़ा पसीना
Photo Credit: Abhishek Shukla
जंगल में आग बनी वजह
गर्मी के दिनों में महुआ बीनने के दौरान ग्रामीणों की ओर से जंगलों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं. यही आग धीरे-धीरे फैलकर बड़े क्षेत्र में धुआं उत्पन्न करती है, जो दूर से किसी बड़े हादसे जैसा दिखाई देता है. आशंका है कि कुछ खुराफातियों ने इसी के सहारे पुरानी विमान तस्वीरों को जंगल की आग के दृश्य के साथ जोड़कर प्लेन हादसे की अफवाह फैलाई गई.

जशपुर में फैली “प्लेन क्रैश” की अफवाह
Photo Credit: Abhishek Shukla
अफवाह को गलत साबित करने के लिए प्रशासन ने उठाया ये कदम
जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने भी बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल दो तस्वीरों और जंगल से उठते धुएं के आधार पर प्लेन क्रैश की बात कही जा रही थी. सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम मौके पहुंची और सघन जांच शुरू की, लेकिन घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान कहीं भी विमान के मलबे या दुर्घटना से जुड़े कोई अवशेष नहीं मिला. प्रशासन द्वारा पूरे क्षेत्र की ड्रोन कैमरों से निगरानी भी कराई गई. इसके बावजूद विमान गिरने जैसी कोई स्थिति सामने नहीं आई है.

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पड़ोसी राज्यों से भी नहीं हुई पुष्टि
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से भी संपर्क किया. वहां से भी किसी विमान के लापता होने या क्रैश की कोई सूचना नहीं मिली. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि छत्तीसगढ़ में कोई फ्लाइंग क्लब संचालित नहीं है, जबकि अन्य राज्यों के फ्लाइंग क्लबों ने भी अपने किसी विमान के लापता होने से इनकार किया. कलेक्टर ने बताया कि गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगना सामान्य घटना है. कई बार इस आग से उठने वाला धुआं दूर से देखने पर किसी बड़े हादसे जैसा प्रतीत होता है. प्रारंभिक जांच में यह सामने आ रहा है कि जंगल में लगी आग के कारण उठे धुएं को लोगों ने प्लेन क्रैश समझ लिया.
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार प्रशासन वायरल वीडियो और तस्वीरों को फैलाने वालों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अपुष्ट खबर पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी को ही सही मानें.
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