- उज्जैन के सती गेट स्थित खड़े हनुमान मंदिर को सड़क चौड़ीकरण के दौरान हटाने का विवाद बढ़ता जा रहा है.
- प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र का बड़ा हिस्सा हटाया लेकिन मुख्य हनुमान प्रतिमा अब भी वहीं स्थापित है.
- प्रशासन ने प्रतिमा हटाने का प्रयास नहीं किया, जिससे लोगों के बीच कई सवाल और असंतोष पैदा हो गया है.
उज्जैन के सती गेट स्थित 'खड़े हनुमान' मंदिर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. सड़क चौड़ीकरण परियोजना के बीच पिछले छह दिनों से प्रशासन प्रतिमा को नहीं हटा सका है, जबकि अब इस मुद्दे पर संत समाज भी खुलकर सामने आ गया है. मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ साध्वी हर्षानंद गिरि ने मंदिर पहुंचकर सरकार और प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार कर माफी नहीं मांगी और मंदिर को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं लिया, तो बड़े स्तर पर आंदोलन और अनशन शुरू किया जाएगा.
सड़क चौड़ीकरण के बीच बढ़ा विवाद
उज्जैन में सिंहस्थ और अन्य विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इसी दौरान सती गेट के पास स्थित खड़े हनुमान मंदिर चर्चा के केंद्र में आ गया. प्रशासन ने 4 सितंबर को मंदिर क्षेत्र में कार्रवाई शुरू की थी और आसपास का बड़ा हिस्सा हटा दिया, लेकिन मुख्य प्रतिमा अब भी अपने स्थान पर मौजूद है. यही वजह है कि मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है.
प्रशासन के दावों पर उठ रहे सवाल
करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी प्रतिमा को नहीं हटाया जा सका है. वर्तमान में हनुमान जी की प्रतिमा टेंट के नीचे स्थापित है. दूसरी ओर, लगातार विरोध और बढ़ती चर्चाओं के बीच प्रशासन ने यह कहना शुरू कर दिया है कि उसकी ओर से प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया. प्रशासन के इस बयान के बाद लोगों के बीच कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.
सोशल मीडिया पर छाए 'खड़े हनुमान'
सड़क के बीचों-बीच स्थित खड़े हनुमान जी की प्रतिमा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. प्रतिमा के वीडियो और रील्स बड़ी संख्या में साझा किए जा रहे हैं. कई लोग इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं. यही कारण है कि मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी श्रद्धालु लगातार उज्जैन पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है.
मंदिर पहुंचीं साध्वी हर्षानंद
गुरुवार को साध्वी हर्षानंद गिरि, जिन्हें हर्षा रिछारिया के नाम से भी जाना जाता है, खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं. उन्होंने वहां पूजा-अर्चना की और प्रतिमा को हटाने की किसी भी संभावना का विरोध किया. साध्वी ने कहा कि यह केवल एक मंदिर का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है, इसलिए इसे संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए.
सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम
साध्वी हर्षानंद ने सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखते हुए दो दिन का समय दिया है. उनका कहना है कि संबंधित अधिकारी मंदिर पहुंचकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें. साथ ही विधि-विधान से खड़े हनुमान जी की पूजा कराई जाए और उसी स्थान पर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया जाए. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संत समाज उग्र आंदोलन और अनशन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा.
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