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अब भोपाल में 'एफिल टॉवर' का अजूबा: हाईटेंशन टावर के नीचे बिछा दी डामर की सड़क,नीचे से गुजर रहे वाहन

Dangerous Road Bhopal: भोपाल के करोंद में विकास का अजीबोगरीब नमूना सामने आया है जहां हाईटेंशन टावर के नीचे से ही डामर की सड़क बना दी गई है. विनायक कॉलोनी के सैकड़ों लोग रोजाना मौत के इस साये के नीचे से गुजरने को मजबूर हैं. प्रशासन की इस लापरवाही से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है लेकिन जिम्मेदार अब भी मौन हैं.

अब भोपाल में 'एफिल टॉवर' का अजूबा: हाईटेंशन टावर के नीचे बिछा दी डामर की सड़क,नीचे से गुजर रहे वाहन
  • भोपाल के करोंद में हाईटेंशन टावर के नीचे से सड़क निकाली गई है, जिससे लोगों के लिए खतरा बना हुआ है
  • विनायक कॉलोनी के निवासियों ने लंबे समय से इस हाईटेंशन टावर को हटाने की मांग की है लेकिन समाधान नहीं हुआ
  • बिजली विभाग का कहना है कि टावर शिफ्ट करने के लिए बजट और कई प्रावधानों को पूरा करना आवश्यक है
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Bhopal High-Tension Road: भोपाल में विकास अब सीधा नहीं चलता, वह कोण बनाकर चलता है. पहले ऐशबाग का 90 डिग्री वाला पुल आया, फिर ठिगने क़द का मेट्रो स्टेशन और अब करोंद में राजधानी ने अपना 'एफिल टॉवर' खड़ा कर दिया है. फर्क बस इतना है कि पेरिस का टॉवर लोग दूर से निहारने जाते हैं, जबकि भोपाल के करोंद स्थित इस टॉवर के नीचे से लोग अपनी जान हथेली पर रखकर गुजरने को मजबूर हैं. कुल मिलाकर भोपाल अब राजधानी नहीं रहा, प्रयोगशाला हो गया है. यहां देखा जाता है कि नागरिक कितनी बिजली सह सकते हैं. करोंद में हाईटेंशन टावर के नीचे से सड़क निकाल दी गई है ताकि आदमी को हमेशा याद रहे कि वह नीचे है और व्यवस्था ऊपर. 

टावर और सड़क का 'अनोखा' संगम

करोंद की विनायक कॉलोनी में सालों से एक हाईटेंशन टावर खड़ा था, जो कभी सिर्फ बिजली ढोने का काम करता था. लेकिन विकास की लहर ऐसी आई कि अधिकारियों ने सोचा कि टावर के नीचे की खाली जगह को क्यों बर्बाद किया जाए. लिहाजा, टावर के चारों पायों के बीच से ही सड़क निकाल दी गई.इस सड़क से पैदल यात्री भी गुजरते हैं, मोटरसाइकिलें भी और कारें भी. यानी विकास ने तय कर लिया है कि खतरा सबके लिए बराबर होना चाहिए. लोकतंत्र का यह सबसे सच्चा रूप है. सड़क से पैदल आदमी भी गुजरता है, बाइक भी और कार भी. यानी खतरा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं. यहां जान का जोखिम पूरी तरह समाजवादी है सबके लिए बराबर.

Bhopal High-Tension Road: दरअसल यहां टावर पहले से मौजूद था और कॉलोनी बाद में बसी. लेकिन सवाल ये है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इसी टावर के नीचे सड़क भी बना दी.

Bhopal High-Tension Road: दरअसल यहां टावर पहले से मौजूद था और कॉलोनी बाद में बसी. लेकिन सवाल ये है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इसी टावर के नीचे सड़क भी बना दी.

खतरे के नीचे से गुजरती जिंदगी और प्रशासन की चुप्पी

विनायक कॉलोनी की इस सड़क से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब यहां कॉलोनी बसी थी, तब टावर और आबादी के बीच फासला था, लेकिन धीरे-धीरे घर करीब आते गए और अब तो सड़क ही टावर के पेट से होकर गुजर रही है. बारिश के दिनों में यह स्थिति और भी खौफनाक हो जाती है. लोगों को डर लगा रहता है कि कहीं सड़क पर जमा पानी के साथ करंट न बहने लगे. बड़ी गाड़ियां तो यहाँ से नहीं निकल पातीं, लेकिन दोपहिया वाहन और पैदल यात्रियों के पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है.

Bhopal High-Tension Road: इस टावर के नीचे से बाइक-कार तो आसानी से गुजर जाते हैं लेकिन बड़ी गाड़िया नहीं. दूसरा बारिश के मौसम में कई लोगों ने करंट लगने की शिकायत भी की है.

Bhopal High-Tension Road: इस टावर के नीचे से बाइक-कार तो आसानी से गुजर जाते हैं लेकिन बड़ी गाड़िया नहीं. दूसरा बारिश के मौसम में कई लोगों ने करंट लगने की शिकायत भी की है.

शिफ्टिंग की कोशिशें और 'अस्थायी' समाधान

विनायक कॉलोनी के रहवासी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि इस हाईटेंशन लाइन और टावर को यहां से शिफ्ट किया जाए, क्योंकि भोपाल कोई छोटी जगह नहीं बल्कि प्रदेश की राजधानी है. बिजली कंपनी का इस मामले पर रटा-रटाया जवाब आता है कि टावर हटाने की कोशिशें जारी हैं और चर्चाएं चल रही हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि हर चर्चा के बाद टावर और मजबूती से वहीं खड़ा नजर आता है. ऐसा लगता है मानो व्यवस्था यह संदेश देना चाहती है कि विकास जमीन पर हो न हो, नागरिकों के सिर के ऊपर से जरूर गुजरेगा.हालांकि हमने इस मसले पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर से भी बात की. उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी. लेकिन जब हमने उन्हें इसकी जानकारी दी तो उन्होंने इसे हटाने के प्रावधानों की जानकारी दी. उनके मुताबिक हाई टेंशन लाइन यदि शिफ्ट होगी तो पूरी तरह से होगी...इसके लिए बजट पास करना होगा, तभी हो पाएगा. इसके लिए कई प्रावधान हैं. यदि वहां से रेलवे की लाइन जा रही हो या विकास का कोई काम कराना हो या फिर नगर निगम को जमीन की आवश्यकता हो तभी वहां से टावर हटाने की कार्रवाई होगी. 

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ 'भोपाल का अजूबा'

हाल ही में जब इस टावर के नीचे से गुजरती सड़क की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, तो यह चर्चा का विषय बन गया. लोग इसे भोपाल का नया अजूबा बता रहे हैं. यह टावर इस कड़वी सच्चाई को बयां करता है कि हमारी योजनाएं कितनी उलटी और जोखिम भरी हो सकती हैं. करोंद का यह 'एफिल टॉवर' हमें याद दिलाता रहता है कि यहाँ नागरिक सिर्फ अपनी जिम्मेदारी पर सड़क का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि व्यवस्था उनके सिर के ऊपर करंट की तलवार लटकाए बैठी है.
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