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ईरान में मौजूद IRGC क्या है, जिसे अमेरिका ने घोषित किया है आतंकी संगठन

IRGC ईरान की एक इतनी पावरफुल सैन्य यूनिट है, जो देश की राजनीति ही नहीं सैन्य समीकरण को भी पूरी तरह बदल सकती है. यह सीधे सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करती है. इसका रोल देश के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर है. इस पर कई तरह के आरोप भी लगे हैं.

ईरान में मौजूद IRGC क्या है, जिसे अमेरिका ने घोषित किया है आतंकी संगठन
IRGC ईरान की एक पावरफुल सैन्य यूनिट है

What is IRGC in Iran: ईरान और अमेरिका में तनाव इन दिनों चरम पर है. इस दौरान ईरान की सबसे पावरफुल बॉडी IRGC की चर्चा सबसे ज्यादा है, जिसे अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया है. दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश है, जहां IRGC जैसी ताकत का राजनीति और सुरक्षा समीकरणों पर इतना ज्यादा प्रभाव है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या IRGC ईरान की सेना है या इससे भी ज्यादा ताकतवर कुछ और क्यों यूएस ने इसे आतंकी संगठन घोषित कर दिया. आइए जानते हैं..

IRGC क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई

IRGC का पूरा नाम इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) है. इसकी स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद हुई. इसका काम नए शासन और धार्मिक नेतृत्व की रक्षा करना था. यह ईरान की आम सेना से अलग है और सीधे देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) को रिपोर्ट करती है. आज IRGC के पास अपनी आर्मी, नेवी और एयर यूनिट है. इसके अलावा एक खास यूनिट है, जिसका नाम कुद्स फोर्स है, जो देश के बाहर ऑपरेशन संभालती है.

ईरान के अंदर IRGC का क्या रोल है?

IRGC सिर्फ बाहर ही नहीं, देश के अंदर भी मजबूत पकड़ रखता है. इसकी एक शाखा बसीज मिलिशिया है, जिस पर आरोप है कि वह सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को दबाने का काम करती है. इसके साथ ही IRGC ईरान की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को भी कंट्रोल करता है. मैन्युफैक्चरिंग, ऑयल, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टरों में इसकी पकड़ बताई जाती है.

IRGC पर आरोप क्या हैं

कई देशों का आरोप है कि IRGC सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दूसरे देशों में हथियार, पैसा और ट्रेनिंग देकर अलग-अलग ग्रुप्स सपोर्ट करता है. इनमें हिजबुल्लाह (लेबनान), हमास (गाजा), फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (Palestinian Islamic Jihad) जैसे समहू शामिल हैं. कहा जाता है कि IRGC की कुद्स फोर्स इन संगठनों को ट्रेनिंग और हथियार देती है.

यही वजह है कि कई देश इसे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाला संगठन मानते हैं. IRGC पर आरोप है कि उसने इजराइल के खिलाफ काम करने वाले समूहों को सपोर्ट किया. इसी वजह से इज़राइल और ईरान के बीच तनाव लगातार बना रहता है. अमेरिका और यूरोपीय देशों का कहना है कि IRGC साइबर हमलों, मिसाइल प्रोग्राम और दूसरे देशों में गुप्त गतिविधियों के जरिए दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा है.

अमेरिका ने IRGC को कब और क्यों आतंकी संगठन घोषित किया

अप्रैल 2019 में US डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट ने IRGC को आतंकी संगठन (Foreign Terrorist Organization) घोषित किया. यह पहली बार था जब किसी देश की सरकारी सैन्य यूनिट को अमेरिका ने इस लिस्ट में डाला. इस फैसले के बाद IRGC से जुड़े लोगों पर सख्त पाबंदियां लग गईं, उनकी संपत्ति फ्रीज की जा सकती है, जो भी व्यक्ति या कंपनी इनसे जुड़ी होगी, उस पर भी कार्रवाई हो सकती है. इसके बाद में यूरोपियन यूनियन (EU) ने भी 2026 में IRGC को आतंकी संगठन घोषित कर दिया.

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