विज्ञापन

इच्छामृत्यु और लिविंग विल में क्या अंतर है? जानें दोनों को लेकर क्या कहता है कानून

Euthanasia And Living Will: सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ने बताया कि इच्छामृत्यु क्या होती है और ये लिविंग विल से कितनी अलग है. उन्होंने कानूनी पहलू समझाते हुए बताया कि कब और कैसे इच्छामृत्यु मांगी जा सकती है.

इच्छामृत्यु और लिविंग विल में क्या अंतर है? जानें दोनों को लेकर क्या कहता है कानून
harish rana case: इच्छामृत्यु और लिविंग विल में अंतर

Euthanasia And Living Will: इच्छामृत्यु के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. पहली बार देश में किसी को कोर्ट ने इच्छामृत्यु की इजाजत दी है. गाजियाबाद के हरीश राणा को ये इच्छामृत्यु की इजाजत दी गई है. उसके माता-पिता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी और कहा था कि उनका बेटा पिछले 12 सालों से कोमा में है, ऐसे में उसे और ज्यादा दर्द में नहीं देख सकते हैं. डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट आने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी है. ऐसे में आज हम आपको इच्छामृत्यु और लिविंग विल में अंतर बताएंगे, साथ ही ये भी बताएंगे कि इन्हें लेकर कानून क्या कहता है. इसे लेकर हमने सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता से बातचीत की. 

क्या होती है लिविंग विल?

सबसे पहले ये जान लेते हैं कि लिविंग विल क्या होती है. सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ने बताया कि ये एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिससे 18 साल से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति को ये फैसला लेने का अधिकार मिलता है कि अगर वो किसी ऐसी स्थिति या बीमारी में चला जाए, जिसमें इलाज मुमकिन न हो और इस दौरान वो बातचीत करने या फिर कोई फैसला लेने में असमर्थ हो तो उसे किस तरह ट्रीट किया जाना चाहिए. इसमें शख्स ये भी बता सकता है कि इस दौरान उसे वेंटिलेटर जैसे लाइफ सपोर्ट पर रखना है या फिर नहीं. 

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी इजाजत

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में लिविंग विल की इजाजत दी थी. इसके लिए पूरी गाइडलाइन जारी की गई थी. लिविंग विल के जरिए ही लोग पैसिव यूथेनेशिया का चुनाव भी कर सकते हैं, जिसे इच्छामृत्यु कहा जाता है. इसमें ये साफ कहा गया था कि व्यक्ति का ऐसी हालत में होना जरूरी है, जिसमें इलाज नामुमकिन हो या फिर आगे की पूरी जिंदगी दर्द में ही गुजरने वाली हो. ऐसे में मरीज की इच्छा से इलाज बंद किया जा सकता है. वहीं भारत में एक्टिव यूथेनेशिया की इजाजत नहीं है, जिसमें इलाज की संभावना होते हुए भी इंसान खुद की जान लेने की मांग करता है. 

इच्छामृत्यु क्या है?

जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि लिविंग विल के जरिए भी इच्छामृत्यु का प्रावधान है. हालांकि कुछ मामलों में परिवार भी इसकी मांग कर सकता है. ये मामले पैसिव युथनेशिया में आते हैं. इसके लिए याचिका दायर होने के बाद कोर्ट की तरफ से डॉक्टरों का एक पैनल बनाया जाता है और रिपोर्ट मांगी जाती है. अगर रिपोर्ट में ये बात साफ हो जाती है कि मरीज को किसी भी हाल में इलाज से बचाया नहीं जा सकता है और उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है तो इस रिपोर्ट के आधार पर इच्छामृत्यु दी जा सकती है. इसके बाद सम्मानजनक तरीके से मृत्यु का अधिकार दिया जाता है. इसमें मरीज का लाइफ सपोर्ट सिस्टम और ट्रीटमेंट बंद कर दिया जाता है. जैसा कि अब हरीश राणा के मामले में किया जाएगा.

ये भी पढ़ें - देश में पहली बार मिली इच्छामृत्यु की इजाजत, इसे लेकर किन देशों में क्या नियम हैं? हर सवाल का जवाब

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Euthanasia And Living Will, Difference Between Euthanasia And Living Will, Icchamrityu Kya Hai, Euthanasia Case, Harish Rana Case
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com