- रांची इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में दाखिल हैं पालमती देवी
- अस्पताल की रसोई से मांगी थी प्लेट, कहा गया - नहीं हैं प्लेट
- इसके बाद वॉर्डब्वॉय ने फर्श पर ही परोस दिया खाना
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रांची:
देशभर के अस्पतालों में सुविधाओं के बेहद घटिया स्तर को लेकर जारी बहस के बीच दिल को झकझोर देने वाली एक और तस्वीर सामने आई है, जिसमें झारखंड की राजधानी रांची के सबसे बड़े अस्पताल में एक मरीज़ को फर्श से खाना खाते देखा गया.
विचलित कर देने वाली यह तस्वीर हिन्दी समाचारपत्र 'दैनिक भास्कर' ने प्रकाशित की है, जो राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रांची इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में खींची गई थी.
बुधवार को खींची गई तस्वीर में दिखाई दे रहा है कि मरीज़ पालमती देवी के हाथों पर पट्टियां बंधी हैं, और वह अपना भोजन, यानी दाल, चावल और सब्ज़ियां खा रही हैं, जिन्हें वॉर्डब्वॉय ने फर्श पर परोसा था.
अस्पताल के ऑर्थोपेडिक वॉर्ड में दाखिल पालमती देवी के पास अपनी प्लेट नहीं थी, इसलिए उन्होंने प्लेट मांगी थी, लेकिन अस्पताल के रसोईकर्मियों ने उन्हें बेहद रूखे ढंग से यह कहकर चलता कर दिया कि उनके पास कोई प्लेट नहीं है. गौरतलब है कि इस अस्पताल का सालाना बजट 300 करोड़ रुपये है. अस्पताल के एक अधिकारी ने NDTV से कहा, "दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी..."
इससे पहले ओडिशा से भी ऐसी ही झकझोर देने वाली तस्वीर आई थी, जहां कालाहांडी में दाना मांझी नाम के एक आदिवासी व्यक्ति को पत्नी का शव अस्पताल से घर ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल पाया. इसके बाद उन्हें अपनी पत्नी का शव कंधे पर लेकर करीब 10 किलोमीटर तक चलना पड़ा था.
माझी के बाद ओडिशा से ही एक और तस्वीर सामने आई थी, जहां स्वास्थ्य केंद्र में एक लाश को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए उसकी हड्डियां तोड़ी गईं, ताकि लाश को छोटा करके उसकी गठरी बनाई जा सके.
ओडिशा के बाद झारखंड से आई ये तस्वीरें हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था एवं अस्पतालों की स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़ी करती हैं.
विचलित कर देने वाली यह तस्वीर हिन्दी समाचारपत्र 'दैनिक भास्कर' ने प्रकाशित की है, जो राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रांची इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में खींची गई थी.
बुधवार को खींची गई तस्वीर में दिखाई दे रहा है कि मरीज़ पालमती देवी के हाथों पर पट्टियां बंधी हैं, और वह अपना भोजन, यानी दाल, चावल और सब्ज़ियां खा रही हैं, जिन्हें वॉर्डब्वॉय ने फर्श पर परोसा था.
अस्पताल के ऑर्थोपेडिक वॉर्ड में दाखिल पालमती देवी के पास अपनी प्लेट नहीं थी, इसलिए उन्होंने प्लेट मांगी थी, लेकिन अस्पताल के रसोईकर्मियों ने उन्हें बेहद रूखे ढंग से यह कहकर चलता कर दिया कि उनके पास कोई प्लेट नहीं है. गौरतलब है कि इस अस्पताल का सालाना बजट 300 करोड़ रुपये है. अस्पताल के एक अधिकारी ने NDTV से कहा, "दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी..."
इससे पहले ओडिशा से भी ऐसी ही झकझोर देने वाली तस्वीर आई थी, जहां कालाहांडी में दाना मांझी नाम के एक आदिवासी व्यक्ति को पत्नी का शव अस्पताल से घर ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल पाया. इसके बाद उन्हें अपनी पत्नी का शव कंधे पर लेकर करीब 10 किलोमीटर तक चलना पड़ा था.
माझी के बाद ओडिशा से ही एक और तस्वीर सामने आई थी, जहां स्वास्थ्य केंद्र में एक लाश को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए उसकी हड्डियां तोड़ी गईं, ताकि लाश को छोटा करके उसकी गठरी बनाई जा सके.
ओडिशा के बाद झारखंड से आई ये तस्वीरें हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था एवं अस्पतालों की स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़ी करती हैं.
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