- युवक की रविवार को पुलिस हिरासत में मौत हो गई
- पुलिस ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं
- मिनहाज़ अंसारी उस व्हॉट्सऐप ग्रुप का एडमिनिस्ट्रेटर था : पुलिस
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जामतारा (झारखंड):
मोबाइल ऐप व्हॉट्सऐप पर गोमांस से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणियां कथित रूप से भेजने के मामले में झारखंड में गिरफ्तार किए गए युवक की रविवार को पुलिस हिरासत में मौत हो गई. जामतारा जिले में रहने वाले मिनहाज़ अंसारी के परिवार का आरोप है कि उसे पीटा गया, और पुलिस ने यातनाएं दीं.
पुलिस ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन उनका दावा है कि मिनहाज़ की मौत इनसिफेलाइटिस की वजह से हुई. हालांकि उन्होंने उस थाने के प्रभारी पुलिस अधिकारी हरीश पाठक की 'लापरवाही' को कबूल किया, जहां मिनहाज़ अंसारी को गिरफ्तारी के बाद लाया गया था. उन पर हत्या का आरोप लगाकर उन्हें निलंबित कर दिया गया है.
मिनहाज़ को 2 अक्टूबर को आपत्तिजनक संदेश को लेकर कुछ लोगों के साथ हिरासत में लिया गया था, और एक दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि शेष लोगों को जाने दिया गया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रमेश कुमार दुबे ने बताया, "हमने कार्रवाई इसलिए की, क्योंकि गोमांस के बारे में टिप्पणी करता वह व्हॉट्सऐप संदेश इस तरह का था, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव खत्म हो सकता था... खासतौर से दशहरा और मुहर्रम की वजह से... अब स्थिति शांतिपूर्ण है, और हम सख्ती से नज़र रखे हुए हैं..."
पुलिस का कहना है कि मिनहाज़ अंसारी उस व्हॉट्सऐप ग्रुप का एडमिनिस्ट्रेटर था. उसकी गिरफ्तारी के दो दिन बाद उसके परिवार को ख़बर मिली कि उसे लगभग 80 किलोमीटर दूर धनबाद के एख अस्पताल में ले जाया गया है. अन्य गांववालों के साथ परिजन पुलिस स्टेशन पहुंचे. पुलिस स्टेशन प्रभारी हरीश पाठक का कथित रूप से मिनहाज़ अंसारी के पिता से झगड़ा भी हुआ, और पाठक के खिलाफ उस वक्त दर्ज की गई शिकायत में हत्या के प्रयास तथा एक महिला को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है.
मिनहाज़ अंसारी की मौत 9 अक्टूबर को अस्पताल में हुई थी.
रमेश कुमार दुबे ने बताया, "अंसारी की मौत हो जाने के बाद हत्या के प्रयास का आरोप हत्या के आरोप में तब्दील कर दिया गया है..." दुबे के मुताबिक मेडिकल रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि मिनहाज़ इनसिफेलाइटिस का मरीज़ था, और "ऐसा लगता है कि थाना प्रभारी ने इस बात का ध्यान नहीं रखा..."
पुलिस ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन उनका दावा है कि मिनहाज़ की मौत इनसिफेलाइटिस की वजह से हुई. हालांकि उन्होंने उस थाने के प्रभारी पुलिस अधिकारी हरीश पाठक की 'लापरवाही' को कबूल किया, जहां मिनहाज़ अंसारी को गिरफ्तारी के बाद लाया गया था. उन पर हत्या का आरोप लगाकर उन्हें निलंबित कर दिया गया है.
मिनहाज़ को 2 अक्टूबर को आपत्तिजनक संदेश को लेकर कुछ लोगों के साथ हिरासत में लिया गया था, और एक दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि शेष लोगों को जाने दिया गया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रमेश कुमार दुबे ने बताया, "हमने कार्रवाई इसलिए की, क्योंकि गोमांस के बारे में टिप्पणी करता वह व्हॉट्सऐप संदेश इस तरह का था, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव खत्म हो सकता था... खासतौर से दशहरा और मुहर्रम की वजह से... अब स्थिति शांतिपूर्ण है, और हम सख्ती से नज़र रखे हुए हैं..."
पुलिस का कहना है कि मिनहाज़ अंसारी उस व्हॉट्सऐप ग्रुप का एडमिनिस्ट्रेटर था. उसकी गिरफ्तारी के दो दिन बाद उसके परिवार को ख़बर मिली कि उसे लगभग 80 किलोमीटर दूर धनबाद के एख अस्पताल में ले जाया गया है. अन्य गांववालों के साथ परिजन पुलिस स्टेशन पहुंचे. पुलिस स्टेशन प्रभारी हरीश पाठक का कथित रूप से मिनहाज़ अंसारी के पिता से झगड़ा भी हुआ, और पाठक के खिलाफ उस वक्त दर्ज की गई शिकायत में हत्या के प्रयास तथा एक महिला को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है.
मिनहाज़ अंसारी की मौत 9 अक्टूबर को अस्पताल में हुई थी.
रमेश कुमार दुबे ने बताया, "अंसारी की मौत हो जाने के बाद हत्या के प्रयास का आरोप हत्या के आरोप में तब्दील कर दिया गया है..." दुबे के मुताबिक मेडिकल रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि मिनहाज़ इनसिफेलाइटिस का मरीज़ था, और "ऐसा लगता है कि थाना प्रभारी ने इस बात का ध्यान नहीं रखा..."