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This Article is From Mar 15, 2018

क्या 2019 में बनेगा एंटी BJP फ्रंट? भाजपा की हार के बाद चर्चा तेज

यूपी उपचुनाव में सपा और बीएसपी की साझा कोशिश से बीजेपी की हार के बाद इस बात की चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या 2019 में विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर बीजेपी का मुकाबला करेंगी?

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क्या 2019 में बनेगा एंटी BJP फ्रंट? भाजपा की हार के बाद चर्चा तेज
फाइल फोटो
  • 2019 में बनेगा एंटी BJP फ्रंट?
  • भाजपा की हार के बाद इस बात की चर्चा तेज है
  • विपक्षी मोर्चा खड़ा होता है तो उसका नेतृत्व कौन करेगा?
नई दिल्ली: यूपी उपचुनाव में सपा और बीएसपी की साझा कोशिश से बीजेपी की हार के बाद इस बात की चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या 2019 में विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर बीजेपी का मुकाबला करेंगी? सवाल ये भी है कि अगर विपक्षी मोर्चा खड़ा होता है तो उसका नेतृत्व कौन करेगा? उत्तर प्रदेश के उपचुनावों के नतीजों के 24 घंटे के अंदर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया कि सपा के कांग्रेस के साथ संबंध अच्छे हैं और आगे भी बने रहेंगे. यूपी उपचुनाव के नतीजों ने 2019 में मोदी लहर रोकने का एक रास्ता तो दिखा ही दिया है. मौका और जरूरत देखते हुए कांग्रेस ने भी अखिलेश के बयान का स्वागत करने में देर नहीं की. 

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यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने एनडीटीवी से कहा, "ये अच्छी बात है कि रिश्तों को बनाकर रखा जा रहा है. भावनाओं को लेकर जो रिश्ते बनते हैं वो मज़बूत होते हैं. जब रिश्ते हैं तो भविष्य में (राजनीतिक) तालमेल भी हो ही जाएगा." हालांकि, यूपी उपचुनावों के लिए कांग्रेस ने अखिलेश से ये गुजारिश की थी कि दो में से एक सीट पर सपा कांग्रेस को समर्थन दे लेकिन बात नहीं बनी, पर बीती भुला कर अब कांग्रेस भविष्य में सपा के साथ गठजोड़ के लिए तैयार है. कांग्रेस नेता पी एल पुनिया ने कहा, "अगर terms और conditions सम्मानजनक होगा तो भविष्य में कांग्रेस पार्टी सपा और बसपा के साथ यूपी में चुनाव लड़ सकती है. हम खुले दिमाग से सपा और बीएसपी के साथ गठजोड़ की संभावना पर विचार के लिए तैयार हैं." 

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2019 के लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी के खिलाफ एक राजनीतिक मोर्चा बनाने के लिए लिए कांग्रेस को नए विपक्षी दलों को साथ जोड़ने के साथ-साथ मोर्चा का नेतृत्व हासिल करने के लिए अलग-अलग राज्यों में अपनी ज़मीन मज़बूर कर अच्छी सीटें हासिल करनी होगी. आने वाले महिनों में यहीं कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी." लेकिन कांग्रेस के लिए सबसे मुश्किल सवाल ये है कि, क्या वो दूसरे विपक्षी दलों से बराबरी की शर्तों पर गठबंधन के लिए तैयार होती है या आज भी वो खुद को फर्स्ट एमांग इक्वल्स मानते दूसरों को अपने साथ आने पर तैयार कर पाती है. ये चुनौती अब बड़ी हो रही है. 

VIDEO: रणनीति इंट्रो: 2019 के लिए विपक्ष के नए समीकरण?
गुरूवार को एनसीपी नेता माजिद मेमन ने साफ कह दिया कि शरद पवार राहुल गांधी के नेतृत्व में किसी गठबंधन का हिस्सा कैसे हो सकते हैं. मंगलवार को सोनिया गांधी ने 19 विपक्षी दलों के नेताओं से डिनर पर बातचीत कर चुकी हैं जिसे सहयोगियों ने सकारात्मक भी बताया पर बैठकों में बने समीकरणों को जमीन पर उतारना एक बड़ी बात होगी.
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