- केरल में मॉनसून आने के बाद भी मध्य भारत के राज्यों में अभी तक सामान्य से आधी बारिश हुई है
- जून में पूरे भारत में लगभग चालीस प्रतिशत कम बारिश हुई, मध्य भारत में पचास प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई
- मॉनसून की कम बारिश के पीछे मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन का प्रतिकूल चरण और एलपीएस का न बनना मुख्य कारण हैं
मॉनसून को केरल में दस्तक दिये लगभग एक महीना हो चुका है, लेकिन मध्य भारत में अभी तक 'सूखा' है. दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे मध्य भारत के राज्यों में अभी तक मॉनसून की झमाझम बारिश नहीं हुई है. मौसम विभाग की मानें तो मध्य भारत में आमतौर पर इन दिनों मॉनसून की बारिश शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार ऐसा देखने को नहीं मिला है. आईएमडी के मुताबिक, मध्य भारत के राज्यों में अबतक 50 फीसदी कम बारिश हुई है. जुलाई के महीने से भी ज्यादा उम्मीद नहीं है, क्योंकि इस महीने में भी भारत में औसत मासिक बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है.
पूर्व से पश्चिम तक 'सूखा'
मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले साल से तुलना करें, तो इस साल मध्य भारत में 50 फीसदी से कम बारिश हुई है. इसका असर सबसे ज्यादा किसानों पर देखने को मिल रहा है. इसके अलावा ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट भारत में इस साल 40 प्रतिशत कम बारिश देखने को मिली है. सिर्फ नॉर्थ ईस्ट भारत की बात करें, तो यहां के राज्यों में 31 फीसदी कम बारिश हुई है. दक्षिण भारत के इलाके भी कम बारिश से प्रभावित हुए हैं. यहां अब तक 27 प्रतिशत कम बारिश हुई है.'
दिल्ली से गुजरात तक, किस राज्य में कितनी कम बारिश
- दिल्ली- 50% कम
- हरियाणा- 29% कम
- पंजाब- 47% कम
- उत्तर प्रदेश- 50% कम
- बिहार- 47 % कम
- झारखंड- 59% कम
- मध्य प्रदेश- 33% कम
- गुजरात- 82% कम
- महाराष्ट्र- 47% कम
- हिमाचल प्रदेश- 32% कम

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पूरे भारत में जून में कम हुई बारिश, 5 कारण
जून में पूरे भारत में बारिश में लगभग 40 प्रतिशत की कमी देखी गई, जिसमें मध्य भारत सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा और वहां 50.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. 1901 के बाद से जून के महीने में देश में यह पांचवीं सबसे कम (99.5 मिमी) बारिश थी. महापात्र के अनुसार, मॉनसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश पांच कारणों से हुई.
- पहला कारण- मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) का प्रतिकूल चरण; यह हवा, बादलों और दबाव का एक गतिशील तंत्र है जो भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमते हुए बारिश लाता है.
- दूसरा कारण- जून के दौरान कोई कम दबाव वाली प्रणाली (एलपीएस) नहीं बनी. एलपीएस असल में ऐसे इलाके होते हैं जहां वायुमंडलीय दबाव आस-पास के इलाकों की तुलना में कम होता है.
- तीसरा कारण- जून के दौरान बनी ज्यादातर तूफान प्रणाली उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुड़ गईं, जिसके कारण हिंद महासागर क्षेत्र में एलपीएस (कम दबाव का क्षेत्र) कमजोर पड़ गया.
- चौथा कारण- इस महीने अल-नीनो की स्थितियों के उभरने से भी बारिश की गतिविधि पर बुरा असर पड़ा.
- पांचवां कारण- अल नीनो, जिसके कारण भारत में मॉनसून की बारिश कम होती है, के बारे में यह तो पता है कि इसका धरती पर तापमान बढ़ाने वाला असर होता है, लेकिन इसके उलट ला नीना का असर आमतौर पर तापमान को कम करने वाला होता है.
जुलाई में भी सामान्य से कम होगी बारिश
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि जुलाई के दौरान भारत में मासिक औसत बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है. मौसम विभाग के मुताबिक, 'जुलाई में लंबी अवधि के औसत (एलपीए) (1971-2020) की 94 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है. भारत में जुलाई में एलपीए बारिश लगभग 280.4 मिमी होती है. एलपीए किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित अवधि, जैसे कि एक महीने या एक मौसम के लिए दर्ज की गयी वर्षा को संदर्भित करता है, जिसका औसत आमतौर पर 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि में निकाला जाता है. आईएमडी ने कहा है कि उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है. आईएमडी के मौसम विज्ञान महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने एक बयान में कहा, 'जुलाई के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, सिवाय उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ इलाकों के, जहां सामान्य या उससे ज्यादा बारिश होने की उम्मीद है.'

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कहां पहुंचा मॉनसून, दिल्ली में कब होगी बारिश?
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बारे में बात करते हुए महापात्र ने बताया कि अगले 2-3 दिनों में इसके उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बाकी हिस्सों के साथ-साथ गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं. इस दौरान, मॉनसून के पूरे दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब के ज्यादातर हिस्सों और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ने की संभावना है. वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि उत्तर भारत में अनुकूल परिस्थितियां बनने के कारण, दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के तीन या चार जुलाई के आसपास दस्तक दे सकता है.
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