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राम मंदिर का CEO बनने की रेस में कौन-कौन, काशी विश्वनाथ वाले विश्वभूषण की भी चर्चा

अब तक ट्रस्ट ने ये साफ़ नहीं किया है कि सीईओ राज्य सरकार के अधिकारी को रखा जाएगा या किसी रिटायर्ड आईएएस/पीसीएस/जूडिशीएरी या किसी अन्य प्रशासनिक अनुभव वाले व्यक्ति को मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया जाएगा.

राम मंदिर का CEO बनने की रेस में कौन-कौन, काशी विश्वनाथ वाले विश्वभूषण की भी चर्चा
अयोध्या:

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में सीईओ नियुक्त करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया है. ये तीनों सदस्य तय करेंगे कि मंदिर की देखरेख का जिम्मा संभालने वाला कौन उपयुक्त व्यक्ति होगा. इसके बीच सवाल यह है कि वह राज्य सरकार का अधिकारी होगा या कोई प्रशासनिक अनुभव वाला व्यक्ति, यह फिलहाल साफ नहीं है. इसकी वजह यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट ने ये नहीं बताया है कि मंदिर में नियुक्त होने वाला सीईओ राज्य सरकार का अधिकारी होगा या किसी प्रशासनिक अनुभव वाले सेवानिवृत्त व्यक्ति को सीईओ नियुक्त किया जाएगा. 

अगर राज्य सरकार के किसी अधिकारी को सीईओ बनाया जाता है तो इसके लिए राज्य सरकार की कैबिनेट को मंज़ूरी देनी होगी. बात करें यूपी के मंदिरों की तो जहां सीईओ की व्यवस्था पहले से चली आ रही है, उनमें वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर और मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि मंदिर शामिल है. दोनों जगहों पर राज्य सरकार के अधिकारी को तैनात किया जाता है. बात करें अधिकारों की तो दोनों के अधिकारों में बहुत ज्यादा फर्क है. काशी विश्वनाथ मंदिर का सीईओ वित्तीय अधिकार रखने के साथ साथ मंदिर को लेकर बड़े फैसले करने का अधिकार रखता है. वहीं कृष्ण जन्मभूमि में लगा अधिकारी सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ज़िम्मेदार होता है.

काशी विश्वनाथ मंदिर में साल 1983 के नियम के मुताबिक एक आईएएस या पीसीएस अधिकारी मंदिर का मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त किया जाता है. वर्तमान में विश्वनाथ मंदिर के सीईओ के पद पर विश्वभूषण मिश्रा को रखा गया है. अधिकारों की बात करें तो विश्वनाथ मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ मंदिर में बड़े आयोजन कराने और बाकी प्रबंधन का जिम्मा सीईओ के पास है. नियमों के मुताबिक़ अगर सीईओ किसी आयोजन में मंदिर के फण्ड से ख़र्च भी कर दे तो बाद में उसे मंदिर ट्रस्ट के लोगों को उसकी जानकारी और हिसाब देना होता है. विश्वनाथ मंदिर का सीईओ मंदिर के फंड या राज्य सरकार से सैलरी और भत्ते ले सकता है.

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मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि में नियुक्त अधिकारी के पद का नाम मंदिर मजिस्ट्रेट है. मंदिर मजिस्ट्रेट यूपी सरकार में तैनात पीसीएस स्तर का अधिकारी होता है. बाबरी विध्वंस के बाद कृष्ण जन्मभूमि की सुरक्षा को देखते हुए मंदिर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई. यह जिम्मा एडीएम (क़ानून व्यवस्था) या सिटी मजिस्ट्रेट के पास होता है. इनके अधीन तीन एसडीएम और पुलिस के तीन सर्कल ऑफिसर स्तर के अधिकारी रहते हैं। मंदिर मजिस्ट्रेट के पास वित्तीय अधिकार नहीं हैं. मंदिर मजिस्ट्रेट सिर्फ मंदिर परिसर के अंदर की सुरक्षा को लेकर मुआयना करता है और निर्देश देकर सुरक्षा पुख्ता करने का काम निभाता है।

चूंकि एडीएम या सिटी मजिस्ट्रेट को ही अतिरिक्त जिम्मेदारी के तौर पर मंदिर मजिस्ट्रेट बनाया जाता है, इसलिए इनका वेतन राज्य सरकार से ही मिलता है. इनको मंदिर मजिस्ट्रेट के नाम पर कोई अतिरिक्त वेतन या भत्ता नहीं दिया जाता. बात करें अयोध्या के राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति की तो फिलहाल कल हुई ट्रस्ट आई बैठक में सीईओ नियुक्त करने को लेकर सहमति बनी. इसके लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े को सीईओ चुनने के लिए इस समिति में रखा गया है. 

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हालांकि ट्रस्ट ने ये साफ़ नहीं किया है कि सीईओ राज्य सरकार के अधिकारी को रखा जाएगा या किसी रिटायर्ड आईएएस/पीसीएस/जूडिशीएरी या किसी अन्य प्रशासनिक अनुभव वाले व्यक्ति को मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया जाएगा. अयोध्या के राम मंदिर में अगर राज्य सरकार का अधिकारी नियुक्त होता है तो शासन को कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर इसकी मंज़ूरी देनी होगी. इसके बाद किसी अधिकारी/अधिकारियों के नाम ट्रस्ट की तरफ़ से गठित समिति को देने होंगे. उसके बाद वो समिति तय करेगी कि उनमें से बेहतर विकल्प क्या हो सकता है. यूं तो ये पूरा अधिकार राज्य सरकार का है कि कौन इसमें भेजा जा सकता है, लेकिन राम मंदिर को लेकर मचे बवाल के बाद सरकार किसी अनुभवी अधिकारी को इस काम में लगा सकती है.

क्यों विश्वभूषण मिश्रा का नाम राम मंदिर सीईओ की रेस में

यूपी सरकार में मंदिर प्रबंधन के काम में बड़ा और चर्चित नाम पीसीएस अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा का है. विश्वभूषण मिश्रा वर्तमान में काशी के बाबा विश्वनाथ मंदिर में सीईओ हैं. ग्लोबल सनातन नाम से उनकी किताब काफ़ी चर्चा में रही है. सनातन को लेकर उनके व्याख्यान की भी बहुत चर्चा हुई. विश्वभूषण मिश्र ने जिस तरह काशी विश्वनाथ मंदिर का कामकाज संभाला और जैसा सनातन को लेकर उनका जुड़ाव और झुकाव है, उसको देखते हुए राज्य सरकार उनको काशी से अयोध्या शिफ्ट कर सकती है. बात करें किसी प्रशासनिक अनुभव वाले व्यक्ति की सीईओ के तौर पर नियुक्ति की तो इसकी भी संभावना बनती दिखती है. 

योगेश्वर मिश्रा और बजरंग लाल बागड़ा के नाम पर भी हो सकती है विचार

इसमें एक नाम अयोध्या के कमिश्नर पद पर रह चुके रिटायर्ड आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा का है. योगेश्वर राम मिश्रा का अनुभव उन्हें इस रेस में शामिल करता है. इसके अलावा बजरंग लाल बागड़ा अगर राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल नहीं होते हैं तो उन्हें भी रेस में माना जा सकता है. बागड़ा पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और वो नाल्को के सीएमडी रह चुके हैं. संभव है कि विश्व हिंदू परिषद इनके अलावा भी कुछ नामों पर विचार करे. क्या होगा, ये आने वाले दिनों में साफ हो पाएगा। 

कौन हैं समिति के तीन सदस्य, जिन्हें मिली सीईओ तय करने की जिम्मेदारी

इस समिति में पहला नाम जस्टिस प्रमोद कोहली सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. जम्मू कश्मीर के राजौरी के रहने वाले जस्टिस प्रमोद कोहली कैट के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में यूनिफार्म सिविल कोड की ड्राफ्टिंग के लिए गठित कमेटी में भी वो सदस्य रहे हैं. वहीं लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी सेना से रिटायर्ड हैं. यूपी के फर्रुखाबाद के रहने वाले विष्णुकांत चतुर्वेदी वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूतपूर्व सैनिक सेवा परिषद के ऑल इंडिया चेयरमैन हैं. तीसरा नाम सुरेश हावड़े का है, जो शिरडी के साई मंदिर के व्यवस्थापक रहे हैं. पेशे से उद्योगपति रहे सुरेश हावड़े शिरडी के साईबाबा संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे हैं. महाराष्ट्र के रहने वाले सुरेश हावड़े को मंदिर प्रबंधन के काम का विशेषज्ञ माना जाता है.

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