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टॉरपीडो कैसे करता है काम, अमेरिका ने किस टॉरपीडो से ईरानी युद्धपोत को किया ध्वस्त?

Mark-48 Heavyweight Torpedo News: अमेरिका ने मार्क 48 टॉरपीडो का इस्तेमाल करके हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत को नष्ट कर दिया था. आइए जानते हैं टॉरपीडो क्या होता है.

अमेरिका ने टॉरपीडो का इस्तेमाल कर ईरानी युद्धपोत को किया नष्ट
  • अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस देना को टारपीडो से डुबो दिया था
  • इस हमले में ईरान के कम-से-कम 87 नौसैनिकों की मौत हुई है
  • अमेरिका ने वर्ल्ड वॉर-2 के बाद पहली बार टॉरपीडो का इस्तेमाल किया है
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नई दिल्ली:

अमेरिका अब ईरान पर हवा से लेकर पानी तक में जोरदार हमले करना शुरू कर चुका है. बुधवार को अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो के जरिए ईरान से युद्धपोत को हिंद महासागर में डुबो दिया. इस हमले में ईरान के कम से कम 87 नौसैनिकों की मौत हुई है. नेवी वॉरशिप 'आईआरआईएस देना' (IRIS Dena) हिंद महासागर की अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में था और ईरान लौट रहा था. कुछ दिन पहले ये युद्धपोत भारत में मिलन-2026 में शामिल होने आया था. इस हमले में अमेरिका ने विश्वयुद्ध-2 के बाद पहली बार टारपीडो का इस्तेमाल किया था. 

क्या होता है टॉरपीडो?

टॉरपीडो एक स्वचालित, सिगार के आकार का पानी के नीचे चलने वाला मिसाइल है. इसे पनडुब्बी, युद्धपोत और एयरक्रॉफ्ट से लॉन्च किया जाता. इसके पास जंगी जहाजों को नष्ट करने की क्षमता है. टॉरपीडो थर्मल इंजन के जरिए जाइरोस्कोप (सोनार) का इस्तेमाल करता है. इसके जरिए ही ये लक्ष्य को भेदता है. 

आधुनिक टॉरपीडो बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक मोटर या थर्मल इंजन (जैसे, ओटो ईंधन) का उपयोग करते हैं. वो पानी को भेदने के लिए ऑक्सीडाइजर का इस्तेमाल करते हैं. उच्च गति वाले टॉरपीडो सुपरकैविटेशन का उपयोग कर सकते हैं, जिससे उनके चारों ओर गैस का बुलबुला बनता है और जल प्रतिरोध में कमी आ जाती है. 
 

यह भी पढ़ें, भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो हमले में 87 नौसैनिक मारे गए


टॉरपीडो को लॉन्च करने के लिए पनडुब्बी में एक ट्यूब होता है. इसके जरिए ही टॉरपीडो बाहर निकलता है. लॉन्च होने के बाद वो तेजी से लक्ष्य की तरफ बढ़ता है. जैसे ही टॉरपीडो लॉन्च होता है वो ज्वलनशील होता है और पानी को भेदते हुए लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ता है. 

टॉरपीडो में विस्फोट के दो तरीके होते हैं. पहला टॉरपीडो पनडुब्बी के अंदर एक ट्यूब से निकलता है. उसमें विस्फोट लगे होते हैं और लक्ष्य से टकराकर उसमें विस्फोट हो जाता है. इसे कॉन्टैक्ट टॉरपीडो कहा जाता है. नया टॉरपीडो वैसे टॉरपीडो होते हैं जो लक्ष्य के जैसे ही करीब पहुंचते हैं उसमें खुद विस्फोट हो जाता है. ये टॉरपीडो युद्धपोत को टच तक नहीं करते हैं. इसे प्रॉक्सीमिटी टॉरपीडो कहा जाता है. 

अमेरिका ने मार्क- 48 टॉरपीडो का किया इस्तेमाल

अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत को तबाह करने के लिए मार्क-48 हैवीवेट टॉरपीडो का इस्तेमाल किया था. ये टॉरपीडो अमेरिकी नौसेना की सबसे ताकतवर हथियार है. इस टॉरपीडो के पास युद्धपोत और पनडुब्बी दोनों को नष्ट करने की क्षमता है. इस टॉरपीडो को 1972 में अमेरिकी नौसेना में शामिल किया गया था. हालांकि, बाद के सालों में इसमें कई बदलाव किए गए. इसके फीचर, गाइडेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रपल्सन में काफी बदलाव किए गए. इस टॉरपीडो का वजन करीब 1700 किलोग्राम है. इसमें काफी ताकतवर विस्फोटक लगा होता है जो बड़े से बड़े युद्धपोतों को नष्ट करने की ताकत रखते हैं. मार्क-48 टॉरपीडो एक्टिव और पैसिव दोनों तरह के सोनार का इस्तेमाल करके पानी के नीचे अपने लक्ष्य को पहचान सकता है. अमेरिका का ये टॉरपीडो प्रॉक्सीमिटी टॉरपीडो है जो लक्ष्य के करीब जाकर विस्फोट करता है. 

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