- वित्त मंत्री ने MSME क्षेत्र के लिए 10,000 करोड़ रुपये के SME ग्रोथ फंड की घोषणा की है
- आत्मनिर्भर भारत निधि में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये का टॉप‑अप दिया जाएगा
- सरकार ने MSME को सक्षम बनाने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों से खरीद को ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर लाने का निर्णय लिया है
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए बड़े कदमों का ऐलान किया. सरकार ने कहा कि देश की आर्थिक शक्ति केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि छोटे और उभरते उद्योगों से बनती है. इसी को ध्यान में रखते हुए MSME सेक्टर के लिए विशेष फंड, इंसेंटिव और नई सहायता योजनाओं की घोषणा की गई.
सबसे बड़ा ऐलान SME ग्रोथ फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपये के प्रावधान का है. यह फंड उभरते उद्योगों को पूंजी उपलब्ध करवाएगा, ताकि वे विस्तार, मशीनरी, टेक्नोलॉजी और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें.
सरकार ने कहा कि इन फंड्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि छोटे उद्योगों की रफ्तार देश की ग्रोथ का इंजन बने.
इसके साथ ही आत्मनिर्भर भारत निधि में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये का टॉप‑अप देने की घोषणा हुई है. इसका उद्देश्य माइक्रो यूनिट्स, छोटे ट्रेडर्स और नए उद्यमियों को आसानी से पूंजी उपलब्ध कराना है. वित्त मंत्री के अनुसार, अब तक 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि MSME क्षेत्र को दी जा चुकी है, और अब इसका दायरा और बढ़ाया जा रहा है.वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि MSME को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचाने के लिए सरकार चार बड़े कदम उठा रही है
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा MSME से की गई सभी खरीद को ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर लाना, जिससे भुगतान पारदर्शी और समय पर हो सके.
- CGTMSE के जरिए क्रेडिट गारंटी मैकेनिज़्म को और मज़बूत करना, ताकि छोटे उद्योग बिना गिरवी रखे भी ऋण प्राप्त कर सकें.
- MSME की सरकारी खरीद से संबंधित जानकारी को वित्त प्रदाताओं से जोड़ना, जिससे उन्हें कम ब्याज पर तेजी से फंड मिल सके.
- ट्रेड रिसीवेबल्स को एसेट‑बेस्ड सिक्योरिटीज़ में बदलने का प्रस्ताव, जिससे छोटे व्यापारियों की नकदी समस्या कम होगी.
सरकार ने यह भी ऐलान किया कि टियर‑2 और टियर‑3 शहरों में बड़े टेक्सटाइल पार्क बनाए जाएंगे. इसका उद्देश्य छोटे शहरों में रोजगार बढ़ाना और भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुकूल बनाना है. साथ ही, सरकार ICMAI, ICAI और ICSI जैसे संस्थानों की मदद से MSME के लिए सस्ती पेशेवर सहायता उपलब्ध कराएगी, जिससे छोटे उद्यम कम लागत में नियमों का पालन कर सकें.
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