- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन शिफ्ट में पढ़ने की अनुमति दी है
- पूर्व डीजीपी बृजलाल ने योगी के इस निर्णय का समर्थन करते हुए पहले की सरकारों की आलोचना की
- समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकाल में सरकारी बंगलों में इफ्तार पार्टियां होती थीं
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमाजियों से कहा कि नमाज पढ़नी आवश्यक है, तो शिफ्ट में पढ़िए, हम उसको नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने देंगे. सीएम योगी के इस बयान का संत समाज से लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी समर्थन किया है. मौजूदा राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने भी सीएम योगी के इस कदम की सराहना की है. उन्होंने कहा कि एक समय वो भी था, जब समाजवादी और कांग्रेस सरकारों के दफ्तरों, प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगलों में इफ्तार पार्टियां होती थी और नमाज पढ़ी जाती थी.
तब सरकारी बंगलों में इफ्तार पार्टी देने की होती थी होड़
सांसद बृजलाल ने योगी आदित्यनाथ से पहले की सरकारों के कार्यकाल को याद करते हुए कहा, "मैं मुख्यमंत्री आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी को सड़क पर नमाज़ पढ़ना प्रतिबंधित करने पर बधाई देता हूं. समाजवादी और कांग्रेस पार्टी की ऑफिसों, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगलों में इफ्तार पार्टियां होती थीं और नमाज़ पढ़ी जाती थी. केंद्रीय और राज्य सरकारों के मंत्रियों के बंगलों में रोजा इफ्तार करने की होड़ लगी रहती थी. लज़ीज पकवानों को परोसने में भी होड़ लगी रहती थी. बड़े-बड़े पदाधिकारी टोपी और गमछा ओढ़ कर इफ्तार पार्टियों में भाग लेते थे. लेकिन हिंदू त्योहारों पर कोई समारोह इन पदाधिकारियों के यहां आयोजित करने की कल्पना करना भी महा पाप था. हद तो तब हो गई जब कुछ डीएम, एसएसपी, एसपी, कमिश्नर, डीआईजी, आईजी भी मुख्यमंत्री की नज़रों में चढ़ने के लिए अपने सरकारी बंगलों में रोजा इफ्तार कराने लगे थे."
मुलायम सिंह की सरकार में रमजान...
मुलायम सिंह की सरकार में रमजान के दौरान कैसा माहौल होता था, इसका जिक्र करते हुए सांसद बृज लाल ने बताया, "मैंने वह दिन भी देखा है, जब 27 अक्टूबर 2003 से 25 नवम्बर 2003 तक रमजान मनाया गया. उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की नई-नई सरकार बनी थी. लखनऊ में (1975 बैच आईपीएस) के आईजी ज़ोन हनुमान गढ़ी के ठीक सामने इफ्तार करवाना चाहते थे. महंत हनुमान गढ़ी को पटा लिया गया था. ज़ोन साहब को वामपंथी माना जाता था. वे आईआईटी बीएचयू के केमिकल इंजीनियरिंग के एक विवादित प्रोफेसर को अपने साथ लेकर चलते थे. उस दाढ़ी वाले, मैगसैसे अवार्डी विवादित प्रोफेसर की छवि अच्छी नहीं थी. आईआईटी बीएचयू ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था, क्योंकि उनका संबंध नक्सलियों से बताया जाता था. नवंबर 2003 में हनुमानगढ़ी के सामने इफ्तार पार्टी और नमाज़ पढ़ने की योजना राजनैतिक आका के साथ आईजी ज़ोन साहब ने बनाई और वे हनुमानगढ़ी के ठीक सामने इफ्तार कराने को आमादा थे."
हनुमानगढ़ी मंदिर तक सटकर नमाज पड़ने की थी योजना
राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ने बताया, "मुलायम सिंह की सरकार के दौरान एक कर्मठ, निष्ठावान आईपीएस अधिकारी एसएसपी फैजाबाद(अब अयोध्या) तैनात थे. उन्होंने हनुमानगढ़ी पर इफ्तार और नमाज़ पढ़ने के कार्यक्रम के लिए साफ इनकार कर दिया. ज़ोन साहब तैश में एसएसपी से बोले कि यदि वे एसएसपी होते तो हनुमानगढ़ी की छत पर इफ्तार करवाते. आखिरकार तय हुवा कि हनुमानगढ़ी के महंत अपने घर के अंदर इफ्तार करायेंगे. जानकारी हुई कि मुसलमान महंत जी के घर में जाने वालो तीनों सीढ़ियों पर भी चटाई बिछा कर नमाज़ अदा करेंगे और हनुमानगढ़ी मंदिर तक सटकर नमाज पड़ेंगे. जैसे ही एक मुस्लिम ने योजनानुसार पहली सीढ़ी पर चटाई बिछायी, पुलिस ने उठाकर फेंक दिया."
पूर्व डीजीपी ने बताया, "कहा जाता है कि महंत जी के आवास में इफ्तार के दौरान गणेश जी एवं कुछ देवतावों की प्रतिमाएं अपवित्र हुई. यह था समाजवादी पार्टी का तुष्टिकरण जिन्होंने रामभक्तों पर गोलियां चलवाकर सरयू जी के जल को लाल कर दिया था. मुलायम सिंह यादव बाबरी-ढांचे के विध्वंस की भरपाई करना चाहते थे, जिसमें एक कर्तव्यनिष्ठ आईपीएस अधिकारी के कारण सफल नहीं हो पाये."
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सीएम योगी ने बकरीद से पहले कहा कि हम सड़कों पर अराजकता नहीं पलने देंगे. प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. मुस्लिम समुदाय का प्रमुख पर्व बकरीद इस महीने की 28 तारीख को मनाया जायेगा.
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