- पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने कहा कि 2020 के भारत-चीन संघर्ष के दौरान सरकार ने सेना को अकेला नहीं छोड़ा
- नरवणे ने बताया कि भारतीय सैनिकों को चीनी सैनिकों पर गोली चलाने का अधिकार शुरू से ही था
- नरवणे ने राहुल गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक नेतृत्व से पूरी आज़ादी और समर्थन मिला
भारत और चीनी सेना के बीच 2020 में हुए संघर्ष को लेकर पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने एक बड़ा बयान दिया है. NDTV से खास बातचीत में नरवणे ने कहा कि ये कहना कि सरकार ने हमे उस दौरान फैसले लेने के लिए अकेला छोड़ दिया था, गलत है. उस दौरान सरकार हमारे साथ खड़ी थी. यदि स्थिति की मांग होती, तो उन्हें चीनी सैनिकों पर गोली चलाने का पूरा अधिकार था.पूर्व सेना प्रमुख की ये टिप्पणियां संसद में हुई एक तीखी बहस के कुछ महीनों बाद आई हैं, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि जनरल की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी' से यह खुलासा हुआ है कि जब पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर स्थित रेचिन ला दर्रे पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना हुआ था और जनरल ने सरकार से आदेश मांगे थे, तब प्रधानमंत्री (रक्षा मंत्री के माध्यम से) ने उनसे कहा था, "जो उचित समझो, वो करो."
आज जनरल नरवणे ने NDTV को बताया कि उन्हें मिले आदेश वास्तव में बिल्कुल स्पष्ट थे और भारतीय सैनिकों को शुरू से ही गोली चलाने का अधिकार था, यदि उनकी सुरक्षा दांव पर हो.उन्होंने NDTV से कहा कि 'फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी' को अनिवार्य मंज़ूरी के लिए रक्षा मंत्रालय को भेजा गया था, लेकिन पाठकों तक पहुंचने से पहले ही इसे रोक दिया गया. जनरल नरवणे ने इसकी सामग्री पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है, और इसका खास कारण यह बताया है कि यह अभी भी समीक्षाधीन है. ऐसा करना एक तरह से पिछले दरवाज़े से घुसने जैसा होगा.

उन्होंने कहा कि किताब में ऐसा कुछ भी नहीं था, जिसके लिए इतना हंगामा किया जाए. मुझे नहीं लगता कि उस किताब में कुछ भी बहुत ज़्यादा संवेदनशील था. लेकिन लोगों की सोच अलग-अलग होती है. मेरी सोच ज़मीनी स्तर से अलग होगी, जो कि कूटनीतिक या राजनीतिक स्तर से अलग होगी. हर किसी को अपने विचार रखने का अधिकार है.

उनकी नई किताब, 'द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज़', अब आ गई है. उस दूसरी किताब का ज़िक्र करते हुए, जिसे प्रिंटिंग प्रेस तक पहुँचने से रोक दिया गया था, भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख ने कहा कि उन्हें लिखने के काम से ही संतुष्टि मिली. बेशक, आप कोई किताब इसलिए लिखते हैं ताकि वह छपे, वरना कोई क्यों लिखेगा? मैं अब आगे बढ़ गया हूं.मैंने अपनी दूसरी किताब लिख ली है.
जनरल नरवणे ने कांग्रेस नेता के विचारों से असहमति जताई है. उन्होंने कहा कि मैं इसे इस तरह समझता हूँ कि मुझे काम करने की पूरी आज़ादी दी गई थी, ताकि मैं अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ फ़ैसले ले सकूं क्योंकि मुझे ज़मीनी हालात की बेहतर जानकारी थी और मुझे पता था कि मेरे सैनिक क्या करने में सक्षम हैं. उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में, मुझे लगता है कि यह फ़ैसला बिल्कुल सही था कि इसे सेना के अधिकारियों पर ही छोड़ दिया जाए. इससे यह पता चलता है कि सरकार को अपनी सेना पर कितना भरोसा है कि और उन्होंने 'अलग-थलग' किए जाने की बात को सिरे से ख़ारिज कर दिया.
यह भी पढ़ें: जनरल नरवणे की किताब पर विवाद के बाद रक्षा मंत्रालय बनाने जा रहा है नया नियम, लिखने से पहले लेनी होगी परमिशन
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं