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This Article is From Sep 26, 2018

मिलिए उस लॉ स्टूडेंट से, जिसकी याचिका पर SC ने दिया अदालतों की कार्यवाही के सीधा प्रसारण का आदेश

जोधपुर के लॉ स्टूडेंट स्वप्निल त्रिपाठी की एक याचिका ने अदालतों में सुनवाई के सिस्टम में पारदर्शिता के लिहाज से मील का पत्थर स्थापित कर दिया. खुद सुप्रीम कोर्ट के जजों ने भी लाइव स्ट्रीमिंग को जरूरी माना.

मिलिए उस लॉ स्टूडेंट से, जिसकी याचिका पर SC ने दिया अदालतों की कार्यवाही के सीधा प्रसारण का आदेश
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर के छात्र स्वप्निल त्रिपाठी की रिट पर सुप्रीम कोर्ट ने लाइव-स्ट्रीमिंग का दिया आदेश.
नई दिल्ली: जोधपुर में कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र स्वप्निल त्रिपाठी की एक याचिका ने सुप्रीम कोर्ट में इतिहास कायम कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में सुनवाई के सीधा प्रसारण का आदेश दे दिया. यह आदेश जब लागू होगा तो संसद के दोनों सदनों की तरह अदालतों का भी सीधा प्रसारण संभव होगा.अदालती कार्यवाही के सीधा प्रसारण का मकसद पारदर्शिता से जुड़ा है. लंबे समय से इसकी जरूरत महसूस की जा रही थी. सीधा प्रसारण संभव होने के बाद पूरी प्रक्रिया को जनता घर बैठे देख सकती है.  मसलन जज कैसे सुनवाई करते हैं, वादी-प्रतिवादी पक्ष से कैसे सवाल-जवाब होते हैं, वकील कैसे तर्क देते हैं....आदि...आदि. इस प्रकार अभी तक वादी-प्रतिवादी आदि पक्षों की मौजूदगी में में बंद कमरे में होने वाली सुनवाई को  उसी समय(रियल टाइम) जनता भी ऑनलाइन देख सकेंगी. एक प्रकार से यह ओपेन कोर्ट जैसी व्यवस्था होगी.हालांकि अभी आदेश हुआ है, इसका पालन की व्यवस्था बननी है. मगर अदालतों की लाइव स्ट्रीमिंग को न्यापालिका में पारदर्शिता की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है. 

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कानूनी मुद्दों के ब्लॉगर भी हैं स्वप्निल
अदालतों की लाइव स्ट्रीमिंग पर आए  फैसले के पीछे कानून के छात्र स्वप्निल त्रिपाठी की अहम भूमिका रही. नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से लॉ ऑनर्स में अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे स्वप्निल त्रिपाठी ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. स्वप्निल thebasicstructureconlaw.wordpress.com नामक ब्लॉग भी चलाते हैं. जिस पर कानून से जुडे अहम मुद्दों पर कलम चलाकर विचार बयां करते हैं. स्वप्निल अदालतों में इंटर्न के फैसलों पर लगे बैन को भी चुनौती दे चुके हैं.  स्वप्निल की याचिका पर जनहित और राष्ट्रीय महत्व से जुड़े मामलों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग का आदेश हुआ. स्वप्निल के साथ वरिष्ठ वकील इंदिरा जय सिंह ने भी लाइव-स्ट्रीमिंग को लेकर याचिका दायर कर रखी थी. इन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग फेज में लागू की जाएगी और इससे न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी. कोर्ट ने कहा कि इसके लिए नियम कायदे तय होंगे.

हालांकि कोर्ट ने आरक्षण और अयोध्‍या जैसे संवेदनशील मामलों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग करने की इजाजत नहीं दी है. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने बुधवार को फैसला सुनाया है. पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं. बता दें कि इस 24 अगस्त को राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था. कोर्ट ने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और ये ओपन कोर्ट का सही सिद्धांत होगा. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि हम खुली अदालत को लागू कर रहे हैं. ये तकनीक के दिन हैं हमें पॉजीटिव सोचना चाहिए और देखना चाहिए कि दुनिया कहां जा रही है. कोर्ट में जो सुनवाई होती है वेबसाइट उसे कुछ देर बाद ही बताती है. इसमें कोर्ट की टिप्पणी भी होती हैं. साफ है कि तकनीक उपलब्ध है. हमें इसका इस्तेमाल करना चाहिए. 

वीडियो-SC का बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में SC/ST को आरक्षण


 
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