- दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 4 जून को केरल तट से टकराने के बाद 72 घंटे में 11 राज्यों तक फैल गया है
- मौसम विभाग ने केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत में अगले 7 दिनों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है
- इस साल मॉनसून सामान्य से तीन दिन देरी से पहुंचा है और जून से सितंबर तक औसत से कम बारिश का अनुमान है
देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने तेज रफ्तार पकड़ ली है. 4 जून को केरल के तट से टकराने के 72 घंटे के भीतर मॉनसून 11 राज्यों तक पहुंच गया है. मौसम विभाग ने अगले 7 दिन केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर-पूर्वी भारत में भारी बारिश की चेतावनी दी है.
दक्षिण- पश्चिम मॉनसून ने रविवार को उत्तरपूर्वी भारत में पूरे नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम को कवर कर लिया. साथ ही, असम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर मॉनसून की बारिश शुरू हो गयी है.
भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनसून पिछले 72 घंटे में 11 राज्यों में पहुंच चुका है -- केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, असम और अरुणाचल प्रदेश. इन सभी राज्यों में मॉनसून की बारिश रिकॉर्ड की जा रही है.
इन राज्यों में भारी बारिश के आसार
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मॉनसून की वजह से अगले 7 दिनों के दौरान केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तरपूर्वी भारत में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा (7-20 सेमी) होने की प्रबल संभावना है. साथ ही, 8 से 10 जून के बीच कर्नाटक में अलग-अलग जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश होने की भी संभावना है.
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3 दिन के देरी से आया है मॉनसून
इस बार मॉनसून तीन दिन की देरी से 4 जून को केरल पहुंचा है. आम तौर पर मॉनसून सीजन 1 जून के आसपास शुरू होता है. पिछले साल मॉनसून 8 दिन पहले, 24 मई को ही केरल तट पर पहुंच गया था और 29 जून तक ही पूरे देश को कवर भी कर लिया था.
मौसम विभाग ने इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है.
29 मई को जारी सेकंड स्टेज-लॉन्ग रेंज फोरकास्ट में मौसम विभाग ने कहा कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन (जून से सितम्बर) के दौरान देशभर में 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है. यानी सामान्य से कम.
इसी तरह मध्य भारत के ऊपर एक 'मॉनसून कोर जोन' है जहां ज्यादातर खेती बारिश पर ज्यादा निर्भर करती है, वहां भी सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं.

जुलाई से सक्रिय हो सकता है अल-नीनो
मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के आंकलन के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान 'अल-नीनो' की स्थिति बन सकती है. इस साल मॉनसून सीजन के दौरान औसत से कम बारिश के पूर्वानुमान की एक अहम वजह 'अल-नीनो' का इस सीजन के दौरान जुलाई के आसपास सक्रिय होना है.
दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन कृषि क्षेत्र, विशेषकर कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और इसका सीधा असर खरीफ सीजन के दौरान फसलों की बुआई पर पड़ता है.
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उत्तर भारत में अभी राहत नहीं
मॉनसून ने रफ्तार भले ही पकड़ ली हो लेकिन कुछ दिन दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.
दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के दक्षिणी और पूर्वोत्तर हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रहा है. हालांकि, मानसून की यह रफ्तार उत्तर भारत तक अभी नहीं पहुंची है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बड़े हिस्से अगले कई दिनों तक भीषण गर्मी और लू की चपेट में रहेंगे.
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 10 से 12 जून के दौरान छिटपुट बारिश की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 11-12 जून को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है. इसके बावजूद 9 से 10 जून के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश और 9 से 11 जून तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लू चलने की आशंका जताई गई है.

राजस्थान में मौसम सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. पश्चिमी राजस्थान में 7 जून के दौरान तेज धूलभरी आंधी चल सकती है, जहां हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों में 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इसके बाद 8 से 12 जून तक पश्चिमी राजस्थान में भीषण लू चलने की संभावना है. वहीं पूर्वी राजस्थान में 6 से 12 जून के दौरान छिटपुट बारिश और 7 से 12 जून तक 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं.
वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 7 से 12 जून तक रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है. हिमाचल प्रदेश में 6-8 जून और 11-12 जून के दौरान व उत्तराखंड में 6 से 12 जून तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है.
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में 12 जून तक बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है. पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 10 जून तक, जबकि विदर्भ में अगले तीन दिन आंधी-तूफान के साथ 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. छत्तीसगढ़ में 8 से 12 जून तक इसी तरह का मौसम बना रह सकता है.
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