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हर मानसून में क्यों ट्रेंड करता है ‘रिमझिम गिरे सावन’? जानिए इसकी दिलचस्प कहानी

मुंबई की सड़कों पर असली बारिश में फिल्माया गया ‘रिमझिम गिरे सावन’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत यादों में से एक है. जानिए कैसे आर.डी. बर्मन, योगेश और अमिताभ बच्चन की टीम ने रचा था यह सदाबहार जादू.

हर मानसून में क्यों ट्रेंड करता है ‘रिमझिम गिरे सावन’? जानिए इसकी दिलचस्प कहानी
मंजिल फिल्म का गाना है 'रिमझिम गिरे सावन'

बारिश के गीतों की बात हो और ‘रिमझिम गिरे सावन' का नाम न आए, ऐसा होना मुश्किल है. 1979 में रिलीज हुई फिल्म मंजिल का यह गाना आज भी मानसून की पहचान माना जाता है. एक ओर आर.डी. बर्मन का मधुर संगीत था, दूसरी ओर गीतकार योगेश के सरल लेकिन दिल छू लेने वाले शब्द. ऊपर से अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी की केमिस्ट्री ने इसे यादगार बना दिया. खास बात यह रही कि इस गाने को स्टूडियो की नकली बारिश में नहीं, बल्कि मुंबई की असली बारिश और वास्तविक लोकेशनों पर फिल्माया गया था. यही वजह है कि दशकों बाद भी इसे सुनते ही बारिश, प्यार और पुरानी यादों का एहसास ताजा हो उठता है.   

जब एक साधारण धुन बन गई असाधारण एहसास

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फिल्म मंजिल के लिए संगीत तैयार करते समय आर.डी. बर्मन का मकसद कोई भव्य ऑर्केस्ट्रा खड़ा करना नहीं था. वह एक ऐसी धुन चाहते थे जो बारिश की बूंदों की तरह सहज लगे. आर.डी. बर्मन की पहचान ही यह थी कि वह हर गीत को उसकी कहानी और भावनाओं के अनुसार अलग अंदाज देते थे. ‘रिमझिम गिरे सावन' में भी उन्होंने सादगी को सबसे बड़ी ताकत बनाया. धुन में ऐसी मिठास रखी गई कि ऑडियंस को लगे मानो बारिश खुद कोई गीत गुनगुना रही हो.   

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योगेश ने शब्दों में उतार दी बारिश की रूमानी तस्वीर

इस गीत के बोल मशहूर गीतकार योगेश ने लिखे थे. उनकी खासियत यह थी कि वे कठिन शब्दों की जगह रोजमर्रा की जिंदगी में बोली जाने वाली भाषा का इस्तेमाल करते थे. ‘सुलग-सुलग जाए मन' जैसी पंक्तियां बारिश के मौसम में प्रेम की भावना को बेहद खूबसूरती से सामने लाती हैं. यही सादगी गीत की सबसे बड़ी ताकत बनी. ऐसे में ऑडियंस को लगा कि यह गीत किसी कवि की कल्पना नहीं, बल्कि उनके अपने दिल की बात कह रहा है.  

मुंबई की असली बारिश में हुई थी शूटिंग

इस गीत की सबसे दिलचस्प कहानी इसकी शूटिंग से जुड़ी है. निर्देशक बासु चटर्जी ने इसे स्टूडियो सेट पर फिल्माने के बजाय मुंबई की सड़कों पर शूट करने का फैसला किया. अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी के साथ इस गाने को शहर की असली बारिश में फिल्माया गया. मरीन ड्राइव, सड़कें और भीगती हुई मुंबई इस गीत का हिस्सा बनीं. यही वजह है कि गाने में कुछ भी बनावटी नहीं लगा. दर्शकों को ऐसा महसूस हुआ कि यह किसी फिल्म का सीन नहीं, बल्कि दो लोगों के जीवन का एक खूबसूरत पल है. बाद में यही नैचुरल अंदाज इस गीत की सबसे बड़ी पहचान बन गया.   

दो आवाजें, एक ही जादू

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दिलचस्प बात यह है कि ‘रिमझिम गिरे सावन' के दो वर्जन बनाए गए थे. एक को किशोर कुमार ने आवाज दी, जबकि दूसरे वर्जन को लता मंगेशकर ने गाया. दोनों ही रूप दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए. समय के साथ यह गाना सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि भारतीय मानसून की सांस्कृतिक पहचान बन गया. आज भी बारिश शुरू होते ही सबसे पहले जिन गीतों की याद आती है, उनमें ‘रिमझिम गिरे सावन' का नाम सबसे ऊपर रहता है.   

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