मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए भयावह आतंकी हमले को देश आज भी नहीं भूला है. इस हमले में 166 लोगों की जान गई थी जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे. अब इस मामले में महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाते हुए छह पाकिस्तानी साजिशकर्ताओं के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने के लिए मुंबई सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट का रुख किया है.
26/11 हमले की जीवित पीड़िता देविका रोटावन का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता उत्सव सिंह बैंस ने इस पहल का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार और हमले में घायल लोग वर्षों से उन लोगों को अदालत के कटघरे में देखने का इंतजार कर रहे हैं जिन्होंने इस हमले की योजना बनाई और उसे अंजाम दिलाने में भूमिका निभाई.
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करीब 18 साल से न्याय का इंतजार
वकील उत्सव सिंह बैंस के अनुसार, हमले में मारे गए 166 लोगों के परिवारों और घायल पीड़ितों के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है. उनका कहना है कि इतने वर्षों बाद भी हमले के मुख्य साजिशकर्ता कानून की पहुंच से दूर रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाला है. उन्होंने कहा कि गैरमौजूदगी में मुकदमे की व्यवस्था का इस्तेमाल लंबे समय से लंबित जवाबदेही की मांग को पूरा करने की दिशा में अहम पहल है.
पुराने सबूतों पर आधारित है सरकार का आवेदन
सरकार की ओर से दायर आवेदन ऐसे साक्ष्यों पर आधारित बताया गया है जिनकी पहले भी न्यायिक जांच हो चुकी है. इनमें हमले के दौरान पकड़े गए और बाद में फांसी दिए गए आतंकी अजमल कसाब का इकबालिया बयान शामिल है. इसके अलावा अमेरिकी-पाकिस्तानी आतंकी सहयोगी डेविड कोलमैन हेडली की गवाही भी इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है. पीड़ित पक्ष ने कहा है कि उन्हें इन सबूतों की मजबूती पर पूरा भरोसा है.
इंटरपोल के जरिए भेजे जाएंगे नोटिस
मामले में गृह मंत्रालय से आग्रह किया गया है कि छह फरार आरोपियों को इंटरपोल के माध्यम से उद्घोषणा नोटिस भेजे जाएं. कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस की तामील के बाद 90 दिन की अनिवार्य अवधि भी पूरी की जाएगी. पीड़ित पक्ष ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का आवश्यक सुरक्षा प्रावधान बताते हुए स्वीकार किया है.
निष्पक्ष सुनवाई पर भी जोर
उत्सव सिंह बैंस ने कहा कि आरोपियों की ओर से पैरवी के लिए विधिक सहायता वकील नियुक्त किए जाने का भी स्वागत किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि गैरमौजूदगी में चलने वाला मुकदमा भी पूरी तरह निष्पक्ष और कानूनी रूप से मजबूत होना चाहिए ताकि भविष्य में उस पर कोई सवाल न उठ सके. उन्होंने पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखने की भी मांग दोहराई ताकि वह इस प्रक्रिया में सहयोग करे.
17 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई मुंबई सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट में 17 सितंबर 2026 को निर्धारित है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में आगे क्या प्रगति होती है और क्या 26/11 हमले के कथित मास्टरमाइंड्स को आखिरकार भारतीय न्याय व्यवस्था के सामने जवाब देना पड़ेगा.
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