- बंगाल चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले चुनाव प्रचार आज शाम समाप्त होगा
- RSS छोटी-छोटी टोलियों में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर भयमुक्त मतदान की अपील कर रहा है
- महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला और घुसपैठ जैसे मुद्दे संघ की टीमें चुनावी जनसंपर्क में उठा रहीं
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए आज शाम चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा. मुख्य मुकाबला बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच है. इस चुनाव में जहां दोनों बड़े दलों ने पूरा जोर लगा दिया है, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अपनी शैली में मतदाताओं से संपर्क में जुटा है. संघ के एक नेता के अनुसार, आरएसएस सीधे चुनाव प्रचार नहीं करता. बल्कि उसका ‘लोक मत परिष्कार' का काम चलता है. इसके तहत चार-पांच स्वयंसेवकों की टोली घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करती है. यह जनसंपर्क ड्राइंग रूम बैठकों के जरिए होता है. इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी आरएसएस ने बड़े पैमाने पर इस तरह की ड्राइंग रूम बैठकें की थीं. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, आरएसएस की इन छोटी बैठकों का उद्देश्य पब्लिक ओपीनियन बनाना है.
घर-घर पहुंचे संघ के कार्यकर्ता
अभी तक के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए 250 से भी अधिक विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1.75 लाख छोटी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं. लोक मत परिष्कार अभियान के तहत स्वयंसेवकों की टोलियां ने घर-घर जा कर लोगों से संपर्क किया है. उनसे बिना भय के मतदान करने की अपील की है. संघ के एक नेता के अनुसार, यह अपील की गई है कि वे बिना भय और मोह के वोट डालें. लोगों से कहा जा रहा है कि वे नोटा पर वोट न डालें. शत प्रतिशत मतदान की अपील भी की जा रही है. संघ के स्वयंसेवक घर-घर पर्चे भी बांटते हैं जिनमें राज्य के ज्वलंत मुद्दों के बारे में विस्तार से बातें की गईं हैं.

BJP की दुर्गा ब्रिगेड...
संघ के एक स्वयंसेवक के अनुसार पश्चिम बंगाल में कुछ बड़े मुद्दों की पहचान की गई है, जिनके आधार पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. इनमें सबसे बड़ा मुद्दा महिला सुरक्षा का है. आरजी कर कांड के बाद से ही राज्य में महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन कर उभरा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य में बीजेपी की सरकार बनने पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए दुर्गा ब्रिगेड बनाने का वादा किया है. ऐसे वादों का उल्लेख भी किया जा रहा है. संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन विधेयक पारित न हो पाना और तृणमूल कांग्रेस का इसके खिलाफ वोट डालने को भी एक बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास किया जा रहा है.
फील्ड में ये मुद्दे उठा रहे
इसके अलावा राज्य सरकार पर लगे शारदा स्कैम और टीचर भर्ती घोटाले के आरोपों के कारण भ्रष्टाचार को भी एक केंद्रीय मुद्दा बनाया गया है. आरएसएस से जुड़े शिक्षकों के संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) से जुड़े लोग टीचर भर्ती में घोटाले का विस्तार से जिक्र करते हैं. वे यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि शिक्षकों की भर्ती में भी भ्रष्टाचार हो रहा है. इसी तरह राज्य में घुसपैठ का भी एक बड़ा मुद्दा है जिसे लोक मत परिष्कार में प्रमुखता से उठाया जा रहा है. इसे राज्य में हिंदुओं की सुरक्षा से जोड़ कर देखा जा रहा है और यह बताया जा रहा है कि राज्य की डेमोग्राफी में परिवर्तन हो रहा है जो भविष्य में घातक साबित हो सकता है.
जमीनी हालात का आकलन भी कर रहे
जनसंपर्क के अलावा आरएसएस के स्वयंसेवक जमीनी हालात का आकलन भी कर रहे हैं. वे अपनी मजबूत जमीनी पकड़ का लाभ उठा कर फीडबैक देने का काम भी करते हैं. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की गतिविधियों के बारे में भी वे सूचना देते हैं. संभावित हिंसा, बूथ कैप्चरिंग जैसे मामलों में भी उनका फीडबैक कारगर होता है. घर-घर पहुंचे संघ के कार्यकर्ता लोगों का मोबाइल नंबर भी लेते हैं और उनसे बाद में संपर्क बना कर रखते हैं. साथ ही, पश्चिम बंगाल में सक्रिय धार्मिक संगठनों और आश्रमों से भी संपर्क साधा गया है. राज्य में बड़े पैमाने पर हिंदू सांस्कृतिक और धार्मिक संगठन काम करते हैं. संघ के स्वयंसेवक इनसे भी लगातार संपर्क में हैं और जनजागरण में इनकी मदद ले रहे हैं. संघ की स्थापना के शताब्दी वर्ष के दौरान भी यह संपर्क तेज किया गया है.
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बंगाल में बढ़ी RSS की ताकत
पश्चिम बंगाल में आरएसएस की ताकत लगातार बढ़ी है. संघ का विस्तार अनेक क्षेत्रों में हुआ है. केवल पंद्रह वर्षों में संघ की शाखाओं की संख्या 900 से बढ़ कर 4300 तक पहुंच गई है. संघ के नेताओं के अनुसार बंगाल में आरएसएस के तीन क्षेत्रीय प्रभाग हैं- उत्तर बंग प्रांत (उत्तर बंगाल के जिले), मध्य बंग प्रांत (पूर्व व पश्चिम बर्द्धमान, बीरभूम, बांकुड़ा, मुर्शिदाबाद और पुरुलिया) व दक्षिण बंग प्रांत (दक्षिण बंगाल के जिले). केवल मध्य बंगाल क्षेत्र में 2023 से 2025 के बीच 500 से अधिक नई शाखाएं जोड़ी गईं हैं. मार्च 2023 में जहां यहां 1,320 शाखाएं थी, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,823 हो गई. इस दौरान उत्तर बंग प्रांत में शाखाओं की सख्या 1,034 से बढ़कर 1,153 तथा दक्षिण बंग प्रांत में 1,206 से बढ़कर 1.564 हो गई.

आरएसएस पश्चिम बंगाल में हिंदू एकता पर जोर दे रहा है जो बीजेपी के एजेंडे से मेल खाता है. संघ ने सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी पैठ बढ़ाई है. राज्य के गली-मोहल्लों में गूंजते जय श्री राम के नारे इस ओर इशारा भी दे रहे हैं. अब यह देखना होगा कि विधानसभा चुनावों के परिणाम पर संघ का यह अभियान कितना असर डालेगा.
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