- मेघालय सरकार ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की है
- सोनम रघुवंशी पर पति की हत्या का आरोप है और वे जमानत पर जेल से बाहर आई हैं
- हाईकोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी कर आगामी सुनवाई की तारीख 12 मई निर्धारित की है
Sonam Raghuvanshi Bail: सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार हाई कोर्ट पहुंच गई है. पति की हत्या के आरोप में जेल से जमानत पर बाहर आईं सोनम रघुवंशी की मुश्किलें ऐसे में बढ़ सकती हैं. सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दर्ज की है. इसके बाद हाईकोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी कर दिया है. मेघालय सरकार ने मांग की है कि सोनम को जमानत मिलने से वह गवाहों पर असर डाल सकती हैं.
क्या सोनम रघुवंशी फिर जेल जाएंगी!
मेघालय सरकार ने मंगलवार को हाई कोर्ट में पिछले सप्ताह निचली अदालत द्वारा कुख्यात हनीमून हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दिए जाने के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की. सोनम रघुवंशी का मामला पिछले साल सोहरा में उनके पति राजा रघुवंशी की सनसनीखेज हत्या से जुड़ा है, जब वे हनीमून पर थे. मामला हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए आया और अदालत ने सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी किया है. मामले की सुनवाई 12 मई को होगी.
क्या दी गई थी सोनम को गिरफ्तारी की जानकारी?
27 अप्रैल को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (न्यायिक) डी.आर. खारबतेंग ने जमानत देने का आदेश पारित किया था, जिसमें सोनम रघुवंशी की जमानत याचिका को इस आधार पर स्वीकार किया गया था कि उन्हें गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी गई थी. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, "सरकार की याचिका में कहा गया है कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है और मामले से संबंधित दस्तावेजों द्वारा भी इसका खंडन किया गया है, जो इस बात को उजागर करते हैं कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दी गई थी.
निचली कोर्ट ने इस तथ्य को किया नजरअंदाज
सरकार ने आगे तर्क दिया है कि निचली अदालत ने विवादित आदेश पारित करते समय इस बात को नजरअंदाज कर दिया कि इस मामले में आरोप पत्र पिछले साल 5 सितंबर को दाखिल किया गया था और उसके बाद इस साल 10 फरवरी को सप्लीमेंट्री आरोप पत्र दाखिल किया गया था. इस सनसनीखेज मामले में पिछले साल 28 अक्टूबर को आरोप तय किए गए थे. आरोप पत्र दाखिल होने और आरोप तय होने के बाद, यह स्पष्ट है कि आरोपी मामले के तथ्यों से अवगत है, जिसमें गिरफ्तारी के आधार भी शामिल हैं.
10 महीने जेल में रही सोनम, पिछले महीने मिली जमानत
मध्य प्रदेश के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को आखिरकार दस महीने बाद कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई. ईस्ट खासी हिल्स जिले की अदालत ने सोनम रघुवंशी को अप्रैल महीने में जमानत देते हुए साफ कहा कि गिरफ्तारी के वक्त कानून के मुताबिक, उसे उसके खिलाफ लगे आरोपों की सही और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी, जो उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. सोनम रघुवंशी को 9 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था. यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश के व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़े मामले में हुई थी. गिरफ्तारी के बाद से ही सोनम शिलॉन्ग की जेल में बंद थी. जांच एजेंसियों ने 5 सितंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल की और बाद में फरवरी 2026 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी पेश की गई. हालांकि, इतने लंबे समय के बावजूद केस की सुनवाई काफी धीमी रही और अब तक 90 गवाहों में से सिर्फ 4 की ही गवाही हो पाई है, जिससे ट्रायल में देरी साफ नजर आती है.
सोनम के वकील ने दी थीं क्या-क्या दलीलें?
सोनम की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जोरदार दलील दी कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय यह नहीं बताया गया कि उसे किन धाराओं में गिरफ्तार किया जा रहा है. वकील ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 22(1) का सीधा उल्लंघन है, जो हर गिरफ्तार व्यक्ति को उसके खिलाफ आरोपों की जानकारी देने की गारंटी देता है. इसके साथ ही यह भी दलील दी गई कि बिना ट्रायल के लंबे समय तक जेल में रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और आरोपी को अनिश्चित काल तक कैद में नहीं रखा जा सकता. वहीं, सरकारी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी की जानकारी दी गई थी और यह उसकी चौथी जमानत अर्जी है, इसलिए इस तरह की दलील अब देना सही नहीं है. कोर्ट ने दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े कागजात में कई गड़बड़ियां हैं. खास तौर पर, जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ था, उनका सही उल्लेख आरोपी को नहीं बताया गया था और “ग्राउंड ऑफ अरेस्ट” यानी गिरफ्तारी के कारण भी स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए थे.
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जमानत के साथ कोर्ट ने लगाई हैं कई शर्तें
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के वक्त उसके खिलाफ लगे आरोपों की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य है और ऐसा न करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. कोर्ट ने माना कि इस मामले में आरोपी को सही तरीके से जानकारी नहीं दी गई, जिससे उसके बचाव के अधिकार पर असर पड़ा. यही वजह रही कि अदालत ने उसे जमानत देने का फैसला लिया. हालांकि, कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी लगाई हैं. आरोपी को 50 हजार रुपये का निजी बॉन्ड और दो जमानतदार देने होंगे. साथ ही उसे हर सुनवाई में कोर्ट में पेश होना होगा, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करनी होगी और बिना अनुमति कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाना होगा.
बता दें कि राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम 21 मई 2025 को हनीमून मनाने शिलांग गए थे. यहां से दोनों 26 मई को सोहरा घूमने गए, जहां दोनों लापता हो गए थे. पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय टीमों ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया. करीब एक हफ्ते बाद 2 जून 2026 को राजा का शव सोहरा के मशहूर वेई सादोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में मिला था. राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप पत्नी सोनम, राज कुशवाहा और तीन हमलावर विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी पर लगे हैं. हालांकि इन सभी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है.
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