- पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई और पूरे देश में आक्रोश फैल गया था.
- इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में मौजूद 9 आतंकी ठिकाने तबाह किया था.
- ऑपरेशन महादेव के तहत पहलगाम हमले के 3 मुख्य आतंकी सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान को मौत के घाट उतारा गया.
Pahalgam Terror Attack: दो दिन बाद 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक साल पूरे हो रहे हैं. इस हमले में आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में घूमने आए सैलानियों पर अंधाधूंध गोलीबारी की थी. आतंकियों की इस गोलीबारी में 26 लोगों की मौत हुई थी. इस हमले से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. आतंकियों ने लोगों ने नाम और धर्म की पूछ कर उनके घर की महिलाओं और बच्चों के सामने गोली मारी थी. पहलगाम की यह आतंकी घटना भारतीय सेना के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनी. इस घटना के बाद भारत-पाकिस्तान के रिश्ते कटूता के नए दौर में गए.
पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपेशन सिंदूर में तबाह किए 9 आतंकी ठिकाने
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के 9 ठिकाने तबाह किए. इसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए. लेकिन सेना को असली कामयाबी 28 जुलाई 2025 को तब मिली, जब सेना ने ऑपेरशन महादेव के तहत पहलगाम में मौत का खूनी खेल खेलने वाले तीन आतंकियों को मौत के घाट उतारा.

सेना ने बताया कि दाछीगाम के घने जंगलों में पहलगाम के आतंकी इस तरह छिप कर रह रहे थे.
ऑपेरशन महादेव से जुड़ी अहम जानकारियां सेना ने की साझा
पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से दो दिन पहले सेना ने ऑपरेशन महादेव से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की है. सेना ने बताया कि पहलगाम में हुए हमले के कुछ ही घंटों में सेना मौके पर पहुंच गई. घटना की जांच तुरंत शुरू की गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने तीन आतंकियों की पहचान बताई. खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों की पहचान हुई. ये तीनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे.
सुलेमान शाह, हमजा और जिब्रान नामक आतंकी हुए थे ढेर
पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों की पहचान सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान भाई के रूप में हुई. इसके बाद बड़े स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया गया. सुरक्षा बलों की घेराबंदी से आतंकियों के भागने के रास्ते बंद किए गए. पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा बनाया गया. आतंकी दक्षिण कश्मीर के ऊंचे इलाकों में छिपते रहे.

दाछीगाम के जंगल में छिपे आतंकियों के मोबाइल व राशन के सामान.
हप्तानार, बुगमार, त्राल होते हुए दाछीगाम के जंगलों में छिपे थे आतंकी
आतंकी हप्तानार, बुगमार और त्राल से होते हुए आगे बढ़े. आखिर में दाछीगाम के घने जंगलों में पहुंच गए. यह इलाका बहुत कठिन और ऊंचाई वाला है. घने जंगलों में ऑपरेशन करना मुश्किल था. फिर भी सेना ने दबाव बनाए रखा. मई के अंत तक स्थिति साफ हो गई. आतंकी पकड़ से बचने की कोशिश कर रहे थे. ज्यादा देर होने पर ये आतंकी अमरनाथ यात्रा के लिए खतरा बन सकते थे.
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300 किमी में चलाया गया था सर्च ऑपरेशन
इसके बाद ऑपरेशन और तेज किया गया. पैरा स्पेशल फोर्सेस को भी तैनात किया गया. सेना, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने मिलकर काम किया. करीब 300 वर्ग किलोमीटर इलाके में सर्च ऑपरेशन चला. धीरे-धीरे इलाके को सर्च ऑपरेशन को और छोटा किया गया. ड्रोन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ. हर गतिविधि पर नजर रखी गई.
93 दिन बाद 28 जुलाई को मिली अहम कामयाबी
करीब 93 दिन तक पीछा जारी रहा. 250 किलोमीटर तक सर्च ऑपरेशन चला. आखिर में इलाका 25 वर्ग किलोमीटर तक सीमित कर दिया गया. इसके बाद 28 जुलाई 2025 को अंतिम कार्रवाई हुई. पैरा स्पेशल फोर्सेस ने गुप्त तरीके से आगे बढ़कर हमला किया. कठिन रास्तों पर 10 घंटे तक पैदल चलना पड़ा. मुठभेड़ में तीनों आतंकी मारे गए. इस तरह पहलगाम हमले के गुनहगारों को सजा मिली.

पहलगाम हमले के गुनाहगार तक कैसे पहुंची सेना?
बरसी से पहले जम्मू कश्मीर में बढ़ाई गई सुरक्षा
ऑपरेशन महादेव सेना की दृढ़ता का उदाहरण है. यह ऑपरेशन दिखाता है कि आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा. इससे लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ. देश की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता फिर साबित हुई. इस बीच पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. सीमाई इलाकों के साथ-साथ सेना और पुलिस के जवान विशेष चौकसी बरत रहे हैं.
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