केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू (फाइल फोटो)
- 'हिन्दी बहुत महत्वपूर्ण है, इसके बिना हमारा काम नहीं चल सकता'
- 'अंग्रेजी सीखते सीखते हमारे अंदर अंग्रेजी मानसिकता भी आ गयी'
- 'अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए भाषा बहुत जरूरी है'
अहमदाबाद:
कुछ दिन पहले कर्ज माफी को फैशन बताकर आलोचना झेलने वाले केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू एक बार फिर विवादों में हैं. इस बार हिंदी भाषा को लेकर. वेंकैया नायडू ने शनिवार को कहा कि 'राष्ट्र भाषा' हिन्दी सीखना महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में ज्यादातर लोग यह भाषा बोलते हैं. उन्होंने 'मातृभाषा' को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया और कहा कि दुखद है कि देश में अंग्रेजी को बहुत ज्यादा महत्व दिया गया.' इसको लेकर विपक्ष ने उनकी आलोचना की है.
विपक्षी नेताओं ने निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय संविधान किसी भी भाषा को 'राष्ट्रीय' करार नहीं देता. इसके अनुच्छेद 343 के अनुसार हिंदी और अंग्रेजी को आधिकारिक भाषाओं का दर्जा प्राप्त है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर कहा, 'हमें कब राष्ट्र भाषा मिल गई?'
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट किया...
नायडू अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे जहां उन्होंने अंग्रेजी में 100 खंडों वाला गांधी वांग्मय आश्रम को भेंट किया. नायडू ने कहा, ''राष्ट्र भाषा के रूप में हिन्दी बहुत महत्वपूर्ण है, इसके बिना हमारा काम नहीं चल सकता. हमारे देश में अधिकतर लोग हिन्दी बोलते हैं, ऐसे में हिन्दी सीखना भी महत्वपूर्ण है. लेकिन हमें गुजराती, मराठी, भोजपुरी जैसी अपनी मातृभाषा में भी धाराप्रवाह होना चाहिए.'' नायडू ने कहा, 'हमें इन्हे (इन खंडों को) सभी भारतीय भाषाओं में लाना चाहिए. मैं उन्हें क्षेत्रीय भाषा नहीं बोल रहा हूं क्योंकि वे मातृभाषाएं और राष्ट्रीय भाषाएं हैं. क्योंकि अंग्रेजी इसके बाद आती है. हिंदी बाद में राष्ट्रभाषा बन गई.''
उन्होंने कहा, ''लेकिन मूल भाषाएं बंग्ला, मराठी, गुजराती, तमिल हैं. भाषा और भावना साथ चलती है. अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए भाषा बहुत जरूरी है. इसलिए लोग अपनी मातृभाषा में पढ़ें, ये बहुत जरूरी है.'' नायडू ने कहा, ''मैं चाहता हूं कि हमारी शिक्षा नीति में हमें विचार करना चाहिए (मातृभाषा को बढ़ावा देने पर). यह हमारा दुर्भाग्य है कि हमने अंग्रेजी माध्यम को बहुत ज्यादा महत्व दिया. धीरे-धीरे अंग्रेजी सीखते सीखते हमारे अंदर अंग्रेजी मानसिकता भी आ गयी. ये अच्छा नहीं है, देशहित में नहीं है.''
(इनपुट भाषा से...)
विपक्षी नेताओं ने निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय संविधान किसी भी भाषा को 'राष्ट्रीय' करार नहीं देता. इसके अनुच्छेद 343 के अनुसार हिंदी और अंग्रेजी को आधिकारिक भाषाओं का दर्जा प्राप्त है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर कहा, 'हमें कब राष्ट्र भाषा मिल गई?'
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट किया...
Hindi is NOT our national language. It is India's most widely-spoken language& useful to know. But it cannot&should not be imposed on anyone https://t.co/WA9VKDa8b8
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) June 24, 2017
नायडू अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे जहां उन्होंने अंग्रेजी में 100 खंडों वाला गांधी वांग्मय आश्रम को भेंट किया. नायडू ने कहा, ''राष्ट्र भाषा के रूप में हिन्दी बहुत महत्वपूर्ण है, इसके बिना हमारा काम नहीं चल सकता. हमारे देश में अधिकतर लोग हिन्दी बोलते हैं, ऐसे में हिन्दी सीखना भी महत्वपूर्ण है. लेकिन हमें गुजराती, मराठी, भोजपुरी जैसी अपनी मातृभाषा में भी धाराप्रवाह होना चाहिए.'' नायडू ने कहा, 'हमें इन्हे (इन खंडों को) सभी भारतीय भाषाओं में लाना चाहिए. मैं उन्हें क्षेत्रीय भाषा नहीं बोल रहा हूं क्योंकि वे मातृभाषाएं और राष्ट्रीय भाषाएं हैं. क्योंकि अंग्रेजी इसके बाद आती है. हिंदी बाद में राष्ट्रभाषा बन गई.''
उन्होंने कहा, ''लेकिन मूल भाषाएं बंग्ला, मराठी, गुजराती, तमिल हैं. भाषा और भावना साथ चलती है. अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए भाषा बहुत जरूरी है. इसलिए लोग अपनी मातृभाषा में पढ़ें, ये बहुत जरूरी है.'' नायडू ने कहा, ''मैं चाहता हूं कि हमारी शिक्षा नीति में हमें विचार करना चाहिए (मातृभाषा को बढ़ावा देने पर). यह हमारा दुर्भाग्य है कि हमने अंग्रेजी माध्यम को बहुत ज्यादा महत्व दिया. धीरे-धीरे अंग्रेजी सीखते सीखते हमारे अंदर अंग्रेजी मानसिकता भी आ गयी. ये अच्छा नहीं है, देशहित में नहीं है.''
(इनपुट भाषा से...)
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Venkaiah Naidu, Hindi National Language, English, Shashi Tharoor, Omar Abdullah