चार मई को देश के चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव के नतीजे आए. इसके बाद बीजेपी, कांग्रेस और अभिनेता से नेता बने विजय की टीवीके की जीत की चर्चा हुई. इन चुनाव नतीजों के बाद एक बात की और चर्चा हुई. वह यह थी कि देश में करीब पांच दशक बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी भी राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार नहीं है. लेकिन यह पूरा सच नहीं है. क्योंकि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार के मंत्रिमंडल में कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी (सीएमपी) का एक सदस्य शामिल है. इसका मतलब यह हुआ कि देश में भले ही कोई कम्युनिस्ट सरकार न हो. लेकिन एक कम्युनिस्ट विचारधारा वाला एक मंत्री जरूर है. आइए हम जानते हैं कि केरल सरकार में कौन कम्युनिस्ट मंत्री है और उनका इतिहास क्या है.
कहां से चुनाव जीते हैं सीपी जॉन
केरल में इस साल हुए विधानसभा चुनाव में तिरुवनंतपुरम विधानसभा सीट पर कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी सीपी जॉन जीते हैं. उन्होंने सीपीएम के नेतृत्व वाले गठबंधन यूडीएफ की ओर से समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार सुधीर करमना को करीब 10 हजार वोटों के अंतर से हराया. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के करमना जयन तीसरे स्थान पर रहे.पहली बार चुनाव जीतने वाले जॉन अपनी कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी के इकलौते विधायक हैं. एलडीएफ ने सीएमपी को लड़ने के लिए केवल एक सीट मिली थी. एलडीएफ के डीके सतीशन सरकार में जॉन को महत्वपूर्ण परिवहन विभाग मिला है.
देश में कम्युनिस्ट पार्टी की पहली सरकार भी केरल में ही 1957 में ईएमएस नंबूदरीपाद के नेतृत्व में बनी थी. यह देश में कम्युनिस्टों की पहली चुनी हुई सरकार थी. इसके बाद 1977 में पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में वामपंथी दलों की सरकार बनीं. लेकिन 2011 में पश्चिम बंगाल और 2018 में त्रिपुरा में वामपंथ का किला ढह गया. उसके बाद केवल केरल ही एक ऐसा राज्य था, जहां वामपंथ की सरकार थी, लेकिन इस चुनाव में वामपंथ का यह अंतिम किला भी ढ़ह गया.
किसने बनाई थी कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी
कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी (सीएमपी) की स्थापना एमवी राघवन ने 1986 में सीपीएम से निकाले जाने के बाद की थी. जॉन सीएमपी के चुनाव जीतने वाले दूसरे नेता हैं. उनसे पहले राघवन ने 2001 में त्रिवेंद्र पश्चिम विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. वो भी यूडीएफ सरकार में मंत्री रहे. उनका 2014 में निधन हो गया था.सीएमपी का जॉन ने इससे पहले यूडीएफ में रहते हुए ही 2011 और 2016 का विधानसभा चुनाव कुन्नमकुलम सीट से लड़ा था, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी थी. साल 2011 में तो वे केवल करीब 500 वोट से ही हारे थे.
केरल की नई सरकार ने सोमवार को शपथ ली थी. इसके 19 सदस्यों ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली थी. लेकिन केवल दो सदस्यों ने सत्यनिष्ठा के नाम पर शपथ ली थी. इनमें एक थे जॉन तो दूसरे थे रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के शिबू बेबी जॉन. ईश्वर के नाम पर शपथ न लेकर जॉन ने अपनी कम्युनिस्ट जड़ों का समर्थन किया. इसके बाद जॉन अब देश के किसी भी राज्य में एकमात्र कम्युनिस्ट मंत्री हैं. कानून में स्नातक जॉन ने मलयालम और अंग्रेजी में कई किताबें लिखी हैं.
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