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ड्रोन और साइबर तकनीक से लैस होंगे एनसीसी कैडेट्स, इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर में भी निभाएंगे खास भूमिका

एनसीसी कैडेट्स को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने और भविष्य के भारत के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

ड्रोन और साइबर तकनीक से लैस होंगे एनसीसी कैडेट्स, इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर में भी निभाएंगे खास भूमिका
  • भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर से सीख लेकर हर बटालियन में ड्रोन प्लाटून बनाने पर जोर दिया है
  • नेशनल कैडेट कोर देश के युवाओं को ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की ट्रेनिंग देने के लिए सेंटर स्थापित करेगा
  • एनसीसी के कैडेट्स को ड्रोन उड़ाने, असेंबली, रखरखाव और सुरक्षा नियमों की व्यापक जानकारी दी जाएगी
नई दिल्ली:

पाकिस्तान के खिलाफ़ ऑपरेशन सिंदूर से सबक लेकर भारतीय सेनाओं ने ड्रोन तकनीक पर खास ध्यान देना शुरू किया है. सेना के हर बटालियन में ड्रोन प्लाटून तैयार किया जा रहा है. वही वायुसेना और नौसेना भी इस पर जबरदस्त फ़ोकस कर रही है. लिहाजा इस दिशा में दुनिया का सबसे बड़ा युवा संगठन नेशनल कैडेट कोर भला कहां पीछे रहत. अब इसको लेकर नेशनल कैडेट कोर भी बड़ी तैयारी कर रहा है.

एनसीसी का क्या लक्ष्य

एनसीसी का अहम लक्ष्य है कि देश के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाए. इसके लिए एनसीसी देशभर में चार से पांच रीजनल ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर बनाने जा रही है, जहां कैडेट्स को ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी. दिल्ली में एनसीसी रिपब्लिक डे कैंप-2026 के दौरान एनसीसी के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स के मुताबिक ड्रोन ट्रेनिंग अब एनसीसी के प्रमुख फोकस एरिया में शामिल कर लिया गया है.

जंग में ड्रोन की अहम भूमिका

यह बात किसी से छुपी नही है कि हाल के सैन्य अभियानों में ड्रोन की भूमिका सामने आई है. साथ मे आने वाले दिनों में ड्रोन वॉरफेयर की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है. इसी को देखते हुए यह ट्रेनिंग सेना के सहयोग से दी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित कैडेट्स सेना की मदद कर सकें. ड्रोन टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव के तहत कैडेट्स को ड्रोन उड़ाने के साथ-साथ उसकी असेंबली, रखरखाव और उपयोग की जानकारी दी जाएगी. पहले उन्हें ड्रोन और यूएवी की बुनियादी समझ दी जाएगी, फिर सेफ्टी नियम, उड़ान के सिद्धांत और एयरोडायनामिक्स सिखाए जाएंगे.

साइबर वॉरियर्स तैयार किए जाएंगे

ट्रेनिंग के दौरान कैडेट्स को ड्रोन उड़ाने से पहले सिमुलेटर पर अभ्यास कराया जाएगा. इसके बाद में उनको असली ड्रोन उड़ाने का मौका मिलेगा. इससे कैडेट्स का आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल बढ़ेगा. इतना ही नही एनसीसी डीजी के मुताबिक मौजूदा सुरक्षा जरूरत को देखते हुए ड्रोन के साथ-साथ एनसीसी साइबर सुरक्षा पर भी फोकस कर रही है. सभी 20 लाख कैडेट्स को साइबर से जुड़ी बेसिक ट्रेनिंग दी जाएगी. पहले चरण में 10,000 साइबर वॉरियर्स तैयार किए जाएंगे, जिन्हें देश की पहली साइबर डिफेंस लाइन के रूप में देखा जा रहा है.

इनफॉरमेशन वॉरफेयर में होगी भूमिका

खास ट्रेनिंग के बाद इन्हें एक राष्ट्रीय डेटाबेस से जोड़ा जाएगा, ताकि साइबर खतरे की स्थिति में ये देश की मदद कर सकें. इसके अलावा एनसीसी सूचना युद्ध यानी इनफॉरमेशन वॉरफेयर पर भी काम करेगी. सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और गलत सूचनाओं को रोकने में भी कैडेट्स की भूमिका होगी. इस बार गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेने 2406 कैडेट्स दिल्ली आए हैं. 1948 में जब एनसीसी की शुरुआत हुई तब इसकी संख्या करीब 20 हज़ार थी जो अब बढ़कर करीब 20 लाख तक पहुंच चुकी हैं. इसमें लगभग 40 फीसदी गर्ल्स कैडेट्स है.

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