- इंदौर हाई कोर्ट ने धार भोजशाला को मंदिर घोषित किया है, लेकिन मुस्लिम पक्ष इस फैसले को स्वीकार नहीं कर रहा है
- मुस्लिम स्कॉलर हाफिज गुलाम सरवर ने मुस्लिमों को सुप्रीम कोर्ट में मामला न ले जाने की सलाह दी है
- सरवर ने कहा कि ASI ने अपना काम किया है और हाई कोर्ट का फैसला अंतिम माना जाना चाहिए
धार भोजशाला को इंदौर हाई कोर्ट ने मंदिर करार दे दिया है. लेकिन मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट के इस फैसले को मानने को तैयार नहीं है. मुस्लिम पक्ष अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रहा है. लेकिन इस बीच NDTV के शो की एक डिबेट के दौरान मुस्लिम स्कॉलर हाफिज गुलाम सरवर ने मुस्लिमों को सलाह दी है कि भोजशाला के मामले को सुप्रीम कोर्ट में लेकर ना जाएं. मुसलमान पक्ष भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट जाकर वक्त बर्बाद ना करे. आखिर मुस्लिम स्कॉलर हाफिज गुलाम सरवर ने ऐसा क्यों कहा?
ASI अपना काम कर चुकी है, कोर्ट अपना फैसला सुना चुका
भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले पर मुस्लिम स्कॉलर हाफिज गुलाम सरवर ने कहा, "भोजशाला मंदिर था या मस्जिद है, ये सब चीजें अब मायने नहीं रखती हैं. जहां ASI अपना काम कर चुकी है, कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है. इसके अलावा भी तमाम चीजें हो चुकी हैं. अब अगर मैं उस दीवार को देखकर कहूं कि ये मंदिर है या मस्जिद, मुझे लगता है कि मेरा कद ऐसा है भी नहीं. मैं अब इसमें ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहता हूं. सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं. मैं मुस्लिम स्कॉलर हूं, तो अपने समाज को एक सलाह देना चाहता हूं. कई मुस्लिम नेता कह रहे हैं कि वे भोजशाला के मामले को लेकर सुप्रीम जाएंगे. लेकिन मेरी सलाह है कि सुप्रीम कोर्ट मत जाइए. कोर्ट का वक्त बर्बाद ना करें. सुप्रीम कोर्ट के पास बहुत काम है. देश के सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं."
मंदिर-मस्जिद की लड़ाई को कोर्ट में ले जाकर समय बर्बाद ना करें
हाफिज गुलाम सरवर ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने देश के बेरोजगारों को लेकर ऐसी टिप्पणी है, जिससे पता चलता है कि बेरोजगारी बेशुमार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान युद्ध के बीच देश के लोगों को पेट्रोल डीजल को लेकर बहुत सलाह दी हैं. ऐसे में हम मंदिर-मस्जिद की लड़ाई को कोर्ट में ले जाकर समय बर्बाद करें, ऐसा नहीं होना चाहिए. देश का समय और पैसा बचना चाहिए."
सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे... हमारे पास मौका
हमारे पास मौका
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यह मामला बहुत पुराना है और काफी समय से इस पर विवाद चल रहा था. जब से यह एएसआई के हाथ में गया है, तब से ही विवाद चल रहा है. आज हाई कोर्ट का एक फैसला आया है, जिसने एएसआई को आधार मानकर दूसरे पक्ष को दे दिया है. उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे. हम भी सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, हमारे पास मौका है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आने तक प्रशासन को इसे किसी और को नहीं सौंपना चाहिए. मुस्लिम समुदाय सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद को लेकर बड़ा दिल दिखा चुका है.
हमें उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा
वहीं, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम समुदाय के लोगों में मायूसी पैदा हुई है. लेकिन, हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता है. हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा. कोर्ट के फैसले की हम सभी इज्जत करते हैं.
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सच्चा मुसलमान विवादित जगह पर नमाज नहीं पढ़ेगा
भारतीय सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने कहा कि ये विवाद बहुत पुराना है. देश के मुसलमानों को बताना चाहता हूं कि वहां जुमे के दिन ही नमाज होती है और मंगलवार को पूजा होती थी. जुमे के दिन मूर्तियां हटाकर सफाई करके नमाज होती थी. उन्होंने कहा कि सच्चा मुसलमान विवादित जगह पर नमाज नहीं पढ़ेगा. लड़ाई लड़ी जा रही थी. कोर्ट का फैसला आ गया है. बाबरी मस्जिद फैसले की तरह हमें इसे भी अपनाना चाहिए. कोर्ट के खिलाफ बयानबाजी नहीं करनी चाहिए. देश के मुसलमानों से अपील है कि राजनीतिक लोगों के बहकावे में न आएं. अगर कोई कार्रवाई करनी है तो सुप्रीम कोर्ट जाएं.
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