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This Article is From Jul 14, 2022

"समाज में फिर वैसा तनाव नहीं होना चाहिए...", प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के समर्थन में SC पहुंचा मुस्लिम संगठन

मुस्लिम संगठन की ओर से कहा गया कि बाबरी विध्वंस के बाद समाज में जिस तरह तनाव हुआ था, वो दोबारा न हो इस लिए कानून बनाया गया था. इसलिए इस कानून को रद्द नहीं किया जाना चाहिए.

"समाज में फिर वैसा तनाव नहीं होना चाहिए...", प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के समर्थन में SC पहुंचा मुस्लिम संगठन
नई दिल्ली:

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट( पूजा स्थल कानून) के विरोध के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. विवादों के बीच बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इस कानून का समर्थन किया है और एक्ट के खिलाफ दाखिल याचिकाओं में पक्षकार बनने की मांग की है. उनकी ओर से कहा गया कि बाबरी विध्वंस के बाद समाज में जिस तरह तनाव हुआ था, वो दोबारा न हो इस लिए कानून बनाया गया था. इसलिए इस कानून को रद्द नहीं किया जाना चाहिए. वर्शिप एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 8 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं. 

संबंधित मुद्दों को चुनिंदा रूप से करती है लक्षित

AIMPLB ने अपनी अर्जी में कहा, " जमीन पर नफरत की राजनीति को बढ़ावा देने के लिए ऐसे मामलों की लंबितता का उपयोग करने के इरादे से जनहित याचिका दायर करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. याचिकाकर्ता मुसलमानों की वर्तमान पीढ़ी से बदला ले रहे हैं, जिन्होंने अतीत में हिंदुओं का कथित अपमान करने में कोई भूमिका नहीं निभाई थी. जनहित याचिका एक विशेष अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित मुद्दों को चुनिंदा रूप से लक्षित करती है."

अर्जी में कहा गया, " विभिन्न समुदायों के बीच पूजा स्थल से संबंधित कोई भी विवाद अत्यंत संवेदनशील है. इस तरह के विवाद सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन को खतरे में डालते हैं और समाज की शांति और व्यवस्था को भंग करते हैं. साथ ही धर्म के आधार पर लोगों का ध्रुवीकरण कर समाज के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ देते हैं."

राज्य द्वारा समान रूप से व्यवहार किया जाए

मुस्लिम संगठन ने कगा, " बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद भड़के विवाद के बाद हमारे देश ने खून-खराबा देखा है. याचिकाकर्ता जो अधिनियम को चुनौती दे रहे हैं, उनकी प्राथमिकता  राजनीतिक एजेंडा है. इस तरह की याचिकाएं मौलिक अधिकारों के कथित उल्लंघन के दावे को हल करने के बजाय केवल जमीनी स्तर पर समस्याएं पैदा करेंगी. 1991 का पूजा स्थल कानून भारतीय राजनीति के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को ध्यान में रखते हुए एक प्रगतिशील कानून है. कानून प्रत्येक धार्मिक समूह के अधिकार के बारे में है कि राज्य द्वारा समान रूप से व्यवहार किया जाए. यह कानून राज्य को विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच तनाव के मामले में परोपकारी और तटस्थ के रूप में अपने कार्यों को करने का आदेश देता है."

क्यों बनाया गया था प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट?

दरअसल, देश की तत्कालीन नरसिंम्हा राव सरकार ने 1991 में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्टयानी उपासना स्थल कानून बनाया था. कानून लाने का मकसद अयोध्या रामजन्मभूमि आंदोलन की बढ़ती तीव्रता और उग्रता को शांत करना था. सरकार ने कानून में यह प्रावधान कर दिया कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद के सिवा देश की किसी भी अन्य जगह पर किसी भी पूजा स्थल पर दूसरे धर्म के लोगों के दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा. 

कानून में कहा गया कि देश की आजादी के दिन यानी 15 अगस्त, 1947 को कोई धार्मिक ढांचा या पूजा स्थल जहां, जिस रूप में भी था, उन पर दूसरे धर्म के लोग दावा नहीं कर पाएंगे. इस कानून से अयोध्या की बाबरी मस्जिद को अलग कर दिया गया या इसे अपवाद बना दिया गया, क्योंकि ये विवाद आजादी से पहले से अदालतों में विचाराधीन था. इस एक्टमें कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था वो आज और भविष्य में, भी उसी का रहेगा. हालांकि, अयोध्या विवाद को इससे बाहर रखा गया क्योंकि उस पर कानूनी विवाद पहले का चल रहा था.

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