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Twisha Sharma: हम डर के साए में हैं, न्याय की उम्मीद भी खत्म; बेटी की मौत से टूटे ट्वीशा के परिवार ने NDTV को क्या बताया?

Twisha Sharma Death News: मृतका के पिता नवनीधि शर्मा और रिश्तेदार आशीष शर्मा ने आरोप लगाया है कि उन्हें बेटी की मौत की जानकारी मिलने के बाद जब वे भोपाल पहुंचे, तब से वे न्याय पाने के लिए लगातार इधर‑उधर भटक रहे हैं.

twisha sharma news
  • भोपाल में 33 वर्षीय शादीशुदा महिला ट्वीशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी
  • मृतका के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए, लेकिन एफआईआर दर्ज करने में पुलिस ने तीन दिन तक देरी की
  • परिवार ने न्यायिक कार्यवाही में असभ्य व्यवहार और कोर्ट के बार-बार बदलने पर सवाल उठाए, सुरक्षा के अभाव की बात
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नई दिल्ली/नोएडा:

Twisha Sharma Death News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 33 साल की शादीशुदा महिला ट्वीशा शर्मा  की उनके पति के घर में संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. त्विशा शर्मा 12 मई को अपने पति समर्थ सिंह के घर पर मृत पाई गईं, जो पेशे से वकील हैं. ट्वीशा शर्मा  के परिवार का आरोप है कि उनकी मौत के बाद ससुराल वाले अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल कर न्याय प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं. मृतका के परिवार का कहना है कि अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल कर न्याय प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है.

त्विशा के परिवार की एनडीटीवी से खास बातचीत 

मृतका के पिता नवनीधि शर्मा और रिश्तेदार आशीष शर्मा ने आरोप लगाया है कि उन्हें बेटी की मौत की जानकारी मिलने के बाद जब वे भोपाल पहुंचे, तब से वे न्याय पाने के लिए लगातार इधर‑उधर भटक रहे हैं.  आशीष शर्मा ने NDTV से बातचीत में कहा कि जैसे ही हमें पता चला कि हमारी बेटी अब नहीं रही, हम तुरंत दिल्ली और अजमेर से यहां भोपाल के लिए निकल पड़े.यहां आने के बाद हमने जो कुछ भी देखा, वह सिर्फ डरावना और झकझोर देने वाला था. उन्होंने आगे कहा, “जब हमने अपनी बहन का शव देखा, तो उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे. इसके बावजूद, मामले को लेकर लगातार इनकार किया गया, और पुलिस की ओर से भी एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल की जाती रही.हमारा पूरा परिवार न्याय के लिए भटकता रहा, कभी एक थाने, कभी दूसरे थाने, कभी महिला आयोग, महिला थाना, कभी मानवाधिकार आयोग और पुलिस कमिश्नर के कार्यालय तक. हमें हर जगह भटकना पड़ा, लेकिन हमें कहीं से तत्काल न्याय नहीं मिला.”

क्या वजह है कि कोर्ट बदल देते हैं, FIR में भी लापरवाही

आशीष शर्मा ने कहा कि “तीन दिन बाद जाकर 15 मई को रात 2:30 बजे, एफआईआर दर्ज की गई और वह भी बहुत लापरवाही और औपचारिक तरीके से.इसके बाद हमने देखा कि जमानत लगभग बिना किसी गंभीर विरोध के दे दी गई और न्यायिक कार्यवाही पर अनावश्यक दबाव के बीच जज के चैंबर में सुनवाई हुई. वहीं बाहर परिवार के साथ असभ्य व्यवहार (heckling) भी किया गया. उन्होंने आगे सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि कोर्ट बार‑बार बदली जा रही है.एक बार नहीं, दो बार नहीं,बल्कि तीन‑चार बार एक ही दिन में (सुबह 9:30 से शाम 5 बजे तक)? इसके पीछे कोई न कोई वजह जरूर होगी.क्या हमने कोई अपराध किया है?”

आशीष शर्मा ने खास बातचीत में बताया कि जज के चैंबर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी, जो हमारे साथ अभद्र व्यवहार कर रही थी. यहां तक कि परिवार की महिला सदस्यों के साथ भी बदसलूकी की गई.शोक में डूबी मां तक पर टिप्पणी की गई कि ‘बेटियां पैसे के लिए ऐसा कर रही हैं', जैसी **असंवेदनशील बातें कही गईं.” उन्होंने आगे कहा, “हमें असली सुरक्षा तब महसूस हुई, जब भारतीय सेना ने हमारी मदद की और हमें सुरक्षा घेरा (cordon) दिया और हमारी कल्पना से भी परे, ऐसी स्थिति में जमानत भी दे दी गई.”

परिवार का दावा: पहले से थीं परेशानियां

जब यह पूछा गया कि क्या ट्वीशा शर्मा ने पहले कभी अपनी स्थिति के बारे में बताया था, तो उनके पिता नवनीधि शर्मा ने कहा, ट्वीशा शर्मा ने कई बार संकेत दिए थे कि वह खुश नहीं थी और किसी तरह की परेशानी में थी.

पीड़िता के पिता नवनीधि शर्मा ने कहा, “एक पिता होने के नाते मैं जानता हूं कि बेटी किसी के पास तभी मदद के लिए जाती है जब वह बेहद मुश्किल स्थिति में हो. वह कई बार संकेत दे चुकी थी कि पापा, अगर यहां सब ठीक नहीं हुआ तो मैं वापस आना चाहती हूं. मैं उनके साथ नहीं रहना चाहती.' मैंने उसे कहा था कि गलत फैसले हो जाते हैं, तुम जब चाहो वापस आ सकती हो.उसने वापस आने के लिए टिकट भी बुक कर ली थी, लेकिन उन्हें जबरन रद्द करवा दिया गया. हमने भी उसे लेने के लिए टिकट बुक की थी, वह भी रद्द कर दी गई.”

हत्या का आरोप और न्याय प्रक्रिया पर सवाल

नवनीधि शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह सीधे‑सीधे एक क्रूर हत्या है.मैं खुले तौर पर कहना चाहता हूं कि उनका एक करीबी रिश्तेदार लोकायुक्त (न्यायमूर्ति सत्येंद्र सिंह) हैं. ऐसे में उनके खिलाफ कौन खड़ा होगा? पूरी स्थिति अब साफ दिख रही है कोई नहीं खड़ा है. उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपनी बेटी के शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की, लेकिन मुझ पर शव जल्दी लेने और अंतिम संस्कार करने का दबाव डाला गया, ताकि सच सामने न आए. कल कमिश्नर ने पोस्टमार्टम की अनुमति दी, लेकिन बाद में कहा गया कि इसके लिए न्यायपालिका से अनुमति लेनी होगी. यह सब केवल देरी करने की रणनीति है, ताकि हमें फिर से इधर‑उधर भटकाया जा सके.”

परिवार का भरोसा टूटा, SIT जांच तेज

पीड़िता के पिता नवनीधि शर्मा ने कहा, “हमें न्याय मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष का एक करीबी रिश्तेदार लोकायुक्त है और उनके कई लोग प्रशासन में भी हैं, ऐसे में मदद मिलना मुश्किल है. उन्होंने कहा, “पुलिस न्यायपालिका के अधीन है और न्याय भी वहीं से मिलता है.ऐसे में इतने प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ कौन खड़ा होगा? यह स्थिति बेहद चिंताजनक है.” इन आरोपों के बीच पुलिस ने 6 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो दहेज उत्पीड़न और संदिग्ध मौत के आरोपों की जांच करेगा. इस मामले में पति समर्थ सिंह (वकील) और ससुर गिरिबाला सिंह (सेवानिवृत्त न्यायाधीश) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. 

एसआईटी प्रमुख और एसीपी रजनीश कश्यप ने बताया कि मुख्य आरोपी समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं. उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दहेज मृत्यु और उत्पीड़न से जुड़े प्रावधानों में आरोपी बनाया गया है. पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं.

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