Manipur Doctor Saves Life in Flight: कहते हैं कि धरती पर डॉक्टर भगवान का ही रूप होते हैं, और टोक्यो से नई दिल्ली की उड़ान भर रही एयर इंडिया की फ्लाइट में यह कहावत हकीकत में बदल गई. सफर के दौरान जब 21 साल की एक युवती की सांसें उखड़ने लगीं और जान पर बन आई, तब उसी विमान में सवार डॉ. लोनी लिरिना एक 'देवदूत' बनकर सामने आईं. जैसे ही बीच आसमान में जब मेडिकल इमरजेंसी की घोषणा हुई, तो डॉ. लिरिना ने बिना एक पल गंवाए कमान संभाली. उन्होंने युवती को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
मुख्यमंत्री ने की सराहना
उनकी इस बहादुरी और पेशेवर ईमानदारी की जमकर तारीफ की मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंहने की. उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि डॉ. लोनी लिरिना का यह कार्य कौशल और मानवता का बेजोड़ उदाहरण है. उनकी त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक जान बचाई, बल्कि मेडिकल पेशे के सबसे ऊंचे आदर्शों को भी प्रस्तुत किया है. मणिपुर को अपनी इस बेटी पर गर्व है.
सीएम की पोस्ट
मणिपुर की रहने वाली है डॉ लोनी लिरिना
डॉ लोनी लिरिना मणिपुर के सेनापति जिले की रहने वाली है. वह इंफाल के अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टीट्यूट, बबीना स्पेशलिटी हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट के पद पर काम करती है. वह उस समय टोक्यो से नई दिल्ली जा रही फ़्लाइट में सफर कर रही थीं. उड़ान के दौरान एक युवा महिला यात्री को अचानक सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगी और फ्लाइट क्रू ने मेडिकल मदद के लिए अनाउंसमेंट किया.इसके तुरंत बाद, डॉ. लिरिना ने बिना देर किए मदद के लिए आगे आईं.
30 मिनट के अंदर बचाई महिला की जान
डॉ. लिरिना ने जांच करने पर बताया कि मरीज को तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट, नेबुलाइजेशन और जरूरी दवाएं देने की सलाह दी, ताकि उसकी हालत स्थिर हो सके. डॉक्टर की सलाह पर तेजी और सही तरीके से अमल में लाने पर महिला की हालत 30 मिनट के अंदर ही काफ़ी बेहतर हो गई. तुरंत उचित देखभाल मिलने के बाद फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग की भी जरूरत नहीं पड़ी. फ़्लाइट सुरक्षित रूप से नई दिल्ली में लैंड हुई. महिला यात्री की हालत स्थिर बताई जा रही है.
यात्री का बचपन का अस्थमा बना था मुसीबत
डॉ. लिरिना के अनुसार, युवती को बचपन से ही अस्थमा की शिकायत थी, लेकिन वह पिछले कई सालों से कोई दवा नहीं ले रही थी. उन्होंने आगे बताया कि जांच करने पर पता चला कि मरीज को सांस लेने में बहुत ज़्यादा तकलीफ हो रही थी,उसकी दिल की धड़कन 160 बीट्स प्रति मिनट से भी ज़्यादा थी, ब्लड प्रेशर कम था, और ऑक्सीजन सैचुरेशन (ऑक्सीजन का स्तर) सिर्फ 80 प्रतिशत था. ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण उसे गंभीर अटैक आया था.दवा देने के बाद उसकी हालत स्थिर हो गई थी.
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