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ममता बनर्जी ने आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत बढ़ाने को बताया 'आतंकवाद', कहा- जेन जी का हो रहा है उत्पीड़न

दिल्ली के एक विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने सोमवार को सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी थी. ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को राज्य प्रायोजित आतंकवाद की कार्रवाई बताया है.

ममता बनर्जी ने आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत बढ़ाने को बताया 'आतंकवाद', कहा- जेन जी का हो रहा है उत्पीड़न
नई दिल्ली:

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत बढाए जाने की निंदा की है. उन्होंने इसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद और पुलिस प्रायोजित अत्याचार बताया है. उनका कहना है कि यह सब लंबे समय तक नहीं चल सकता है. उन्होंने कहा है कि अगर आप लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, तो आशुतोष और सौरव को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए.

आशुतोष रांका और सौरव दास ने 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन किया था और राष्ट्रीय ध्वज फहराया था. इसके बाद पुलिस ने निजी परिसर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से घुसने और शांति बनाए रखने के बॉण्ड का उल्लंघन करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. एक विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.दोनों को सोमवार को मंदिर मार्ग थाने में एक नए नियुक्त विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने दोनों को दो और दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया.  

ममता बनर्जी ने कहा क्या है

विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के इस आदेश के बाद ममता बनर्जी ने यह टिप्पणी की है. उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर  लिखा,''आशुतोष और सौरव की हिरासत बढ़ाने के पीछे की हताशा को मैं समझ सकती हूं. यह एक खतरनाक वायरस है, जिसका इस्तेमाल लोकतंत्र पर हमला करने के लिए रोज किया जा रहा है. जेन-जी के लड़के-लड़कियों को प्रताड़ित करना बंद कीजिए. आज जो लोग सत्ता में हैं, वे कल सत्ता में नहीं होंगे. कोलकाता से दिल्ली और मुंबई तक, पूरे देश में अत्याचार अपने अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है. जब हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई थी, तब उन्हें भी अत्याचारों का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद उन्होंने दृढ़ विश्वास और बहादुरी के साथ संघर्ष किया था.मैं साफ शब्दों में कहना चाहती हूं कि यह राज्य प्रायोजित आतंकवाद है. यह पुलिस प्रायोजित अत्याचार है. यह सब लंबे समय तक नहीं चल सकता. जब दृढ़ विश्वास रखने वाले लोग भारत और लोकतंत्र को बचाने के लिए मजबूती से खड़े रहते हैं, तभी सरकार में बैठे अहंकारी और आंखों पर पट्टी बांधे राजनेताओं की आंखें खुलती हैं. लेकिन तब तक जनता जीत चुकी होगी और लोकतंत्र की हत्या करने वाले लोगों का राजनीतिक अंत हो चुका होगा. अगर आप लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, तो आशुतोष और सौरव को तुरंत रिहा कीजिए.

जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन

सीजेपी ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 10 अक्टूबर को आंदोलन की घोषणा की थी. लेकिन पुलिस ने उसके नेता अभिजीत दीपके,आशुतोष रांका और सौरव दास को उस समय हिरासत में ले लिया था, जब उनका विमान मुंबई से दिल्ली पहुंचा था. इन नेताओं को एक बॉड भरने के बाद रिहा कर दिया गया था. इसके बाद से सरकार ने जंतर-मंतर को डिनोटिफाई करते हुए वहां धरना-प्रदर्शन को प्रतिबंधित कर दिया था. इस आदेश का उल्लंघन करने के लिए सीजेपी नेता अपने कुछ साथियों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे. इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था. 

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