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जापान, भारत और जर्मनी.. यह बस तस्वीर नहीं, दोस्ती की सबसे पुरानी कहानी है

India-Germany Relations: भारत और जर्मनी के बीच संबंधों का इतिहास सदियों पुराना है, जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तरों पर गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं. 17वीं शताब्दी से ही भारत और जर्मनी के बीच व्यापारिक संबंध रहे हैं.

जापान, भारत और जर्मनी..  यह बस तस्वीर नहीं, दोस्ती की सबसे पुरानी कहानी है
50th G7 summit: भारत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी को राजनयिक रूप से मान्यता देने वाला पहला देश था...
नई दिल्‍ली:

Japan, India and Germany Relations: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को इटली के दक्षिणी शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, जापानी प्रधानमंत्री फूमिओ किशिदा,  जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सहित कई विश्व नेताओं से मुलाकात की. इस दौरान की एक फोटो ने लोगों का खास ध्‍यान खींचा. इस फोटो में जापान के प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ बात करते हुए नजर आ रहे हैं. यह तस्‍वीर भारत, जापान और जर्मनी के घनिष्‍ठ संबंधों की की कहानी बयां करती है. भारत, जापान और जर्मनी के रिश्‍ते लंबे और मजबूत हैं, जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तरों पर गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं. जापान और जर्मनी के मुश्किल दौर में भारत ने कभी इन देशों का साथ नहीं छोड़ा. वहीं, जापान और जर्मनी ने भी भारत का पूरा साथ दिया है.

तस्‍वीर में बाएं से, जापान के पीएम फुमियो किशिदा, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ नजर आ रहे हैं. इस फोटो में जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ कुछ कहते हुए नजर आ रहे हैं. इसके बाद पीएम मोदी  और जापान के पीएम फुमियो किशिदा बड़ी हैरानी की मुद्रा में नजर आ रहे हैं. बता दें कि भारत, जापान और जर्मनी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बीते कई सालों से लगातार मजबूत हो रहे हैं. 

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भारत और जर्मनी के बीच सदियों पुराने संबंध 

भारत और जर्मनी के बीच संबंधों का इतिहास सदियों पुराना है, जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तरों पर गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं. भारत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी को राजनयिक रूप से मान्यता देने वाला पहला देश था. 17वीं शताब्दी से ही भारत और जर्मनी के बीच व्यापारिक संबंध रहे हैं. 19वीं शताब्दी में जर्मनी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया था. इस दौरान काफी मदद भी जर्मनी की ओर से की गई थी. वहीं, दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान सदियों से होता रहा है. जर्मनी में भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत के प्रति गहरी रुचि है. भारत में भी जर्मन भाषा और संस्कृति के प्रति काफी उत्साह है. 

भारत-जापान में रणनीतिक साझेदारी

भारत और जर्मनी के बीच मजबूत आर्थिक संबंध हैं. जर्मनी भारत में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक है. दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश लगातार बढ़ रहा है. हाल के वर्षों में भारत और जर्मनी के बीच संबंधों में और भी मजबूती आई है. साल 2015 में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किये. वहीं, 
2021 में जर्मन राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर ने भारत का दौरा किया था. भारत और जर्मनी कई वैश्विक मुद्दों जैसे, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद का मुकाबला, विकास पर भी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं. भारत और जर्मनी की दोस्ती मजबूत और बढ़ती जा रही है. दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध मजबूत हैं. 


भारत-जापान के बीच बहुआयामी साझेदारी

भारत और जापान के बीच संबंध 70 सालों से अधिक पुराने हैं, और यह एक मजबूत और बहुआयामी साझेदारी में विकसित हुए हैं. जापान की ओर से भारत के कई बड़े प्रोजेक्‍ट्स में भारी निवेश किया गया है. बुलेट ट्रेन इन्‍हीं में से एक है. 1950 के दशक में भारत और जापान ने शांति और सहयोग के पांच सिद्धांतों पर हस्ताक्षर किए, जो उनके संबंधों की आधारशिला बने. शांति और सहयोग के पांच सिद्धांत भारत और जापान के बीच संबंधों की एक मजबूत नींव प्रदान करते हैं. वे दोनों देशों और उनके लोगों के लिए समृद्धि और विकास का वादा करते हैं. दरअसल, जापान ने भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में. दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में सहयोग करते हैं. 

भारत और जापान में शांति-सहयोग के 5 सिद्धांत

  1. राष्ट्रीय स्वतंत्रता और संप्रभुता का सम्मान: दोनों देश एक-दूसरे की राष्ट्रीय स्वतंत्रता और संप्रभुता का सम्मान करते हैं और एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते हैं.
  2. हिंसा का त्याग: भारत और जापान दोनों देश किसी भी विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने और बल या हिंसा का उपयोग करने से बचने के लिए काम करते हैं.
  3. समानता और पारस्परिक लाभ: जापान और भारत समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर अपने संबंधों को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
  4. सांस्कृतिक आदान-प्रदान: भारत-जापान दोनों देश कला, संस्कृति, शिक्षा और युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से अपने लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयासरत रहते हैं. 
  5. अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग: दोनों देश अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

मिलकर काम करते रहे हैं भारत-जापान

भारत और जापान महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं. जापान भारत में सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है. दोनों देश आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए कई पहलों पर काम कर रहे हैं, जैसे कि दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा और जापान-भारत आर्थिक सहयोग समझौता (EPA). भारत और जापान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते हैं. दोनों देश नौसेना अभ्यास में भाग लेते हैं और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. हाल के वर्षों में भारत-जापान संबंधों में और भी मजबूती आई है. ये जी7 समिट में भी देखने को मिला.  भारत और जापान के बीच समृद्ध सांस्कृतिक संबंध भी हैं, क्‍योंकि दोनों देशों में बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव है. कला, संस्कृति, शिक्षा और युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से लोगों के बीच संबंध मजबूत होते जा रहे हैं.

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