- कश्मीर में धर्म पूछकर फिर से हत्या की घटना सामने आई है. पिछले तीन सालों में ऐसी तीसरी घटना हुई है.
- दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने 2 मजदूरों को उनका धर्म पूछकर मारा गया है.
- दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे. जो यहां ईंट भट्टे पर काम करने आए थे.
जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर धर्म पूछकर टारगेट किलिंग हुई है. दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में 2 हिंदू मजदूरों को गोली मार दी. यह घटना 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की तर्ज पर हुई है. तब भी 26 पर्यटकों को आंतकियों ने उनका धर्म पूछकर मारा था. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पिछले तीन सालों में यह तीसरी बार है जब आतंकियों ने इसी खौफनाक पैटर्न को दोहराते हुए कश्मीर में लोगों को निशाना बनाया है. इस टारगेट किलिंग का मकसद घाटी में खौफ का माहौल पैदा करने और बाहरी राज्यों से आए लोगों को डराना माना जा रहा है. कुलगाम में मारे गए दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे, जो यहां मजदूरी करने आए थे.
कुलगाम में 2 मजदूरों को मारा
31 जुलाई 2026 की रात कश्मीर के कुलगाम जिले के केलाम इलाके में ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों की हत्या धर्म पूछकर की गई है. आतंकी मजदूरों के कमरें में घुसे और सभी को बाहर निकालकर एक कतार में खड़ा कर दिया. इसके बाद आतंकियों ने उनका नाम, जाति और धर्म पूछा. दो मजदूरों ने अपना नाम दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना बताया जो छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे. इतना सुनने के बाद दोनों को बाकी लोगों से अलग कर दिया और उन पर करीब 10 राउंड फायरिंग की गई. जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. सूत्रों के मुताबिक इस कायराना हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने ली है. इस घटना के बाद देशभर में हड़कंप मच गया है.
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पहलगाम में 26 पर्यटकों को मारा था
इससे पहले इसी तरह की घटना कश्मीर के पहलगाम में हुई थी. 22 अप्रैल 2025 को बिसारन घाटी में आतंकियों ने वहां घूम रहे निहत्थे पर्यटकों को बंधक बना लिया था. सुरक्षा बलों की जांच में सामने आया था कि आतंकियों ने सभी पर्यटकों के आधार कार्ड और पहचान पत्र चेक किए थे. धर्म पूछकर गैर-मुस्लिम पर्यटकों को एक तरफ खड़ा किया गया और फिर उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दी गईं. इस नरसंहार में 25 भारतीय नागरिकों और 1 नेपाली नागरिक सहित कुल 26 लोगों की जान चली गई थी. इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. इस घटना के बाद ही भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था.
श्रीनगर में हुई थी इसी तरह की घटना
इससे पहले श्रीनगर में भी 2024 में इसी तरह का पैटर्न अपनाते हुए आतंकियों ने पंजाब के दो मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 2024 से 2026 के बीच की इन तीनों घटनाओं में एक ही कॉमन बात रही है. जिसमें आतंकियों ने धर्म पूछकर लोगों को मारा है.
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संजय राउत और जावेद राणा ने उठाए सवाल
वहीं इस घटना के बाद सियासत भी शुरू हो गई है. शिवसेना (उद्धव) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा 'जम्मू-कश्मीर में इस तरह की घटना के लिए केंद्रीय गृह मंत्री जिम्मेदार है.' जबकि जम्मू-कश्मीर सरकार के मंत्री जावेद राणा ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार के पास है. ऐसे में इस घटना के लिए वहीं जिम्मेदार है. हम इसका विरोध करते हैं.' वहीं कुलगाम की इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी जांच के निर्देश दिए हैं. जबकि सेना ने भी अभियान तेज किया है.
फिर आने वाला है 5 अगस्त इसी दिन हटी थी धारा-370
धर्म और पहचान पूछकर की जा रही इन हत्याओं ने सुरक्षा बलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. खास बात यह है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने की वर्षगांठ 5 अगस्त को है. ऐसे में अचानक शुरू हुई टारगेट किलिंग के मामलों को सुरक्षा एजेंसियों ने एक सोची-समझी रणनीतिक साजिश मानी है. जम्मू-कश्मीर में धारा-370 हटने की वर्षगाठ को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है. कुलगाम की घटना के बाद पूरे दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन जारी है.
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