भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' को जल्द लॉन्च करेगा. फिलहाल इसके अलग-अलग चरणों की टेस्टिंग चल रही है. भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO ने गगनयान मिशन को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. इसरो ने बताया है कि उसने गगनयान क्रू मॉड्यूल सिस्टम के तीन बड़े टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं. इसी के साथ भारत गगनयान मिशन को पूरा करने के और करीब पहुंच गया है. हाल ही में इसरो ने मध्यप्रदेश के श्योपुर में मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया. आखिर ये टेस्ट कौन से थे और अब हम अंतरिक्ष में जाने से कितने दूर हैं? आइए पूरी बात बताते हैं.
ISRO ने क्रू मॉड्यूल के कौन से किए टेस्ट?
पहला टेस्ट: क्रू मॉड्यूल का पहला टेस्ट समुद्र में उतरने यानी स्प्लैशडाउन के बाद क्रू मॉड्यूल को सीधी स्थिति में लाने से जुड़ा था, जिसे क्रू की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी माना जाता है. इसके लिए, कोल्ड-गैस पर आधारित एक 'अपराइटिंग सिस्टम'बनाया गया और उसका टेस्ट किया गया. ISRO ने कहा कि क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम (CMUS) के सभी हिस्सों वाला एक सिस्टम-लेवल क्वालिफिकेशन टेस्ट सेटअप तैयार किया गया और प्राइमरी इन्फ्लेशन मॉड्यूल के लिए इन्फ्लेशन टेस्ट सफलतापूर्वक किए गए. इसमें हाई-प्रेशर गैस बोतल में भरी गैस का इस्तेमाल करके कंट्रोल वाल्व चलाकर फ्लोटेशन को फुलाया गया.
दूसरा टेस्ट: इस टेस्ट में 'अम्बिलिकल मैकेनिज्म' यानी जुड़ाव सिस्टम के अलग होने की जांच की गई जो क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के बीच कड़ी का काम करता है. इस मैकेनिज्म के दो हिस्से होते हैं. एक क्रू मॉड्यूल की तरफ होता है जिसे CSU-1 कहते हैं और दूसरा सर्विस मॉड्यूल की तरफ होता है जिसे CSU-2 कहते हैं. क्रू मॉड्यूल के पृथ्वी पर वापस लौटने के चरण के दौरान, CSU-1 के अलग होने के बाद सर्विस मॉड्यूल सबसे पहले क्रू मॉड्यूल से अलग होता है. इसके बाद री-एंट्री से ठीक पहले CSU-2 भी अलग हो जाता है.
तीसरा टेस्ट: इस टेस्ट में 'एपेक्स कवर' के अलग होने की घटना के दौरान क्रू मॉड्यूल की स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी की पुष्टि की गई. एपेक्स कवर मिशन के दौरान पैराशूट और उससे जुड़े सब-सिस्टम की सुरक्षा करता है. क्रू मॉड्यूल की गति कम करने के लिए पैराशूट खोलने से पहले इसे अलग कर दिया जाता है.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मध्य प्रदेश के श्योपुर में गगनयान मिशन के लिए एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप परीक्षण (आईएमएटी) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
— आकाशवाणी समाचार (@AIRNewsHindi) July 8, 2026
यह परीक्षण एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट के ड्रॉप ज़ोन में आयोजित किया गया था।
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श्योपुर में हुआ मुख्य पैराशूट सिस्टम का टेस्ट
हाल ही में मध्य प्रदेश का श्योपुर एक बार फिर देश का सबसे बड़े वैज्ञानिक मिशन का गवाह बना. श्योपुर के एरियल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट यानी एडीआरडीई के ड्रॉप जोन में इसरो ने गगनयान मिशन के मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया है. इस परीक्षण के सफल होने से गगनयान मिशन को नई मजबूती मिली है और अंतरिक्ष में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी का भरोसा भी बढ़ा है.
इस टेस्ट के लिए भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान का उपयोग किया गया. विमान से करीब ढाई किलोमीटर की ऊंचाई पर एक परीक्षण असेंबली को हवा में छोड़ा गया. इस असेंबली में मुख्य पैराशूट और डमी पेलोड लगाया गया था. ताकि वास्तविक परिस्थितियों जैसी स्थिति तैयार की जा सके. जैसे ही असेंबली हवा में छोड़ी गई, सबसे पहले ड्रोग पैराशूट खुला. इसका काम था असेंबली को संतुलित करना और उसकी रफ्तार को नियंत्रित करना. इसके बाद मुख्य पैराशूट सक्रिय हुआ और उसने पूरे पेलोड को सुरक्षित गति के साथ जमीन तक पहुंचाया. पूरा परीक्षण तय मानकों के अनुसार सफल रहा.
इसरो के मुताबिक, इस परीक्षण का मकसद बिना चालक वाले पहले गगनयान मिशन जी1 के दौरान संभावित अधिकतम भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट सिस्टम की मजबूती और उसकी कार्यक्षमता को परखना था. इस सफल परीक्षण से यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि अंतरिक्ष से लौटते समय गगनयान क्रू मॉड्यूल सुरक्षित तरीके से धरती पर उतर सकेगा. यह परीक्षण इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट, यानी आईएमएटी, सीरीज का पांचवां सफल परीक्षण है. इसरो लगातार अलग-अलग परिस्थितियों में पैराशूट सिस्टम की जांच कर रहा है. ताकि मिशन के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी चुनौती का सामना किया जा सके.

गगनयान क्रू मॉड्यूल में 10 पैराशूट
गगनयान क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूट लगाए गए हैं. सभी की जिम्मेदारी अलग-अलग है. कुछ पैराशूट मॉड्यूल के सुरक्षा कवर को अलग करते हैं. कुछ उसकी गति कम करते हैं, कुछ मुख्य पैराशूट को बाहर निकालते हैं और अंत में मुख्य पैराशूट मॉड्यूल को सुरक्षित गति से धरती पर उतारते हैं. यानी पूरी पैराशूट प्रणाली कई चरणों में काम करती है और हर चरण मिशन की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है.
गगनयान मिशन में कितना वक्त बाकी है?
ISRO गगनयान मिशन में जुटा हुआ है. अभी तक इसके सभी टेस्ट तय टाइमलाइन पर ही रहे हैं. हालांकि अभी इस मिशन के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा. चूंकि इस मिशन के तहत पहली बार भारत अपने एस्ट्रोनॉट को स्पेस में भेजेगा, इसलिए इस मिशन में किसी चूक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जा सकती. तय शेड्यूल के अनुसार,
पहला मानव रहित टेस्ट मिशन : इस टेस्ट को इसी साल यानी 2026 में लॉन्च करने की योजना है. इसमें 'व्योममित्र' (Vyommitra) नाम की एक हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा.
दूसरा और तीसरा मानव रहित टेस्ट: यह भी 2026 से 2027 के बीच किए जाएंगे ताकि सभी लाइफ सपोर्ट सिस्टम को जांचा जा सके.
फाइनल मिशन: अंतिम मानवयुक्त मिशन (Gaganyaan-4 / H1) के दौरान भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्पेस में जाएंगे. यह मिशन अगले साल यानी 2027 में प्रस्तावित है.
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