विज्ञापन

साइबर अपराधियों पर इंटरपोल की बड़ी कार्रवाई, 21 देशों से 1462 आरोपी गिरफ्तार, जानिए कैसे चला ऑपरेशन

इंटरपोल ने अफ्रीका में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक के बड़े अभियानों में से एक ऑपरेशन सेरेनगेटी-3 चलाया है. इस ऑपरेशन के तहत 21 देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मिलकर कार्रवाई की है.

साइबर अपराधियों पर इंटरपोल की बड़ी कार्रवाई, 21 देशों से 1462 आरोपी गिरफ्तार, जानिए कैसे चला ऑपरेशन
साइबर अपराधियों पर इंटरपोल की बड़ी कार्रवाई (फाइल फोटो)
  • इंटरपोल ने 21 देशों में ऑपरेशन सेरेनगेटी-3 के तहत 1462 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
  • युगांडा में दो बड़े ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसमें 365 विदेशी नागरिक फर्जी निवेश के आरोपित हैं.
  • अंगोला में अवैध क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग केंद्रों पर छापे में 2000 से अधिक मशीनें और छह ट्रांसफॉर्मर जब्त किए गए

इंटरपोल ने अफ्रीकी देशों में ऑपरेशन सेरेनगेटी-3 चलाया है. जिसमें 1 हजार 462 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 105 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम बरामद की गई है. यह कार्रवाई 21 देशों में एक साथ की गई थी, जिसमें 10 हजार 909 साइबर अपराध नेटवर्क पर शिकंजा कसा गया है, इस नेटवर्क ने 65 हजार 929 लोगों को निशाना बनाया था. शुरुआती वित्तीय जांच में इन अपराधों से 38.5 करोड़ डॉलर से ज्यादा के नुकसान का पता चला है. इस कार्रवाई का मकसद ऑनलाइन ठगी, रैनसमवेयर, फर्जी निवेश योजनाओं, ईमेल के जरिए धोखाधड़ी और डिजिटल माध्यम से की जाने वाली जबरन वसूली जैसे अपराधों पर लगाम लगाना था.

युगांडा में पकड़ा गया ऑनलाइन का बड़ा नेटवर्क

इस ऑपरेशन के दौरान युगांडा में दो बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ. पुलिस ने यहां 365 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. इन पर एशिया के अलग-अलग देशों में लोगों को फर्जी निवेश और पेंशन योजनाओं के नाम पर ठगने से जुड़े होने का संदेह है. जांच में सामने आया कि ये नेटवर्क कॉल सेंटर के जरिए काम करते थे. लोगों को फोन करके निवेश के ऐसे अवसरों का लालच दिया जाता था, जिनका असल में कोई अस्तित्व नहीं था. ठग बाकायदा स्क्रिप्ट के हिसाब से बातचीत करते थे और लोगों का भरोसा जीतने के लिए फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और नकली वेबसाइटों का इस्तेमाल करते थे. खास तौर पर पेंशनधारकों और निवेश करने के इच्छुक लोगों को निशाना बनाया जा रहा था.

10 लाख डॉलर से ज्यादा कमाई

वहीं अंगोला में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने क्रिप्टोकरेंसी की अवैध माइनिंग करने वाले दो केंद्रों का पता लगाया. इस मामले में नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है. मौके से क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग में इस्तेमाल होने वाली 2000 से ज्यादा मशीनें और बिजली को बदलने वाले छह अवैध ट्रांसफॉर्मर स्टेशन जब्त किए गए हैं. इंटरपोल के मुताबिक, जब्त किए गए बिजली संबंधी उपकरणों की कीमत ही 10 लाख डॉलर से ज्यादा है. इस कार्रवाई में अवैध क्रिप्टो माइनिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया.

नाइजीरिया में 21 लाख ईमेल जुटाए

नाइजीरिया में जांच एजेंसियों ने एक ऐसे संदिग्ध को गिरफ्तार किया, जिस पर बड़े स्तर पर फिशिंग और बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज यानी बीईसी ऑपरेशन चलाने का आरोप है. इस तरह की ठगी में अपराधी लोगों या कंपनियों के ईमेल अकाउंट और सॉफ्टवेयर से जुड़ी लॉगिन जानकारी हासिल करके धोखाधड़ी करते हैं. जांच के दौरान करीब 21 लाख ईमेल एड्रेस जुटाए जाने का भी पता चला. इसके अलावा एक लग्जरी गाड़ी बरामद की गई, जिसके अपराध से कमाए गए पैसे से खरीदे जाने का संदेह है. नाइजीरिया में ही एक अलग मामले में मैसेजिंग ऐप के जरिए अंतरराष्ट्रीय निवेश योजना का प्रचार करके लोगों को ठगने वाले नेटवर्क की जांच की गई. इस मामले में एक संदिग्ध गिरफ्तार हुआ. वित्तीय जांच में 24 लाख डॉलर से ज्यादा की संदिग्ध रकम के लेनदेन का पता चला. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस रकम का बड़ा हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए इधर-उधर किया गया था.

अपराधी नेटवर्क कर रहे थे संचालित

तंजानिया में मोबाइल ऐप के जरिए चलाए जा रहे एक अवैध लोन नेटवर्क को निशाना बनाया गया, गैबॉन में सोशल मीडिया के माध्यम से गाड़ियों के आयात के नाम पर ठगी करने वाले नेटवर्क को बाधित किया गया. वहीं, रिपब्लिक ऑफ कांगो में साइबर अपराध से जुड़े एक ऑपरेशन में 30 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया. इंटरपोल की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब उसकी 2026 की अफ्रीकी साइबर थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट में साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ रहा है और डिजिटल माध्यम से होने वाले वित्तीय नुकसान भी बढ़ रहे हैं. ऑपरेशन शुरू होने से पहले 20 अफ्रीकी देशों और अमेरिका के जांच अधिकारियों को संदिग्ध डोमेन, आईपी एड्रेस और उन तकनीकी प्रणालियों से जुड़ी जानकारी दी गई थी, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी अपने नेटवर्क को चलाने और नियंत्रित करने के लिए कर रहे थे.

इस ऑपरेशन में निजी क्षेत्र की साइबर सुरक्षा कंपनियों और संगठनों ने भी मदद की. उन्होंने तकनीकी जानकारी, डिजिटल सबूतों के विश्लेषण और संदिग्ध नेटवर्क की पहचान करने में जांच एजेंसियों का सहयोग किया.

इंटरपोल के साइबर क्राइम निदेशक नील जेटन ने कहा कि साइबर अपराधी देशों की सीमाओं की परवाह किए बिना तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर लोगों को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सेरेनगेटी-3 यह संदेश देता है कि साइबर अपराध भले ही सीमाओं से परे हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए आपराधिक नेटवर्क को तोड़ना, अपराध से कमाई गई रकम बरामद करना और लोगों को डिजिटल ठगी से बचाना संभव है.

इन देशों में हुई कार्रवाई

इस अभियान में अंगोला, बेनिन, कैमरून, कांगो, आइवरी कोस्ट, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इस्वातिनी, गैबॉन, गाम्बिया, घाना, केन्या, मोजाम्बिक, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, युगांडा, अमेरिका, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल थे. इंटरपोल के मुताबिक ऑपरेशन से जुड़ी कई जांच अभी जारी हैं. एजेंसियां अन्य संदिग्धों की पहचान करने, अपराध से कमाई गई रकम का पता लगाने और जब्त किए गए डिजिटल सबूतों का विश्लेषण करने में जुटी हैं. 

ये भी पढ़ेंःदाऊद का खास, इंटरपोल का वांटेड... कौन हैं अख्तर मर्चेंट, जो दिल्ली एयरपोर्ट पर हुआ गिरफ्तार

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Interpol Operation, Interpol Operation On Migrants, Cybercrime Crackdown, Africa News, Interpol News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com