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पहले डॉक्टर, फिर IPS और IAS... अब केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी, बिहार के इन 2 अफसरों का दिलचस्प सफर

डॉ. त्यागराजन एस.एम. और राहुल कुमार को केंद्र सरकार में निदेशक स्तर की जिम्मेदारी मिलना उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है. दोनों अधिकारियों ने बिहार में जिला प्रशासन से लेकर विभिन्न विभागों तक काम करते हुए अनुभव हासिल किया है.

पहले डॉक्टर, फिर IPS और IAS... अब केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी, बिहार के इन 2 अफसरों का दिलचस्प सफर
आईएएस डॉ. त्यागराजन एस.एम. और आईएएस राहुल कुमार
  • बिहार कैडर के IAS अधिकारी डॉ. त्यागराजन और राहुल कुमार को केंद्र सरकार में निदेशक स्तर की जिम्मेदारी मिली है
  • डॉ. त्यागराजन ने मेडिकल की पढ़ाई के बाद IPS और फिर IAS में शामिल होकर बिहार में प्रशासनिक भूमिकाएं निभाई
  • राहुल कुमार को जिला प्रशासन, ग्रामीण आजीविका, वित्त, कला-संस्कृति और ऊर्जा क्षेत्रों में काम करने का व्यापक है
पटना:

बिहार कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. और राहुल कुमार को केंद्र सरकार में निदेशक स्तर की जिम्मेदारी मिली है. डॉ. त्यागराजन एस.एम. को सहकारिता मंत्रालय और राहुल कुमार को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में नियुक्त किया गया है. दोनों अधिकारियों ने बिहार में जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, वित्त और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम किया है. जानिए दोनों अधिकारियों की शिक्षा, करियर और सफलता की पूरी कहानी.

बिहार के इन दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों को केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी प्रशासनिक यात्रा चर्चा में है. भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने के बाद इन दोनों अधिकारियों ने बिहार के अलग-अलग जिलों और विभागों में काम करते हुए कई तरह के प्रशासनिक अनुभव हासिल किए हैं. अब उन्हें केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों में निदेशक के रूप में काम करने का अवसर मिला है.

डॉ. त्यागराजन एस.एम. को केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में निदेशक नियुक्त किया गया है, जबकि राहुल कुमार को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. दोनों अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तारीख से पांच साल या अगले आदेश तक, जो पहले हो, इसके लिए स्वीकृत की गई है.

दोनों अधिकारियों की सफलता की कहानी अलग-अलग है. डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने चिकित्सा की पढ़ाई करने के बाद पुलिस सेवा और फिर IAS तक का सफर तय किया. वहीं, राहुल कुमार ने जिला प्रशासन में काम करने के बाद ग्रामीण आजीविका, वित्त, कला-संस्कृति और ऊर्जा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं.

आइए जानते हैं कि बिहार में प्रशासनिक सेवाएं देने वाले इन दोनों अधिकारियों का सफर कैसा रहा और केंद्र सरकार में मिली नई जिम्मेदारी उनके करियर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है.

  • डॉ. त्यागराजन एस.एम.: MBBS से IPS और फिर IAS तक का सफर
  • नई जिम्मेदारी: निदेशक, सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार
  • बैच: 2011
  • कैडर: बिहार

डॉ. त्यागराजन एस.एम. की प्रशासनिक यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा देने वाली है. उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में पढ़ाई की, लेकिन आगे चलकर सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया. इसके बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होकर अपनी एक अलग पहचान बनाई.

कोयंबटूर में हुई पढ़ाई, मेडिकल की डिग्री हासिल की

डॉ. त्यागराजन एस.एम. मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं. उपलब्ध प्रकाशित प्रोफाइल के अनुसार, उनका जन्म 20 दिसंबर 1984 को हुआ था. उन्होंने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की.

मेडिकल की पढ़ाई के बाद उनके सामने चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने का विकल्प था. हालांकि, उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में जाने का फैसला किया. सिविल सेवा में आने की उनकी कोशिश ने उन्हें एक नए क्षेत्र में काम करने का अवसर दिया. उनकी यात्रा का खास पहलू यह है कि उन्होंने अपने करियर की दिशा बदलने का फैसला किया और लगातार प्रयास जारी रखा.

पहले IPS बने, फिर IAS में बनाई जगह

डॉ. त्यागराजन एस.एम. का सिविल सेवा का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है. उपलब्ध करियर विवरण के अनुसार, वर्ष 2010 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हुआ था. इसके बाद उन्होंने ओडिशा में सहायक पुलिस अधीक्षक यानी ASP के रूप में काम किया. पुलिस सेवा में काम करने के बाद उन्होंने दोबारा UPSC परीक्षा दी. वर्ष 2011 में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए और उन्हें बिहार कैडर मिला.

इस तरह उनकी यात्रा मेडिकल की पढ़ाई से शुरू होकर पुलिस सेवा और फिर प्रशासनिक सेवा तक पहुंची. अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का यह अनुभव उनके करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.

गया के जिलाधिकारी रहते हुए स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

बिहार में डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं. उन्होंने गया, नालंदा और दरभंगा जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया. गया में जिलाधिकारी रहते हुए उनका कार्यकाल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कुछ पहलों के लिए भी चर्चा में रहा. इनमें वंडर ऐप और श्रवण श्रुति जैसी पहलों का उल्लेख किया जाता है. इन पहलों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाने और जरूरतमंद लोगों को सेवाओं से जोड़ने जैसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाना था.

जिला प्रशासन में जिलाधिकारी की भूमिका केवल सरकारी आदेश लागू करने तक सीमित नहीं होती. जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास योजनाओं और आम लोगों की समस्याओं से जुड़े कई विषयों पर समन्वय करना भी उनकी जिम्मेदारी होती है. गया में काम करने के दौरान डॉ. त्यागराजन एस.एम. को इन क्षेत्रों में प्रशासनिक अनुभव मिला.

नालंदा, दरभंगा और पटना में भी संभाली जिम्मेदारी

गया के अलावा डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने नालंदा और दरभंगा में भी जिलाधिकारी के रूप में काम किया. इन जिलों में उन्हें सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, स्थानीय समस्याओं के समाधान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी मिली. बाद में पटना के जिलाधिकारी के रूप में भी उन्होंने काम किया. राजधानी पटना में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालना कई मायनों में महत्वपूर्ण होता है. यहां शहरी विकास, यातायात, अतिक्रमण, सरकारी जमीन और नागरिक सुविधाओं से जुड़े विषयों पर लगातार काम करना पड़ता है.

पटना में उनके कार्यकाल के दौरान स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, अतिक्रमण हटाने और सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने जैसे मुद्दों पर प्रशासनिक कार्रवाई चर्चा में रही. इन जिम्मेदारियों ने उन्हें ग्रामीण और शहरी प्रशासन की चुनौतियों को समझने का अवसर दिया.

जल संरक्षण से लेकर शिक्षा प्रशासन तक का अनुभव

डॉ. त्यागराजन एस.एम. के गया में कार्यकाल के साथ जल संरक्षण के प्रयासों और राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2022 का भी उल्लेख मिलता है. हालांकि, पुरस्कार की संबंधित श्रेणी और व्यक्तिगत रूप से उनके सम्मानित होने की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक अभिलेखों से की जानी चाहिए.

बिहार में जिला प्रशासन की जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानी BSEB के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया. शिक्षा प्रशासन की यह जिम्मेदारी जिला प्रशासन से अलग तरह की थी. परीक्षा व्यवस्था, संस्थागत कामकाज और शैक्षणिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों में समन्वय की जरूरत होती है. अब उन्हें केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में निदेशक की जिम्मेदारी मिली है. यह उनके करियर का एक नया चरण है, जहां उन्हें केंद्र सरकार के स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा.

सहकारिता मंत्रालय में नई भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?

सहकारिता क्षेत्र का संबंध सहकारी समितियों, उनके प्रशासन और उनसे जुड़े संस्थागत कामकाज से है. इस क्षेत्र में केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. डॉ. त्यागराजन एस.एम. को इस मंत्रालय में निदेशक बनाए जाने के बाद उनके प्रशासनिक अनुभव का उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर किया जा सकेगा. हालांकि, उनकी नई जिम्मेदारी के तहत किन विशेष विषयों पर काम होगा, इसका आकलन पदभार ग्रहण करने और आधिकारिक कार्य-विभाजन की जानकारी सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा.

उनकी यात्रा यह दिखाती है कि करियर की शुरुआत किसी एक क्षेत्र से होने के बावजूद व्यक्ति नए लक्ष्य तय कर सकता है. लगातार प्रयास और बदलाव के लिए तैयार रहना भी सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

  • राहुल कुमार : जिला प्रशासन से ऊर्जा क्षेत्र और अब केंद्र सरकार तक
  • नई जिम्मेदारी : निदेशक, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार
  • बैच : 2011
  • कैडर : बिहार

राहुल कुमार की प्रशासनिक यात्रा भी कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरी है. उन्होंने बिहार के अलग-अलग जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया. इसके बाद ग्रामीण आजीविका, वित्त, कला-संस्कृति और ऊर्जा क्षेत्र में जिम्मेदारियां संभालीं. अब केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति हुई है. उनके करियर की खास बात यह है कि उन्होंने प्रशासन के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए व्यापक अनुभव हासिल किया है.

शिक्षा में अर्थशास्त्र और हिंदी की पृष्ठभूमि

राहुल कुमार बिहार कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं. उपलब्ध प्रशासनिक करियर प्रोफाइल के अनुसार, उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि में अर्थशास्त्र और हिंदी का अध्ययन शामिल है. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), दिल्ली से अर्थशास्त्र में स्नातक और हिंदी में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की. उपलब्ध प्रोफाइल में दोनों डिग्रियों में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने का भी उल्लेख मिलता है.

अर्थशास्त्र की पढ़ाई सरकारी योजनाओं, वित्तीय संसाधनों और विकास से जुड़े विषयों को समझने में उपयोगी हो सकती है. वहीं, हिंदी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भाषा और संवाद से जुड़े कौशल को विकसित करने में मदद करती है. हालांकि, किसी अधिकारी के प्रशासनिक कामकाज का मूल्यांकन उसकी डिग्रियों के साथ-साथ उसके अनुभव, निर्णयों और जिम्मेदारियों के आधार पर भी किया जाता है.

गोपालगंज से पूर्णिया तक जिला प्रशासन में काम

राहुल कुमार ने बिहार के कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. उनके प्रशासनिक करियर में गोपालगंज, बेगूसराय और पूर्णिया जैसे जिलों का विशेष स्थान रहा है.

गोपालगंज: अगस्त 2015 से अप्रैल 2018 तक

गोपालगंज में उन्होंने जिला प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं. इस दौरान सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आम लोगों से जुड़े प्रशासनिक कामकाज का अनुभव प्राप्त किया.

बेगूसराय: अप्रैल 2018 से अगस्त 2019 तक

बेगूसराय में भी उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं. जिला स्तर पर सरकारी सेवाओं को बेहतर तरीके से लागू करना, विभागीय कामकाज की निगरानी और स्थानीय समस्याओं के समाधान जैसे विषय जिलाधिकारी की भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं.

पूर्णिया: अगस्त 2019 से मई 2022 तक

पूर्णिया में राहुल कुमार ने जिलाधिकारी के रूप में लगभग पौने तीन वर्ष तक जिम्मेदारी संभाली. इस पद पर उन्हें जिले के प्रशासनिक कामकाज के साथ विकास योजनाओं और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल बनाए रखने का अवसर मिला. लगातार अलग-अलग जिलों में काम करने से अधिकारियों को स्थानीय जरूरतों, प्रशासनिक चुनौतियों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की व्यापक समझ मिलती है.

ग्रामीण आजीविका परियोजना में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

जिला प्रशासन के बाद राहुल कुमार को ग्रामीण विकास से जुड़े क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला. उपलब्ध करियर विवरण के अनुसार, मई 2022 से जनवरी 2024 तक उन्होंने बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजना के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी यानी CEO के रूप में काम किया. ग्रामीण आजीविका से जुड़ी परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, आजीविका के अवसर विकसित करने और लोगों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने जैसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाना होता है.

इस क्षेत्र में काम करने के लिए सरकारी योजनाओं के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों की जरूरतों और परियोजनाओं के प्रबंधन को समझना जरूरी है. जिला प्रशासन में योजनाओं को लागू करने का अनुभव रखने वाले राहुल कुमार के लिए यह जिम्मेदारी एक अलग तरह का प्रशासनिक अनुभव लेकर आई. यहां काम का दायरा किसी एक जिले तक सीमित नहीं था, बल्कि ग्रामीण आजीविका से जुड़ी परियोजनाओं के संचालन और समन्वय से भी संबंधित था.

वित्त और कला-संस्कृति विभाग में भी किया काम

राहुल कुमार का प्रशासनिक अनुभव केवल जिला प्रशासन और ग्रामीण विकास तक सीमित नहीं रहा. उपलब्ध करियर विवरण के मुताबिक, जनवरी से अक्टूबर 2024 के बीच उन्होंने कला, संस्कृति एवं युवा विभाग में पुरातत्व और संग्रहालय से संबंधित जिम्मेदारियां संभालीं. इस तरह के विभागों में सांस्कृतिक विरासत, पुरातात्विक महत्व के स्थलों और संग्रहालयों से जुड़े प्रशासनिक विषय महत्वपूर्ण होते हैं.

इसके बाद अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक उन्होंने बिहार सरकार के वित्त विभाग में विशेष सचिव के रूप में जिम्मेदारी निभाई. वित्त विभाग का काम सरकारी संसाधनों, बजट और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ा होता है. इस विभाग में काम करने से राज्य सरकार के वित्तीय कामकाज की समझ विकसित करने का अवसर मिलता है. अलग-अलग विभागों में काम करने का अनुभव किसी अधिकारी को विभिन्न नीतिगत विषयों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद कर सकता है.

बिजली वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी

राहुल कुमार के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव ऊर्जा क्षेत्र में उनकी नियुक्ति रही. उपलब्ध प्रशासनिक विवरण के अनुसार, जून 2025 से अक्टूबर 2026 तक उन्होंने उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनियों के प्रबंध निदेशक के रूप में काम किया. इसके साथ ही वह बिहार नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी यानी BREDA के निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे.

बिजली वितरण कंपनियों का काम उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने और वितरण व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक तथा परिचालन कार्यों से संबंधित होता है. वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सौर ऊर्जा सहित स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को बढ़ावा देने से जुड़े विषय महत्वपूर्ण हैं.

इन जिम्मेदारियों में काम करने से उन्हें सार्वजनिक उपयोगिताओं, ऊर्जा प्रशासन और संस्थागत प्रबंधन से जुड़ा अनुभव मिला. इस प्रकार, राहुल कुमार का करियर जिला प्रशासन से शुरू होकर ग्रामीण आजीविका, संस्कृति, वित्त और ऊर्जा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचा.

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में नई जिम्मेदारी

अक्टूबर 2026 में केंद्र सरकार ने राहुल कुमार को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में निदेशक नियुक्त करने की मंजूरी दी. उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से पांच वर्ष या अगले आदेश तक, जो पहले हो, निर्धारित किया गया है.

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय केंद्र सरकार के स्तर पर अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित नीतियों और योजनाओं से जुड़े विषयों पर काम करता है. मंत्रालय की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय में अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.

राहुल कुमार के पास जिला प्रशासन, ग्रामीण विकास, वित्त और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का अनुभव है. अब केंद्र सरकार में उनकी नई भूमिका इस अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करने का अवसर प्रदान करेगी. हालांकि, उनकी नियुक्ति के बाद किन विशेष योजनाओं या विभागीय विषयों की जिम्मेदारी उन्हें दी जाएगी, इसकी जानकारी आधिकारिक कार्य-विभाजन के आधार पर ही स्पष्ट होगी.

दोनों IAS अधिकारियों की कहानी में क्या है खास?

डॉ. त्यागराजन एस.एम. और राहुल कुमार, दोनों का चयन एक ही बैच यानी 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए हुआ था. दोनों बिहार कैडर के अधिकारी हैं और उन्होंने राज्य में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं. फिर भी, दोनों की प्रशासनिक यात्राओं में अलग-अलग विशेषताएं हैं. डॉ. त्यागराजन एस.एम. की कहानी मेडिकल की पढ़ाई से शुरू होकर IPS और फिर IAS तक पहुंचती है. उन्होंने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य संबंधी पहलों और शिक्षा प्रशासन से जुड़े क्षेत्रों में काम किया. अब वह सहकारिता मंत्रालय में निदेशक की भूमिका निभाएंगे.

दूसरी ओर, राहुल कुमार की यात्रा जिला प्रशासन से ग्रामीण आजीविका, कला-संस्कृति, वित्त और ऊर्जा क्षेत्र तक पहुंची है. अब उन्हें अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में निदेशक के रूप में काम करने का अवसर मिला है. दोनों अधिकारियों के करियर में एक समान बात यह है कि उन्हें समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की जिम्मेदारी मिली. इन अनुभवों ने उनके प्रशासनिक कार्यक्षेत्र को व्यापक बनाया.

युवाओं के लिए क्या है इनकी सफलता का संदेश

इन दोनों अधिकारियों की कहानी से युवाओं को कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं.

  1. करियर में बदलाव से डरना नहीं चाहिए. डॉ. त्यागराजन एस.एम. की यात्रा बताती है कि चिकित्सा की पढ़ाई के बाद भी कोई व्यक्ति पुलिस और प्रशासनिक सेवा में अपना करियर बना सकता है. इसके लिए लक्ष्य के प्रति स्पष्टता और निरंतर प्रयास जरूरी हैं.
  2. सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती.  राहुल कुमार ने जिला प्रशासन के बाद ग्रामीण विकास, वित्त और ऊर्जा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया. नए विभाग में जिम्मेदारी मिलने के साथ नए विषयों को समझने का अवसर भी मिलता है.
  3. प्रशासनिक अनुभव व्यापक होना चाहिए. जिला स्तर पर काम करने से स्थानीय समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है, जबकि विभागीय और केंद्रीय स्तर की जिम्मेदारियां नीतियों और योजनाओं के बड़े दायरे को समझने में मदद करती हैं.
  4. पद के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है. किसी अधिकारी की सफलता केवल नई नियुक्ति मिलने से नहीं, बल्कि उसे सौंपी गई जिम्मेदारियों को प्रभावी तरीके से निभाने से भी तय होती है.

बिहार से केंद्र तक, प्रशासनिक अनुभव का नया अध्याय

डॉ. त्यागराजन एस.एम. और राहुल कुमार को केंद्र सरकार में निदेशक स्तर की जिम्मेदारी मिलना उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है. दोनों अधिकारियों ने बिहार में जिला प्रशासन से लेकर विभिन्न विभागों तक काम करते हुए अनुभव हासिल किया है.

एक अधिकारी ने मेडिकल की पढ़ाई के बाद IPS और IAS तक का सफर तय किया, जबकि दूसरे अधिकारी ने जिला प्रशासन से आगे बढ़कर ग्रामीण आजीविका, वित्त और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम किया. अब सहकारिता मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में उनकी नई भूमिकाएं उनके अनुभव को केंद्र सरकार के स्तर पर इस्तेमाल करने का अवसर देंगी.

इनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सफलता किसी एक रास्ते तक सीमित नहीं होती. लगातार सीखने, नई चुनौतियों को स्वीकार करने और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्ध रहने से करियर में नए अवसर मिल सकते हैं. बिहार के इन दोनों IAS अधिकारियों की कहानी बताती है कि मेहनत, अनुभव और बदलती जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने की इच्छा किसी भी करियर को नई दिशा दे सकती है.

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